महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। थकान, बाल झड़ना, वजन बढ़ना या बार-बार कमजोरी महसूस होना जैसी परेशानियों को कई बार सामान्य समझकर टाल दिया जाता है। असल में ये लक्षण शरीर में पोषक तत्व की कमी, हार्मोनल गड़बड़ी या दूसरी परेशानियों का संकेत भी हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट की मदद से समय रहते इन समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
महिलाओं के लिए ब्लड टेस्ट हैं बहुत जरूरी
क्या आप जानती हैं कि शरीर में बढ़ता कोलेस्ट्रॉल, थायरॉइड की गड़बड़ी और डायबिटीज जैसी समस्याएं शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद हो सकती हैं? खासकर महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, पोषण की कमी और पीरियड्स से जुड़ी परेशानियां सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सिर्फ बीमारी होने पर डॉक्टर के पास जाना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी उम्र, सेहत और जोखिम के अनुसार जरूरी जांच करवाना भी महत्वपूर्ण है। आइए श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट की चीफ डाइटिशिन प्रिया पालीवाल से जानते हैं कि हर महिला को कौन से 6 टेस्ट करवाने चाहिए?
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महिलाओं के लिए जरूरी हैं ये 6 हेल्थ टेस्ट
1. CBC टेस्ट (Complete Blood Count)
CBC एक नॉर्मल ब्लड टेस्ट है, जिससे शरीर में रेड ब्लड सेल्स (RBC), व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC), प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन का लेवल पता चलता है। महिलाओं में पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने से खून की कमी यानी एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।
इससे क्या पता चलता है?
- हीमोग्लोबिन कम होने और एनीमिया की समस्या।
- शरीर में संक्रमण के संभावित संकेत।
- प्लेटलेट्स की कमी या अधिकता।
- लगातार थकान और कमजोरी की वजह।
अगर पर्याप्त नींद के बाद भी थकान रहती है, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलती है या त्वचा पीली नजर आती है, तो डॉक्टर CBC टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
2. थायरॉइड प्रोफाइल (TSH, T3 और T4)
थायराइड ग्लैंड शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी और कई हार्मोनल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। महिलाओं में थायरॉइड की गड़बड़ी के कारण वजन और पीरियड्स में बदलाव देखने को मिलते हैं।
इससे क्या पता चलता है?
- हाइपोथायरॉइडिज्म यानी थायरॉइड का सक्रिय होना।
- हार्मोन के असंतुलन के संभावित संकेत।
बिना वजह वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, ठंड अधिक लगना, मूड में बदलाव और अनियमित पीरियड्स इसके कुछ लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब हमेशा थायरॉइड की समस्या होना नहीं है।
3. ब्लड शुगर टेस्ट (Fasting Sugar और HbA1c)
डायबिटीज की समस्या लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। इसलिए, ब्लड शुगर की जांच महत्वपूर्ण है। इसके लिए फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट किए जाते हैं।
इनसे क्या पता चलता है?
- फास्टिंग टेस्ट से खाली पेट ब्लड शुगर का स्तर।
- HbA1c से पिछले लगभग तीन महीनों का औसत ब्लड शुगर।
- प्रीडायबिटीज और डायबिटीज के संकेत।
बार-बार मीठा खाने की इच्छा, गर्दन पर काले धब्बे, अधिक प्यास और थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। PCOS या परिवार में डायबिटीज का इतिहास होने पर डॉक्टर इसकी जांच की सलाह दे सकते हैं।
4. लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Cholesterol Test)
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या अक्सर शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती है। यही वजह है कि कई महिलाओं को इसका पता तब चलता है, जब दिल से जुड़ी परेशानी सामने आती है।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में मुख्य रूप से ये चीजें जांची जाती हैं-
- LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल।
- HDL यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल।
- ट्राइग्लिसराइड्स।
- कुल कोलेस्ट्रॉल कितना।
इस जांच से दिल की बीमारियों के जोखिम का आकलन करने में मदद मिलती है। हालांकि, इसे हर महिला के लिए पूरे साल करवाना जरूरी नहीं है। इसकी जरूरत उम्र और अन्य जोखिमों के आधार पर तय होती है।
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5. विटामिन D और विटामिन B12 टेस्ट
शरीर में विटामिन D और B12 की कमी होने पर कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। विटामिन D हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत के लिए जरूरी है, जबकि विटामिन B12 नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
इनकी कमी के लक्षण
- लगातार थकान और कमजोरी।
- हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द।
- हाथ-पैरों में झनझनाहट।
- बाल झड़ना और एकाग्रता में परेशानी।
इन लक्षणों की वजह जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार विटामिन D और B12 की जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं।
6. पैप स्मीयर और HPV टेस्ट
यह ब्लड टेस्ट नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए एक जरूरी सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग जांच है। इसमें सर्विक्स की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों और HPV संक्रमण का पता लगाया जाता है।
HPV के कुछ प्रकार सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। समय पर स्क्रीनिंग से कैंसर बनने से पहले कोशिकाओं में होने वाले बदलावों का पता लगाने में मदद मिलती है।
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कब करवाएं यह जांच?
- 21 से 29 साल की महिलाओं के लिए पैप स्मीयर हर 3 साल में एक ऑप्शन है।
- 30 से 65 साल की महिलाओं के लिए HPV टेस्ट हर 5 साल में या पैप स्मीयर हर 3 साल में करवाया जा सकता है।
- दोनों टेस्ट साथ करवाने का विकल्प भी मौजूद है।
हालांकि, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम के आधार पर जांच का समय बदल सकता है।
क्या हर महिला को साल में एक बार ये सभी टेस्ट करवाने चाहिए?
इसका जवाब है- नहीं। हर महिला के लिए ये सभी 6 जांच करवाना जरूरी नहीं है। जांच की जरूरत उम्र, पारिवारिक इतिहास, लाइफस्टाइल, लक्षण और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करती है। इसलिए, बिना डॉक्टर की सलाह के सभी टेस्ट करवाने या उनकी रिपोर्ट देखकर खुद इलाज शुरू करने से बचें। नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं और अपनी सेहत से जुड़ी छोटी परेशानियों को भी नजरअंदाज न करें।
महिलाएं अक्सर अपनी थकान और कमजोरी को नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन ये शरीर के अंदर की कमी का संकेत हो सकते हैं। हर महिला को सभी टेस्ट हर साल करवाना जरूरी नहीं है, अपनी उम्र और लक्षणों के हिसाब से डॉक्टर की सलाह से ही जांच करवाएं और खुद से इलाज करने से बचें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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