आज के समय में लोग बस और ट्रेन के साथ-साथ हवाई जहाज से भी बड़ी संख्या में सफर करते हैं। फ्लाइट में ट्रेवल करते समय आपने देखा होगा कि केबिन और बाथरूम के पास 'No Smoking' का साइन लगा होता है, लेकिन इसी के साथ कई विमानों में बाथरूम के दरवाजे के पास एक छोटी सी ऐशट्रे भी दिखाई देती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्‍मोकिंग की अनुमति ही नहीं है, तो फिर ऐशट्रे क्यों लगाई जाती है? क्या यह एयरलाइन की गलती है या इसके पीछे कोई खास सुरक्षा कारण है? आइए इसके बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

बाथरूम के पास क्यों होती है ऐशट्रे?

यह किसी तरह की गलती नहीं है। ऐशट्रे लगाने का का उद्देश्य स्‍मोकिंग की अनुमति देना नहीं, बल्कि संभावित आग के खतरे को कम करना है। विमान में धूम्रपान प्रतिबंधित होने के बावजूद अगर कोई यात्री नियम तोड़कर सिगरेट जला ले, तो जलती हुई सिगरेट को कागज या अन्य कचरे वाले डिब्बे में फेंकना खतरनाक हो सकता है। ऐसे कचरे में आग लगने की संभावना रहती है।

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क्या ऐशट्रे होने का मतलब है कि प्लेन में स्मोकिंग कर सकते हैं?

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। ऐशट्रे का होना विमान में स्‍मोकिंग की अनुमति नहीं देता। भारत के Aircraft Rules, 1937 के Rule 25 के अनुसार, जहां 'No Smoking' का नोटिस लगा हो, वहां स्‍मोकिंग करना प्रतिबंधित है। इसके अलावा, प्लेन के बाथरूम में धुआं पहचानने वाला सिस्टम लगा होता है, जो धुआं होने पर उसका पता लगा सकता है। DGCA के नियमों में बाथरूम की जांच के दौरान इस सिस्टम और 'No Smoking' के बोर्ड को भी चेक करने की बात कही गई है।

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भारतीय उड़ानों के नियम क्या हैं?

जैसे अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में स्‍मोकिंगकरना मना है, वैसे ही भारतीय उड़ानों में भी सख्त मना है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडिगो में स्‍मोकिंग करना सख्त मना है। उनकी उड़ानों में बाथरूम में स्मोक डिटेक्टर भी लगे होते हैं। अब जब आप अगली बार ट्रेवल करें और आपको ऐशट्रे दिखें तब आप समझ जाएं कि ये सेफटी के लिए है न कि स्‍मोकिंग करने की अमुमति।

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