क्या सुबह उठते ही आपका मूड खराब रहता है, शरीर के कई हिस्सों में दर्द होता है या फिर चिंता रहती है। इससे छुटकारा पाने के लिए किसी दवा की नहीं, बल्कि ‘बाडी टैपिंग’ की जरूरत है। कैसे करते हैं यह उपचार और क्या हैं इसके फायदे, एक्सपर्ट से जानें...

क्या है बाडी टैपिंग तकनीक (ईएफटी)

बाडी टैपिंग यानी इमोशनल फ्रीडम टेक्निक (ईएफटी) जो शारीरिक और भावनात्मक दर्द कम करने की एक घरेलू तकनीक है। इससे शरीर की ऊर्जा प्रणाली जागृत होती है और खराब मूड अच्छा हो जाता है। हालांकि इस तकनीक के नाम में ही इसका मतलब छुपा है। ईएफटी- ‘इमोशनल फ्रीडम टेक्निक’ यानी चिंता, अवसाद और नकारात्मक भावनाओं को दूर करने वाली तकनीक। इस दौरान हथेली से शरीर के विभिन्न अंगों पर थपथपी मारी जाती है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों तक सकारात्मक संकेत पहुंचता है कि आप स्वस्थ हैं।

पांच मिनट में छू मंतर होगा दर्द

टैपिंग के दौरान आपके शरीर में जहां भी दिक्कत हो रही है वहां पहले ध्यान केंद्रित करना होगा उसके बाद सांसों की गति को देखते हुए टैपिंग शुरू कर सकते हैं। टैपिंग तभी काम करती है जब उसके साथ सकारात्मक सोच जुड़ जाती है, जैसे आपको खुद से यह कहना होगा कि भले ही मैं तनाव में हूं लेकिन मैं इसे स्वीकार करता हूं।"

कैसे कम होता है तनाव

शरीर के जिस भी हिस्से में आप थपथपाते हैं, वहां से कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन कम होने लगता है और एंडोर्फिन, सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन रिलीज होने लगते हैं। इससे मूड में सुधार होता है और तनाव गायब होने लगता है। साथ ही शरीर का नर्वस सिस्टम भी शांत होता है और एंग्जाइटी कम होती है।

ऐसे करें टैपिंग

पैर, हाथ, सिर, गर्दन, पीठ या चेहरा जहां भी टैपिंग कर रहे हैं, वहां थपथपाने का एहसास जरूर होना चाहिए। हथेली से दर्द वाले अंगों पर जोर जोर से थपथपी करें। पांच से दस मिनट तक ऐसा करने से नर्वस सिस्टम सुचारू रूप से चलने लगता है। दरअसल, एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर के अंग तंत्रों को जोड़ने वाली बारह प्रमुख नसें होती हैं। ये नसें उंगलियों के सिरों से शुरू होकर मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं और वहां से विभिन्न अंगों तक जाती हैं।

अस्थमा दूर भगाए

आप चाहें तो रोजाना शरीर के सभी हिस्सों पर थपथपा सकते हैं। इससे आपको नींद अच्छी आएगी और पोस्टट्रामेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर, अस्थमा, मांसपेशियों में दर्द और फाइब्रोमायल्जिया जैसी समस्याएं दूर होंगी। हां, केवल एक दिन या एक हफ्ते टैपिंग करने से नतीजे नहीं मिलेंगे, कम से कम एक महीने तक रोजाना टैपिंग करना लाभकारी है।

सालों पुराना दर्द होगा गायब

टैपिंग थेरेपिस्ट नीराली ठक्कर कहती हैं, शरीर में जहां भी दर्द हो रहा है वहां ऊंगलियों से तब तक थपथपाते रहें जब तक सकारात्मक ऊर्जा महसूस ना हो। अगर आप पांच से दस मिनट तक ऐसा लगातार करते रहेंगे तो शारीरिक और मानसिक तनाव दूर होने लगेगा। कई बार हमारा शरीर कई तरह की नकारात्मक भावनाओं को बगैर प्रोसेस किए मन के अंदर दबा देता है, जिसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि शरीर और मन को हल्का करने के लिए टैपिंग करें, ताकि दर्द, दुख और गुस्सा अंदर दबा ना रहे

ये हैं फायदे

1- तनाव वाला हार्मोन कोर्टिसल का स्तर कम होने लगता है।

2- रक्त प्रवाह बेहतर होता है।

3- मांसपेशियों के तनाव को शांत करती है टैपिंग।

4- शरीर में दबी भावनाओं को प्रोसेस करने में मदद करती है टेपिंग।

5- ईएफटी से पूरा नर्विस सिस्टम रीबूट हो जाता है और दिमाग को संकेत जाता है कि आप स्वस्थ हैं।

कहां से आई ये थेरेपी

यह एक पश्चिमी थेरेपी है जो पिछले कुछ सालों से भारत में तेजी से बढ़ रही है, मानसिक रोगों में उपचार के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। 1980 के दशक में डा. रोजर कैलाहन द्वारा विकसित 'थाट फील्ड थेरेपी' से प्रेरित होकर गैरी क्रेग ने इसे सरल बनाया।

निमहंस के मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर जयसूर्या का कहना है कि बाडी टैपिंग तनाव से राहत पाने का एक वैक्लपिक उपचार है। भले ही भारत में आज भी इसे मेडिकल इंस्टीट्यूटशन में मान्यता नहीं मिली है लेकिन इसके फायदों को नकारा नहीं जा सकता है। अधिकांश लोग जो रोजाना योगा प्राणायम करते हैं, वे बाडी टैपिंग भी जरूर जानते हैं। इससे मानसिक तनाव और विकार दूर होते हैं। हां, मेडिकल साइंस में इसके प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन इस चीनी पद्धति को एक्यूप्रेशर उपचार के अंतर्गत माना जाता है। जैसे आप बाकी व्यायाम रोजाना करते हैं ठीक उसी तरह से इसे रोजाना करने का अभ्यास करने से शारीरिक और मानसिक बीमारियां दूर होती हैं।

Writer- Suman Agarwal