गार्डन को हर मौसम में हरा-भरा और फूलों से महकता बनाए रखना एक कला है, जिसकी शुरुआत सही समय पर की गई तैयारी से होती है। अक्सर बदलते मौसम के साथ पौधे अपनी चमक खोने लगते हैं, लेकिन अगर आप सही समय पर मिट्टी की देखभाल, खाद और छंटाई पर ध्यान दें, तो आपका बगीचा साल भर खिलखिलाता रहेगा। खासकर गर्मियों की दस्तक के साथ पौधों की विशेष देखभाल जरूरी हो जाती है। थोड़ी सी समझदारी से न केवल आपको भरपूर मात्रा में रंग-बिरंगे फूल मिलेंगे, बल्कि क्रोटोन जैसी खूबसूरत पत्तियों वाले पौधे भी पूरे मौसम हंसते-मुस्कुराते और लहलहाते नजर आएंगे। इसके लिए गार्डनिंग एक्सपर्ट एवं फाउंडर यूट्यूब चैनल अम्लान बाग की अंजना खिलनानी से बातचीत की है।
खाद की जरूरत
सर्दियों के मौसम में कई पौधे डॉरमेंसी में थे, यानी सो रहे थे। इसलिए तब उन्हें ज्यादा खाद-पानी की जरूरत नहीं होती थी। अब जैसे ही मौसम का तापमान बढ़ना शुरू होता है, तो ये पौधे जागने लगते हैं और इंसानों की तरह इन्हें भी भोजन की जरूरत होती है। इसलिए उन्हें वर्मी कंपोस्ट, किचन वेस्ट या गार्डन की सूखी पत्तियों से बनी ऑर्गेनिक खाद दे सकते हैं।
इसके लिए सबसे पहले गमलों और क्यारियों की गुड़ाई करके उनमें खाद दें।
- सही नाप का तरीका: आठ इंच के गमले में कम से कम तीन मुट्ठी खाद दें और गमले के आकार के अनुसार खाद की मात्रा बढ़ाते जाएं।
- क्यारियों के लिए: क्यारियों में खुले हाथों से खाद को तब तक छिड़कें, जब तक कि मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत न जम जाए।
चूंकि खाद में बहुत गर्मी होती है, इसलिए इसके छिड़काव के बाद पौधों को पानी देना भी बहुत जरूरी है।
करें री-पॉटिंग भी
जिन पौधों को आपने छोटे गमलों में लगाया था, समय के साथ जब उनकी अच्छी ग्रोथ हो जाती है, तो उनकी जड़ें गमले के छेद से बाहर निकल आती हैं। इससे कई बार गमले में दरार भी पड़ जाती है। ऐसे पौधों को विकसित होकर फलने-फूलने के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होती है।
फरवरी का महीना इस काम के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। ऐसे मौसम में जब आप पौधे को छोटे गमले से हटाकर बड़े गमले में लगाते हैं, तो वह आसानी से नई जड़ें विकसित कर लेता है।
प्रूनिंग करना न भूलें
पौधों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रूनिंग यानी उनकी छंटाई भी बहुत जरूरी है।
- हार्ड प्रूनिंग: बड़ी और मजबूत टहनियों की छंटाई को 'हार्ड प्रूनिंग' कहा जाता है।
- सॉफ्ट प्रूनिंग: छोटे पौधों की ऊपरी कोपलों को दो उंगलियों से तोड़ने की प्रक्रिया को 'सॉफ्ट प्रूनिंग' कहा जाता है।
गुड़हल, चंपा, जूही, मोगरा और बोगनविलिया की टहनियां इस मौसम में बेतरतीब ढंग से बढ़ जाती हैं। अगर आप गर्मियों में इनसे ज्यादा फूल लेना चाहते हैं, तो बेतरतीब ढंग से लंबाई की दिशा में बढ़ने वाली टहनियों की कैंची से छंटाई (हार्ड प्रूनिंग) कर दें।
इसी तरह मौसमी फूलों के छोटे पौधों के ऊपरी हिस्से की कोपलें भी हाथों से तोड़ते रहें। इससे पौधे पर चारों ओर से नई शाखाएं निकलेंगी और हर टहनी पर नए फूल खिलेंगे। अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो आने वाले गर्मियों के मौसम में आपका गार्डन रंग-बिरंगे फूलों से भरा रहेगा।
यह भी न भूलें
क्रोटोन का ध्यान रखें: इस मौसम में क्रोटोन का भी ध्यान रखें और जरूरत महसूस होने पर उन्हें बड़े गमले में शिफ्ट कर दें।
सब्जियों के लिए मिट्टी: गर्मियों की सब्जियों और मौसमी फूलों के लिए क्यारियों की गुड़ाई करके उसमें नीम खली, बोन मील, गोबर और सूखी पत्तियों की खाद डालकर उपजाऊ मिट्टी तैयार कर लें। फिर उसमें आप लौकी (घीया), तोरी, भिंडी और खीरा जैसी सब्जियों के बीज लगा सकते हैं।
बीज और बल्ब लगाएं: अगर आप गर्मियों में मौसमी फूल चाहते हैं, तो इसके लिए आप सूरजमुखी, बालसम और कॉसमॉस के बीजों से पौध तैयार करें और लिली की प्रजातियों के बल्ब अभी से लगाना शुरू कर दें।
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Images: magnific
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