सुबह उठते ही जबड़े में दर्द, सिर भारी होना और दांतों में झनझनाहट; अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है तो हो सकता है आप रात में दांत पीसते हों। कई बार साथ सोने वाला व्यक्ति बताता है कि रात भर दांतों से किटकिट की आवाज आती है। इसे हम नींद में की गई एक छोटी आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉक्टर इसे Bruxism कहते हैं, जो धीरे-धीरे आपके दांतों को घिसकर खत्म कर देता है।

आपको भी है सोते समय दांत किटकिटाने की आदत?

ऑफिस का स्ट्रेस, रात में फोन चलाना और अधूरी नींद, हमारी लाइफस्टाइल का सीधा असर हमारी नींद पर पड़ता है। दिनभर का टेंशन रात में दांतों पर निकलता है। National Institute of Dental and Craniofacial (NIH) की रिसर्च बताती है कि भारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति स्लीप ब्रुक्सिज्म से परेशान है, पर 80% लोगों को पता ही नहीं चलता कि वो नींद में दांत किटकिटाते हैं। ये आदत बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकती है।

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दांत पीसने की असली वजह क्या है?

इसका एक कारण नहीं, कई कारण मिलकर इसे बनाते हैं।

1. स्ट्रेस और एंग्जायटी सबसे बड़ी वजह

दिनभर की परेशानियां, काम का दबाव और बेचैनी कुछ लोगों में दांत पीसने की समस्या से जुड़े हो सकती है। स्ट्रेस के कारण व्यक्ति जागते हुए भी अनजाने में जबड़े कसकर दबा लेता है।

2. नींद का पैटर्न बिगड़ना

खर्राटे लेना, नींद बार-बार खुलना और स्लीप एपनिया जैसी स्थितियां नींद में दांत पीसने से जुड़ी हो सकती हैं।

3. चाय-कॉफी और शराब का सेवन

खासकर शाम या रात में ज्यादा कैफीन लेने और शराब पीने से कुछ लोगों में दांत पीसने की समस्या बढ़ जाती है। सिगरेट भी इसका जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।

4. कुछ दवाएं

कुछ दवाओं, विशेष रूप से कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के साथ दांत पीसने की समस्या देखी जाती है। अगर दवा शुरू करने के बाद ऐसा होने लगा है, तो डॉक्टर से बात करें। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।

दांत पीसने के लक्षण कैसे पहचानें?

अगर आप रात में दांत पीसते हैं, तो सुबह उठने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं।

  • जबड़े में दर्द या अकड़न
  • सुबह सिरदर्द या चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव
  • दांतों में ठंडा-गर्म लगना
  • दातों का घिसना, टूटना या उनमें दरार आना
  • कान के आसपास दर्द महसूस होना
  • सोते समय दांत रगड़ने की आवाज आना

टीथ ग्राइंडिंग रोकने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

1. सोने से पहले तनाव को कम करें

रात को सोने से पहले गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, मेडिटेशन या हल्का योग करें। अपनी पसंद का शांत म्यूजिक सुनना भी रिलैक्स होने में मदद करता है।

2. सोने का समय तय करें

रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।

3. रात में कैफीन से बचें

शाम के बाद चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन कम करें। शराब और तंबाकू से भी बचें।

4. जबड़े को आराम दें

दिन में ध्यान रखें कि आपके दांत लगातार एक-दूसरे से दबे न रहें। जबड़ा ढीला रखें और दांतों के बीच हल्की दूरी बनाए रखें। अगर जबड़े में दर्द है, तो च्युइंग गम चबाने और बहुत सख्त चीजें खाने से बचें।

5. दर्द होने पर गर्म या ठंडी सिकाई करें

जबड़े की मांसपेशियों में दर्द होने पर कपड़े में लपेटकर गर्म या ठंडी सिकाई से राहत मिल सकती है। सिकाई सीधे मुंह पर न करें। यह उपाय दर्द कम कर सकता है, लेकिन दांत पीसने की मूल वजह का इलाज नहीं है।

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कब डॉक्टर या डेंटिस्ट को दिखाना चाहिए?

अगर सुबह रोजाना जबड़े में दर्द होता है, दांत कमजोर हो गए हैं या उनमें टूटने और घिसने के संकेत दिख रहे हैं, तो डेंटिस्ट से मिलें। वे जरूरत पड़ने पर दांतों की सुरक्षा के लिए कस्टम माउथगार्ड या नाइट गार्ड की सलाह दे सकते हैं। यह दांतों को नुकसान से बचाने में मदद करता है। अगर तेज खर्राटे आते हैं, नींद में सांस रुकने जैसी समस्या होती है या दिनभर बहुत नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

रात में दांत पीसना कोई बुरी आदत नहीं, बल्कि आपके शरीर का संकेत है कि आपका दिमाग और नींद दोनों थके हुए हैं। इसे सिर्फ दांतों की समस्या समझकर टालें नहीं। सही समय पर नाइट गार्ड का इस्तेमाल, नींद को सुधारना और तनाव कम करना आपके दांतों को उम्र भर मजबूत रख सकता है। अगर लक्षण लगातार हैं तो किसी डेंटिस्ट या स्लीप स्पेशलिस्ट से जरूर सलाह लें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।