हमारे यहां भारतीय घरों में ज्‍यादातर लोगों को गार्डन‍िंग का शौक होता है। कुछ लोग इसे शौक मानते हैं, तो वहीं कई लोग इसे समय ब‍िताने का एक तरीका समझते हैं। ज्‍यादातर लोग बालकनी में पौधे लगाते हैं, तो वहीं कुछ लोग प्रॉपर बगीचे में गार्डनि‍ंग करते हैं, लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि यह एक नॉर्मल सी आदत आपके मेंटल हेल्‍थ के ल‍िए भी फायदेमंद साब‍ित हो सकती है?

दरअसल, न्‍यूरोसाइंस और ब्रेन हेल्‍थ से जुड़ी स्‍टडीज बताती हैं क‍ि गार्डन‍िंग करने से द‍िमाग को लंबे समय तक हेल्‍दी रखा जा सकता है। इससे मेमोरी भी स्‍ट्रॉन्‍ग होती है। इससे हमारा द‍िमाग एक्‍ट‍िव रहता है और तनाव भी कम होता है। कुल म‍िलाकर आपकी यह अच्‍छी आदत आपके द‍िमाग काे बढ़ती उम्र में भी द‍िमाग को 10 साल जवान रख सकती है। आइए इसके बारे में जानते हैं व‍िस्‍तार से-

गार्डनिंग दिमाग को कैसे एक्टिव रखती है?

न्यूरोसाइंस के मुताबिक, जब हमारा दिमाग नई चुनौतियों का सामना करता है और नई चीजें सीखता है तो बेहतर तरीके से काम करता है। जब हम पौधे लगाते हैं, उनकी देखभाल करते हैं या यह तय करते हैं कि किस पौधे को कितनी धूप और पानी चाहिए, तब दिमाग लगातार काम कर रहा होता है। गार्डनिंग करते समय हमें कई छोटे-छोटे फैसले लेने पड़ते हैं। जैसे पौधों की जरूरतों को समझना, मौसम के हिसाब से देखभाल करना और रोजाना के कामाें को याद रखना, इन सभी चीजों से द‍िमाग एक्‍ट‍िव रहता है।

तनाव कम करने में म‍िलती है मदद

ये तो हम सभी जानते हैं क‍ि तनाव और दिमाग का बहुत गहरा कनेक्‍शन है। जब हम लंबे तक तनाव में रहते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ता है। अगर लंबे समय तक कॉर्टिसोल का लेवल ज्‍यादा रहा तो याददाश्त से जुड़े दिमाग के हिस्सों पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में गार्डनिंग के दौरान पौधों को पानी देना, मिट्टी तैयार करना या सिर्फ हरियाली के बीच समय बिताना मन को शांत करता है। इससे मेंटल प्रेशर कम लगता है।

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रिसर्च में क्या सामने आया?

जर्नल The Lancet Planetary Health में छपी र‍िसर्च में बताया गया है क‍ि कम्युनिटी गार्डनिंग करने वाले लोगों में फ‍िज‍िकल और मेंटल हेल्‍थ से जुड़े कई सकारात्मक बदलाव देखे गए। दरअसल, अकेलापन, तनाव और खराब खानपान जैसी चीजें उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में गार्डनिंग सबसे बेस्‍ट तरीका है।

उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ जाता है इसका महत्व?

ब्रेन गेम्स या पहेलियां दिमाग के कुछ हिस्सों को एक्‍ट‍िव करती हैं, लेकिन गार्डनिंग में एक साथ कई तरह के काम शामिल होते हैं। जैसे-

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  • प्‍लानि‍ंग करनी पड़ती है
  • चीजें याद रखनी पड़ती हैं
  • समस्याओं का हल निकालना पड़ता है
  • हाथ और आंखों के बीच तालमेल बनाना होता है
  • बदलते मौसम के अनुसार पौधों के ल‍िए फैसले लेने पड़ते हैं

क्या गार्डनिंग दिमागी बीमारियों का इलाज है?

यह समझना जरूरी है कि गार्डनिंग डिमेंशिया या याददाश्त से जुड़ी बीमारियों का इलाज नहीं है। यह डॉक्टर की सलाह, दवाओं, अच्छी नींद, व्यायाम और हेल्‍दी डाइट का ऑप्‍शन भी नहीं है। बस गार्डनिंग को हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल का हिस्सा बनाना दिमाग की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

तो अगर आप बढ़ती उम्र में भी अपने दिमाग को एक्‍ट‍िव और हेल्‍दी स्वस्थ रखना चाहती हैं, तो रोज कुछ समय पौधों के साथ बिताना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Source-
https://www.thelancet.com/journals/lanplh/article/piis2542-5196(22)00303-5/fulltext

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