प्लेन क्रैश होने के बाद जांच टीम का सबसे जरूरी काम इसके पीछे की वजह जानना होता है। ऐसा इसलिए, ताकि हादसे का कारण समझकर, ऐसी दुर्घटना से बचा जा सके। प्लेन क्रैश होने पर सबसे पहले दिमाग में कई तरह के सवाल आते हैं, जैसे क्या पायलट की कोई गलती थी, मौसम खराब था या फिर मशीन में कोई तकनीकी समस्या आई थी? यह सब जानकारी जानने के लिए ही टीम मौके पर पहुंचकर ऐसी चीजें खोजती हैं, जिससे क्रैश के कारण का पता लगा सकें। आज के इस आर्टिकल में हम आपको उन चीजों के बारे में बताएंगे, जिसे जांच करने वाली टीम सबसे पहले खोजती है।
प्लेन क्रैश किस वजह से हुआ यह कैसे पता लगाते हैं?
सबसे पहले यह जान लें कि हर प्लेन में सुरक्षा के लिए कुछ ऐसी मशीनें लगी होती हैं, जो उड़ान के दौरान हर जानकारी को सेव रखती हैं। जब कभी विमान हादसा होता है, तो जांच एजेंसियां सबसे पहले इन रिकॉर्डर को खोजती हैं, क्योंकि इसमें हादसे के समय की पूरी जानकारी रिकॉर्ड रहती है।
1. प्लेन क्रैश के बाद खोजा जाता है Black Box
ब्लैक बॉक्स एक ऐसा रिकॉर्डिंग सिस्टम है, जो नारंगी रंग का होता है। इसका नाम भले ही ब्लैक हो, लेकिन असल में यह नारंगी रंग का होता है। इसे कोई भी यात्री नहीं देख सकता, क्योंकि यह प्लेन के पिछले हिस्से में लगा होता है। उड़ान भरने से लेकर हादसे तक, इसमें लगभग सभी जानकारी सेव रहती है, इसलिए जांच टीम इसे खोजती है। यह बहुत मजबूत होता है, इसलिए हादसे के बाद भी यह डेटा सुरक्षित रख सकता है।
2. प्लेन क्रैश के बाद खोजा जाता है Cockpit Voice Recorder
इसका शॉर्ट फॉर्म CVR है। यह कॉकपिट यानी पायलट की आवाज को रिकॉर्ड करने का काम करता है। यह प्लेन में आगे ही लगा रहता है। पायल ने कब क्या बात की और हादसे से पहले क्या स्थिति, सब कुछ आवाज के जरिए इसमें रिकॉर्ड होता रहता है। इसमें हादसे के दौरान अगर पायलट की गलती थी या वह को-पायलट से क्या बातचीत कर रह था, जांच टीम सब कुछ ध्यान से सुनती है। इसमें एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से हुई बातचीत और उन्होंने क्या सलाह दी, इसकी भी जानकारी होती है।
3.प्लेन क्रैश के बाद खोजा जाता है Flight Data Recorder (FDR)
इसके जरिए जांच टीम को विमान की तकनीकी जानकारी का पता चलता है। हादसे से पहले विमान कैसे उड़ रहा था, क्या सही तरीके से इसे उड़ाया जा रहा था। मशीन में कोई दिक्कत आ रही थी, यह दिक्कत कब आई और कैसे इससे निपटा गया। विमान की हर तरनीकी जानकारी इसमें सेव हो जाती है।
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- इससे उन्हें पता लगता है कि विमान में दिक्कत कब और क्यों आई?
- इंजन या किसी सिस्टम में खराबी आई थी या नहीं।
- उड़ान से पहले विमान की स्थिति कैसी थी, अगर पहले से दिक्कत थी, तो प्लेन क्यों उड़ाया गया?
हादसे के बाद अगर यह सभी जरूरी चीजें मिल जाए, तो काफी हद तक हादसे के कारण का पता लगाना आसान हो जाता है। हालांकि, कई बार टक्कर बहुत ज्यादा तेज होने की वजह से यह तीनों चीजें मिलना मुमकिन नहीं हो पाता।
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