जरकन (Zircon) एक बहुत ही खूबसूरत रत्न है। यह सदियों से अपनी चमक, ट्रांसपैरेंसी और खूबसूरत रंगों से हर किसी का दिल जीतता आया है। बिना रंग वाले जरकन को मतारा डायमंड भी कहा जाता है, जो असली हीरे जैसा लुक देता है। इसकी खास बात यह है कि आपको बजट में ही हीरे जैसी दिखने वाली ज्वेलरी मिल जाती है।
जरकन के इतिहास की बात करें तो यह लगभग 4.4 अरब साल पुराना है और यह दुनिया के सबसे पुराने मिनरल्स में से एक है। यूरोप से लेकर अमेरिका तक, गहने बनाने वाले कारीगर इसे हमेशा से बहुत पसंद करते आए हैं। ऐसे में हम आपको अपने इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-
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जरकन का इतिहास क्या है?
आपको बता दें कि जरकन शब्द अरबी भाषा के जार (सोना) और जुम (रंग) से मिलकर बना है, जिसका मतलब फारसी में जरगुन यानी सोने जैसा रंग होता है। 6वीं सदी में ग्रीक के लोगों ने सबसे पहले इसका इस्तेमाल शुरू किया था। शुरुआत में इसे किस्मत चमकाने वाला ताबीज माना जाता था, जो अच्छी नींद और सुख-समृद्धि लाता है। फिर 14वीं सदी के बाद जब इसे तराशकर गहनों में लगाया जाने लगा, तो यह हार, ब्रूच और अंगूठियों की शान बन गया।
बताया जाता है कि नीला जरकन विक्टोरियन दौर में बहुत छाया हुआ था, तो वहीं ग्रे जरकन को शोक के मौकों पर पहना जाता था। 1896 में हीरों की खदान मिलने से पहले सफेद जरकन को ही हीरे की जगह इस्तेमाल की जाती थी।
कैसे बदलता है जरकन का रंग?
माना जाता है कि इस पत्थर को जब 800 से 1000 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है, तो इसकी चमक और रंग बहुत निखर जाती हैं। जैसे-
- भूरा जरकन गर्म करने पर सफेद या नीले रंग में बदल जाता है।
- गर्म करके बनाए गए सफेद जरकन को मतारा डायमंड या स्पार्कलाइट्स कहते हैं।
- नीले रंग वाले जरकन को स्टारलाइट्स कहा जाता है।
इसके अलग-अलग रंगों के ट्रेड नाम भी हैं। जैसे पीले-नारंगी को जेसिंथ, लाल को हायसिंथ, हरे को लिगर और भूरे को सिनेमन कहते हैं।
- दुनिया का लगभग 37 प्रतिशत सबसे बेहतरीन जरकन अकेले ऑस्ट्रेलिया से आता है।
- श्रीलंका, थाईलैंड और कंबोडिया में भी जरकन पाया जाता है।
जरकन ज्वेलरी बनाने का तरीका
इतना सब जानने के बाद आप इसे बनाने का तरीका भी जानना चाहती होंगी। बता दें कि जरकन से सुंदर गहने बनाने के लिए कारीगर कई स्टेप्स फॉलो करते हैं। जैसे-
- सबसे पहले कंप्यूटर या हाथ से डिजाइन बनाकर 3D प्रिंट निकाला जाता है।
- फिर मोम पर डिजाइन उकेरा जाता है और सांचे में पिघला हुआ सोना या मेटल डालकर गहने का ढांचा तैयार करते हैं।
- मेटल को घिसकर साफ किया जाता है।
- इसके बाद इसमें जरकन के पत्थरों को मजबूती से सेट किया जाता है।
- आखिरी में चमकाने के लिए पॉलिश की जाती है।
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जरकन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
जरकन का धार्मिक महत्व भी बहुत है। भारतीय ज्योतिष में जरकन को शुक्र ग्रह का रत्न माना जाता है, जो सुख-समृद्धि और ज्ञान बढ़ाता है। कालिदास के ग्रंथ 'मेघदूत' में भी हरे जरकन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, सितंबर में जन्मे लोगों के लिए यह बर्थस्टोन है, वहीं दिसंबर में जन्मे लोग नीला जरकन पहनते हैं।
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