यूपी का जिला वाराणसी एक फेमस टूरिस्ट स्पॉट है। यहां आपको जहां घूमने के लिए ढेरों ऑप्शंस मिल जाएंगे, वहीं खाने-पीने के मामले में भी बनारस किसी से पीछे नहीं है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी मिठाई के बारे में सुना है, जिसका नाम सुनकर ही लोग हंसने लगते हैं? जी हां, हम बात कर रहे हैं बनारस के 'पलंग तोड़' मिठाई की।
इसका नाम थोड़ा अजीब और मजेदार जरूर है, लेकिन इस मिठाई का स्वाद बहुत ही खास होता है। यह कोई आम बर्फी या पेड़ा नहीं बल्कि दूध की मलाई से तैयार होने वाली खास मिठाई है। इसे बनाने में कई घंटे लगते हैं और यही वजह है कि यह सर्दियों में ही ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में हम आपको इस मिठाई की खासियत और इसके नाम के पीछे की कहानी बताने जा रहे हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं-
क्या होती है वाराणसी की पलंग तोड़ मिठाई?
आपको बता दें कि पलंग तोड़ असल में मलाई पाग की एक खास तरह की मिठाई है। इसे बनाने के लिए दूध को गर्म किया जाता है और ऊपर जमने वाली मलाई की पतली-पतली परतों को इकट्ठा किया जाता है। फिर इन परतों को एक के ऊपर एक करके सजाया जाता है। इसके बीच में केसर, इलायची, चीनी और ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं। कुछ जगहों पर इसे बनाने में मावा, जायफल और जावित्री का भी इस्तेमाल किया जाता है।
पलंग तोड़ मिठाई की खासियत
बनारस की इस पलंग तोड़ मिठाई की सबसे खास बात यही है कि यह खाने में बहुत ही सॉफ्ट और स्वादिष्ट होती है। मलाई की हर परत मुंह में जाते ही घुलने लगती है। केसर और ड्राई फ्रूट्स की खुशबू इसका स्वाद और बढ़ा देती है। बताया जाता है कि इसे बनाने में बहुत ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं होती, लेकिन मलाई को सही तरीके से जमा पाना आसान काम नहीं है।
पलंग तोड़ मिठाई बनाने में लगते हैं 10 से 12 घंटे
अगर आपको लग रहा है कि यह भी बाकी मिठाईयों की घंटे दो घंटे में बनकर तैयार हो जाती होगी, तो ऐसा नहीं है। पलंग तोड़ मिठाई को जल्दी-जल्दी तैयार नहीं किया जा सकता है। इसे बनाने में करीब 10 से 12 घंटे तक का समय आराम से लग जाता है। इसलिए हलवाई सुबह से ही इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं, ताकि शाम तक मिठाई तैयार हो सके। इसे बनाने का तरीका भी काफी खास है। जैसे-
- सबसे पहले दूध को धीमी आंच पर गर्म किया जाता है।
- दूध के ऊपर मलाई की पतली परत जमने पर उसे एक तरफ किया जाता है।
- इसके बाद दूध पर फिर से मलाई जमने दी जाती है।
- इसी तरह कई परतें इकट्ठा हाे जाती हैं।
- आखिर में इन परतों को एक के ऊपर एक रखा जाता है और इनके बीच केसर, चीनी और दूसरी चीजें मिलाई जाती हैं।
इस पूरे काम में धैर्य और हलवाई का हुनर दोनों जरूरी हैं। अगर दूध को सही तरीके से गर्म नहीं किया जाएगा या मलाई की परत टूट जाएगी, तो मिठाई का असली स्वाद नहीं आ पाएगा।
सर्दियों में ही क्यों मिलती है यह पलंग तोड़ मिठाई?
पलंग तोड़ मिठाई की गिनती वाराणसी की मौसमी मिठाइयों में होती है। इसे आमतौर पर ठंड के मौसम में बनाया और बेचा जाता है। कई दुकानों पर नवंबर के आसपास इसकी तैयारी शुरू होती है और मौसम गर्म होने तक यह मिलती है। इसे बनाने में पूरा दिन लग जाता है। सुबह से दूध गर्म करने और मलाई की परतें जमा करने का काम शुरू होता है। इसके बाद शाम को यह मिठाई दुकानों पर बिक्री के लिए आती है।
आखिर क्यों पड़ा इसका नाम पलंग तोड़?
इस मिठाई के नाम का कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड तो नहीं है, लोग बस अलग-अलग किस्से सुनाते हैं। सबसे मजेदार वजह तो यह है कि यह मिठाई इतनी हैवी और मलाईदार होती है कि खाते ही आलस आने लगता है और लोगों को सोने का मन कर जाता है। बस इसी बात पर इसका नाम 'पलंग तोड़' पड़ गया। वहीं, इसके पीछे न्यूली मैरिड कपल्स और सर्दियों की रातों की कहानी भी है। दूध, मेवे और केसर की वजह से इसे फुल एनर्जी देने वाली मिठाई माना जाता है। हालांकि, इस बात का कोई साइंटिफिक प्रूफ नहीं है कि इसे खाने से कोई एक्स्ट्रा ताकत मिलती है।
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