प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं। इस समय पर होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के चलते महिलाओं की फिजिकल और मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होती है। यूं तो इस वक्त को खुशी और एक्साइटमेंट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन मां बनने का यह सफर महिलाओं के लिए आसान नहीं होता है। इस सम पर रूटीन चेकअप और टेस्ट करनावा जरूरी हो जाता है। कई बार सभी टेस्ट नॉर्मल होते हैं, डॉक्टर भी कहते हैं कि मां और बच्चा दोनों ठीक हैं, फिर भी मन में किसी अनहोनी का डर, बेचैनी या लगातार चिंता बनी रहती है। कभी डिलीवरी को लेकर डर सताता है, तो कभी बच्चे की सेहत को लेकर बार-बार नकारात्मक विचार आने लगते हैं। सब कुछ ठीक होने के बाद भी प्रेग्नेंसी में होने वाली इस एंग्याजटी की क्या वजह है, चलिए एक्सपर्ट से समझते हैं। इस बारे में Dr. Madhavi Reddy Vennapusa, Consultant Obstetrician and Gynaecologist, Yashoda Hospitals Secunderabad,Hyderabad जानकारी दे रही हैं।
Pregnancy में बिना वजह Anxiety होने की क्या वजह है?
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को कई बातों का डर सताता है। सब कुछ ठीक होने के बाद भी इस तरह एंग्जायटी महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
1. तनाव के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाती हैं महिलाएं
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का घबराहट या चिंता महसूस करना आम बात है, भले ही मेडिकल जांच नॉर्मल हों और सब कुछ ठीक चल रहा हो। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई बड़े हार्मोनल, इमोशनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जो मूड पर असर डाल सकते हैं और महिलाओं को तनाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकते हैं।
2. आने वाले वक्त की चिंता से होती है घबराहट
बच्चे की सेहत, डिलीवरी, दर्द, पेरेंटिंग की जिम्मेदारियों और पर्सनल या प्रोफेशनल जिंदगी में बदलावों को लेकर भी चिंता या घबराहट हो सकती है। कई बार महिलाओं को इस बात का भी डर रहता है कि अगर इस प्रेंग्नेंसी के इस सफर में उनसे कोई गलती हो गई, तो उनके होने वाले बच्चे पर इसका असर हो सकता है।
3. इन लक्षणों की वजह से भी हो सकती चिंता
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में तकलीफ या बेचैनी जैसे शारीरिक लक्षण महसूस हो सकते हैं। उन्हें हर समय कुछ बुरा होने की चिंता हो सकती है, वे बार-बार तसल्ली चाह सकती हैं या उन्हें नींद आने में तकलीफ हो सकती है। इन भावनाओं का मतलब यह नहीं है कि महिला स्थिति को संभालने में असमर्थ है या इसकी कद्र नहीं करती। ये जिंदगी में आए बड़े बदलाव के प्रति एक सामान्य प्रतिक्रिया है।
बार-बार घबराहट होने को न करें नजरअंदाज
डॉक्टर का कहना है कि प्रेग्नेंसी में लगातार या बहुत ज्यादा चिंता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर चिंता की वजह से नींद, रोजमर्रा के कामों, रिश्तों या प्रेग्नेंसी का आनंद लेने में परेशानी हो रही है, तो महिला को अपने डॉक्टर (ऑब्स्टेट्रिशियन) या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए।
कैसे दूर हो सकती हैं एंग्जायटी?
काउंसलिंग, इमोशनल सपोर्ट, रिलैक्सेशन एक्सरसाइज, हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी, भरपूर आराम और चिंता बढ़ाने वाली ऑनलाइन जानकारी से दूरी बनाना मददगार हो सकता है। परिवार के सदस्यों को बिना किसी जजमेंट के बात सुननी चाहिए और प्रैक्टिकल मदद देनी चाहिए। समय रहते मदद लेने से मां की इमोशनल सेहत बेहतर हो सकती है और प्रेग्नेंसी का अनुभव ज्यादा बेहतर हो सकता है।
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