भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मन में 2 अक्टूबर को लेकर एक बड़ा असमंजस बना हुआ है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि महात्मा गांधी जयंती के दिन देश भर में यूपीआई सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी। हालांकि, सच्चाई इससे काफी अलग है। यह कोई तकनीकी गड़बड़ी या सरकारी प्रतिबंध नहीं है, बल्कि देश भर के मोबाइल विक्रेताओं द्वारा किया जा रहा एक विरोध प्रदर्शन है।
क्या है No UPI Day और क्यों हो रहा है विरोध?
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने 2 अक्टूबर 2026 को 'नो यूपीआई डे' मनाने का फैसला किया है। इस विरोध का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा यूपीआई लेनदेन पर लागू किए जा रहे 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के प्रति अपना विरोध दर्ज कराना है।
AIMRA के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे डिजिटल इंडिया या यूपीआई तकनीक के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि दुकानदारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का विरोध कर रहे हैं। 2 अक्टूबर के दिन इस अभियान में शामिल व्यापारी अपने क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढक देंगे और ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान लेने से बचेंगे।
2 अक्टूबर को आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
यदि आप 2 अक्टूबर को खरीदारी के लिए निकल रहे हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि पूरे देश में यूपीआई सर्विस बंद नहीं हो रही है। Google Pay, PhonePe, Paytm और भीम ऐप सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। हालांकि, जो मोबाइल रिटेलर्स या दुकानदार इस हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं, वे आपसे यूपीआई पेमेंट लेने से मना कर सकते हैं। ऐसे में असुविधा से बचने के लिए अपने साथ नकद राशि या डेबिट/क्रेडिट कार्ड रखना समझदारी होगी।
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यूपीआई पर नया एमडीआर (MDR) नियम क्या है?
केंद्र सरकार का नया नियम 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है। इसके तहत निर्दिष्ट मर्चेंट (P2M) यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाएगा।
- आम लोगों के बीच होने वाले ट्रांसफर (P2P) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
- 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी भुगतानों पर शून्य एमडीआर रहेगा।
- 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगेगा।
- प्रति ट्रांजेक्शन अधिकतम शुल्क सीमा 300 रुपये तय की गई है।
- रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट शुल्क लागू होगा।
- महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।
छोटे व्यापारियों की चिंता और नुकसान
मोबाइल विक्रेताओं का कहना है कि वे पहले से ही बहुत कम मार्जिन पर काम करते हैं। नए एमडीआर स्ट्रक्चर के कारण भारी आर्थिक चपत लगेगी।
| दुकानदार का महीने का यूपीआई लेनदेन | अनुमानित महीने का खर्च |
| 5 लाख से 10 लाख रुपये | 2,000 से 4,000 रुपये |
| 10 लाख से 20 लाख रुपये | 4,000 से 8,000 रुपये |
| 20 लाख से 30 लाख रुपये | 8,000 से 12,000 रुपये |
एसोसिएशन के मुताबिक, इस 0.4% एमडीआर के कारण देश भर के छोटे मोबाइल दुकानदारों पर हर महीने लगभग 40 करोड़ रुपये और सालाना करीब 500 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ेगा। इसी वजह से संगठन मांग कर रहा है कि यूपीआई को हमेशा की तरह 'जीरो एमडीआर' के दायरे में ही रखा जाए।
निष्कर्ष
2 अक्टूबर को यूपीआई पूरी तरह बंद नहीं रहेगा, बल्कि यह केवल कुछ मोबाइल रिटेलर्स का एक विरोध प्रदर्शन है। सरकार के नए एमडीआर स्ट्रक्चर से लगभग 96 प्रतिशत छोटे लेनदेन अप्रभावित रहेंगे और इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा।
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Main Images: magnific
