नवरात्र की शुरुआत होने वाली है। नवरात्र आते ही गुजरात में गरबा की धूम शुरू हो जाती है। ढोल की आवाज, डांडिया की खनक और रंग-बिरंगी चनिया चोली में गरबा करती महिलाएं इस त्योहार की खास पहचान हैं। दूर से देखने पर चनिया चोली आपको लहंगे जैसी ही लगेगी, क्योंकि दोनों में घेरदार स्कर्ट, चोली और दुपट्टा होता है, लेकिन असल में ये दोनों एक नहीं हैं।
इनमें बड़ा अंतर हाेता है। चनिया चोली का रिश्ता खास तौर पर गुजरात की लोक संस्कृति, गरबा और नवरात्र से जुड़ा हुआ है जबकि लहंगा चोली पूरे देश में शादी और दूसरे बड़े फंक्शन में पहनी जाती है। आज का हमारा लेख इसी पर है। हम आपको इन दोनों में अंतर बताएंगे और साथ ही चनिया चोली की दिलचस्प कहानी के बारे बारे में भी जानकारी देंगे। आइए जानते हैं-
चनिया चोली क्या है और गुजरात में क्यों पहनी जाती है?
चनिया चोली गुजरात की ट्रेडिशनल पोशाक है। खासकर नवरात्र में गरबा करते समय इसे महिलाएं पहनती हैं। इसमें चनिया यानी घेरदार स्कर्ट और चोली यानी ब्लाउज होता है। इसके साथ ओढ़नी या दुपट्टा भी पहना जाता है। चनिया का घेरदार होना सिर्फ देखने में अच्छा नहीं लगता बल्कि गरबा करते समय इसके घूमने से पूरा लुक और खूबसूरत दिखने लगता है। आज की चनिया चोली में मिरर वर्क, कलरफुल कढ़ाई, पैचवर्क और गुजरात की लोक कला से जुड़े डिजाइन बनाए जाते हैं।
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चनिया चोली का इतिहास कितना पुराना है?
चनिया चोली के इतिहास की बात करें तो कहा जाता है कि इसकी शुरुआत प्राचीन भारत के पहनावे से हुई थी। उस जमाने में महिलाएं खास तौर से दो कपड़े पहनती थीं- 'अंतरीय' (जो कमर के नीचे पहना जाता था) और 'उत्तरीय' (जो कंधे या शरीर के ऊपरी हिस्से पर दुपट्टे की तरह लिया जाता था)। समय के साथ-साथ कपड़ों के नाम और पहनने का तरीका बदलता गया और इसी बदलाव से चोली की शुरुआती हुई।
बदल चुका है चनिया चोली का डिजाइन
इसी वजह से कई जगह कहा जाता है कि चनिया चोली की परंपरा लगभग 2000 साल पुरानी है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 2000 साल पहले भी चनिया चोली वैसी ही दिखती थी जैसी आज है। समय के साथ इसके डिजाइन, कपड़े और स्टाइल में काफी बदलाव आ चुके हैं।
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लहंगा चोली क्या है?
लहंगा चोली भी तीन हिस्सों का फेस्टिव आउटफिट है- लहंगा, चोली और दुपट्टा। आज इसे खासकर शादी, सगाई, रिसेप्शन और दूसरे बड़े फंक्शन में पहना जाता है। इसमें जरी, सीक्विन, स्टोन वर्क, एम्ब्रॉयडरी और अलग-अलग तरह की कढ़ाई देखने को मिलती है। यानी लहंगा चोली किसी एक राज्य या त्योहार तक के लिए ही नहीं है।
चनिया चोली और लहंगा चोली में क्या अंतर है?
| अंतर | चनिया चोली | लहंगा चोली |
| पहचान | यह गुजरात का खास और पारंपरिक पहनावा है | यह पूरे भारत में पहना जाने वाला एक आम पहनावा है |
| खास मौके | इसे खासतौर से गरबा, डांडिया और नवरात्र जैसे त्योहारों में पहना जाता है | इसे शादी-ब्याह, पार्टियों और बड़े त्योहारों पर पहना जाता है |
| डिजाइन और वर्क | इसमें कांच (मिरर वर्क), बांधनी, रंगीन धागे और कच्छा-रबारी कढ़ाई का इस्तेमाल होता है | इसमें जरी, गोटा-पट्टी, सिक्विन, हैवी एम्ब्रॉयडरी और नेट या सिल्क का काम होता है |
| कपड़ा (Fabric) | यह ज्यादातर सूती (कॉटन) या कंफर्टेबल कपड़ों में होता है ताकि डांस आसानी से हो सके | यह सिल्क, वेलवेट, नेट, जॉर्जेट और ऑर्गेनजा जैसे हैवी कपड़ों में आता है |
| लुक और स्टाइल | इसका लुक लोक कला (Folk style) से जुड़ा, रंग-बिरंगा और ट्रेडिशनल होता है | इसका लुक रॉयल, ट्रेंडी और मॉडर्न होता है, जिसमें कई नए एक्सपेरिमेंट देखने को मिलते हैं |
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गरबा के लिए चनिया चोली ही क्यों खास है?
गरबा के दौरान लगातार घूमना और डांस करना होता है। ऐसे में चनिया का बड़ा घेर डांस करते समय खूब फैलता है और इससे भी लुक भी बहुत अच्छा आता है। गुजरात में नवरात्र के दौरान चनिया चोली सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि वहां की लोक संस्कृति और गरबा की पहचान का हिस्सा बन चुकी है।
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चनिया चोली खरीदते समय ये बातें रखें ध्यान
अगर आप गरबा नाइट के लिए चनिया चोली खरीदने जा रही हैं, तो कुछ बातों का खास ध्यान रखें। जैसे-
- गरबा के लिए बहुत भारी चनिया लेने के बजाय ऐसा घेर चुनें जिसमें आसानी से डांस कर सकें।
- मिरर वर्क वाला आउटफिट लेते समय शीशों की फिनिश और सिलाई जरूर देखें।
- चोली की फिटिंग सही रखें, ताकि डांस करते समय परेशानी न हो।
- ओढ़नी यानी दुपट्टा ऐसा लें जिसे आसानी से संभाला जा सके।
- अगर पहली बार चनिया चोली पहन रही हैं, तो बहुत ज्यादा भारी ज्वेलरी न कैरी करें।
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