एसआइपी शुरू करने को लेकर एक अलग तरह की संतुष्टि महसूस होती है। निर्णय लेने से पहले आपने काफी रिसर्च की होगी, विचारपूर्वक किसी नतीजे पर पहुंची होंगी। खाते से धनराशि एसआइपी के मद में कटने पर महसूस हुआ होगा कि चलो एक अच्छी शुरुआत हुई।
इस कालम के जो पाठक नए हैं, उन्हें बताना चाहूंगी कि एसआइपी यानी सिस्टेमैंटिक इन्वेस्टमेंट प्लान, निवेश का एक तरीका है। इसके माध्यम से म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया जाता है। माह की निर्धारित तिथि को आपके द्वारा तय धनराशि म्यूचुअल फंड्स में निवेशित हो जाती है। इसमें आप बाजार के दबाव से मुक्त रहते हैं और निवेश में अनुशासन बनता है। ये राशि प्रतिमाह जुड़ती जाती है और लंबे समय में इसका लाभ मिलता है। यहां चक्रवृद्धि बढ़त का नियम काम करता है। यदि आपने अभी तक एसआइपी शुरू नहीं की है तो इस दिशा में पहला कदम उठा सकती हैं। यदि एसआइपी शुरू कर चुकी हैं तो अब अगला कदम उठाने (स्टेप-अप) का समय है। बहुत से निवेशक इस पर ध्यान नहीं देते। वास्तव में जब निवेश लंबे समय के लिए होता है तो आपने कौन सा म्यूचुअल फंड चुना है या किस प्लेटफार्म का चयन किया है, उससे अधिक फर्क इस बात से पड़ता है, जब आगे का कदम सुनिश्चित करती हैं।
भारत में अधिकांश रूप में देखने में आता है कि जितनी राशि के साथ एसआइपी शुरू की जाती है, वही चलती रहती है। हर माह एक निश्चित राशि खाते से कटती जाती है। सैलरी बढ़ती है, जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, जीवन-यापन का खर्च बढ़ता है, पर एसआइपी वही रहती है। इसके पीछे का तर्क समझ आता है। जो एसआइपी एक बार शुरू कर दी, उसे छेड़ना उचित नहीं लगता। अब यहां विचार करें कि तीन साल पहले निवेश आरंभ करने पर कोई राशि उचित प्रतीत होती थी। उसके बाद जिंदगी काफी बढ़ चुकी है। इस दौरान क्या बदलाव आया, उन पर विचार करें। आपकी आय बढ़ी होगी। जो खर्चे एक समय पर बड़े लगते होंगे, उन्हें लेकर अब सहज हो गई होंगी। बच्चे भी बड़े हुए होंगे, लोन की राशि घट गई होगी और घर खर्च चलाने में एक सहजता आ गई होगी। इसके बावजूद शुरुआती राशि के साथ ही एसआइपी शांत भाव से चलती रहती हैै, जैसे कुछ बदला ही न हो। निवेश का जो अनुशासन बनाया वो तो काम करने लगा, लेकिन राशि में बदलाव नहीं आया।
अब एक गणना करे, जिससे शायद आपकी सोच में बदलाव आ सके। आप पांच हजार रुपये 20 वर्ष तक एसआइपी में डालती हैं, जिस पर 12 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है। इस प्रकार आप 12 लाख रुपये राशि उस मद में डालेंगी। अंत में आपको करीब 49 लाख रुपये मिलेंगे। निवेश में अनुशासन से इस प्रकार लाभ मिलता है।
अब एक चीज को बदलें। हर साल अपनी एसआइपी आरंभ की एनिवर्सरी तिथि पर इस राशि में दस प्रतिशत का इजाफा करती जाएं। दूसरे साल एसआइपी की राशि साढ़े पांच हजार हो जाएगी। तीसरे साल में एसआइपी 6050 हो जाएगी। इसी तरह हर साल दस प्रतिशत राशि बढ़ाती रहें। 20 वर्ष में करीब 32 लाख रुपये इस मद में आप डालेंगी। उस पर पूर्ण प्रतिफल करीब एक करोड़ 22 लाख रुपये मिलेगा।
एसआइपी की शुरुआती राशि व निवेश काल समान हैै, पर हर साल सैलरी में बढ़ोत्तरी के साथ ही दस उसमें दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से कालांतर में बड़ा फर्क आ सकता है। जिस पर अधिकांश निवेशक ध्यान नहीं देते। गौर करें तो 49 लाख व एक करोड़ 22 लाख रुपये राशि का अंतर बहुत बड़ा है।
इससे जुड़ा मनोविज्ञान और भी रुचिकर है। जब आप ये तय करती हैं कि हर साल आप एसआइपी दस प्रतिशत बढ़ाएंगी, तो सैलरी में बढ़ोत्तरी के साथ ही जीवनशैली में नई चीजें जोड़ने से पहले आपको वो प्रतिबद्धता याद रहेगी। आय बढ़ने के साथ ही खर्च भी बढ़ जाते हैं, पर उतनी आर्थिक मजबूती सुनिश्चित नहीं हो पाती जितनी होनी चाहिए। भविष्य में खर्चे बढ़ें, उससे पहले ही एसआइपी में बढ़ोत्तरी से आप उन्हें व्यवस्थित करने की तैयारी कर लेते हैं।
यहां अपने खर्चों को विभिन्न मदों में बांटने वाले डिब्बा सिस्टम का सिद्धांत काम करता है। धन आने से पहले ही आपको उसके खर्च की योजना बना लेनी चाहिए। ये नियम निवेश पर भी लागू करने पर आप भविष्य को मजबूत व सुरक्षित बना सकती हैं।
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भारत में बहुत से निवेश प्लेटफार्म आपको नई एसआइपी शुरू करने पर आटोमैटिक स्टेप-अप की अनुमति देते हैं। कितने प्रतिशत बढ़ोत्तरी करनी है, ये तय करने पर एसआइपी की एनिवर्सरी तिथि पर प्लेटफार्म स्वत: उतनी राशि बढ़ा देते हैं। उसके लिए आपको हर बार अलग से सहमति देने की आवश्यकता नहीं होती। यदि आपकी कोई एसआइपी चल रही है, जिसमें ये फीचर नहीं है, तो प्रति वर्ष अप्रैल की पहली तिथि को राशि में इतना इजाफा कर सकती हैं। इसमें मात्र पांच मिनट का समय लगेगा, लेकिन 20 साल में इससे बड़ा बदलाव आ सकता है। यदि आपने हाल ही में कोई एसआइपी शुरू की है और इस विषय में सोचा नहीं है, तो अभी से ये आदत विकसित करें। निवेश को लेकर सहजता जब महसूस हो तो इस विषय में विचार का उचित समय है।
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इस हफ्ते अपनी एसआइपी राशि पर नजर डालें। उसमें दस प्रतिशत बढ़त पर कुल राशि कितनी होगी, ये गणना करें और स्टेप-अप प्रक्रिया पर अमल करें। अपने निवेश प्लेटफार्म में स्टेप-अप फीचर एक्टीवेट करें। अप्रैल माह के लिए इस संबंध में रिमाइंडर भी सेट कर सकती हैं।
एसआइपी शुरू करने का निर्णय सबसे महत्वपूर्ण था। स्टेप-अप उसके प्रति सम्मान प्रदर्शित करने का सहज निर्णय होगा।
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