हफ्तेभर की भागदौड़, ऑफिस के काम, लंबे ट्रेवल और लोगों से मिलने-जुलने के बाद कई लोगों का मन करता है कि वीकेंड पूरी तरह से घर पर ही बीते। जहां कुछ लोग शनिवार-रविवार को घूमने या पार्टी करने का प्लान बनाते हैं, वहीं एक बड़ा ग्रुप ऐसा भी है जो घर के शांत माहौल में खुद के साथ वक्त बिताना पसंद करता है। बाहर से देखने में यह तरीका भले ही बोरिंग लगे, लेकिन साइकोलॉजी के मुताबिक, यह कोई आलस या सामाजिक दूरी नहीं, बल्कि खुद को रिचार्ज करने का एक बेहद कारगर और वैज्ञानिक तरीका है। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
कुछ लोग वीकेंड पर घर पर क्यों रहते हैं?
रिसर्च पत्रिका 'वाइली ऑनलाइन लाइब्रेरी' में प्रकाशित एक अध्ययन 'रिकवरी फ्रॉम जॉब स्ट्रेस' के अनुसार, काम से मानसिक दूरी बनाना इंसान की दिमागी सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
1. मानसिक सुख और रिकवरी
बता दें कि घर पर वीकेंड स्पेंड करने से कई फायदे हो सकते हैं, जो निम्न प्रकार हैं-
- मानसिक शांति का मिलना: हफ्ते भर के तनाव के बाद घर पर रहकर अपने पसंदीदा छोटे-मोटे काम करना, जैसे किताब पढ़ना, अपनी अलमारी व्यवस्थित करना या कुकिंग करना, दिमाग को काम की चिंता से पूरी तरह मुक्त करता है।
- रिकवरी का आसान तरीका: थोड़ा ज्यादा सोना या बिना किसी हड़बड़ी के पसंदीदा खाना बनाना जैसी छोटी गतिविधियां व्यक्ति के अंदर मानसिक संतुलन वापस लाती हैं।
2. दिनचर्या की स्थिरता से मिलता है सुकून
जिन लोगों को वीकेंड पर घर में रहना पसंद होता है, वे एक निश्चित और रूटीन में ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करते हैं।
- शनिवार की सुबह आराम से चाय पीना, पसंदीदा म्यूजिक सुनना या कोई सीरीज देखना, ये छोटी-छोटी आदतें दिमाग को बार-बार नए माहौल के हिसाब से ढलने के तनाव से बचाती हैं।
- जो काम हफ्ते भर व्यस्तता के कारण छूट जाते हैं, जैसे वर्कआउट, पर्सनल प्रोजेक्ट्स या अपनी हॉबी, उनके लिए घर का शांत माहौल सबसे अच्छा होता है।
3. मजबूत और गहरे सामाजिक संबंध
अक्सर यह मान लिया जाता है कि घर में रहने वाले लोग अलग रहना पसंद करते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। वे अपनी सोशल एनर्जी को सोच-समझकर खर्च करना पसंद करते हैं।
- वे दर्जनों लोगों की भीड़ में जाने के बजाय किसी एक खास दोस्त से लंबी बातचीत करने या घर पर ही करीबी दोस्तों के साथ खाना खाने को प्राथमिकता देते हैं।
- ऐसे लोग जल्दी समझ जाते हैं कि कब उनका दिमाग थक रहा है। इसलिए, खुद को पूरी तरह से ड्रेन होने से बचाने के लिए वे बेवजह के प्लांस को मना करने में हिचकिचाते नहीं हैं।
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4. खुद के साथ समय बिताने का सुख है अलग
'रिसर्चगेट' में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, वीकेंड पर की जाने वाली पर्सनल एक्टिविटिज इंसान की शारीरिक और मानसिक क्षमता को फिर से तरोताजा कर देती हैं।
- पेंटिंग करना, गार्डनिंग करना, गेमिंग या बेकिंग जैसी गतिविधियां बिना किसी बाहरी दबाव के अंदर से सुख देती हैं।
- शांत घर में बिना किसी डिस्टर्बेंस के वित्तीय योजनाएं बनाना, पढ़ाई करना या अगले सप्ताह की प्लानिंग करना ज्यादा आसान हो जाता है।
निष्कर्ष
वीकेंड पर घर में रहना समय की बर्बादी नहीं, बल्कि आने वाले हफ्ते के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने की एक अच्छी कोशिश है।
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