भारत देश अपनी अनूठी विविधता, समृद्ध परंपराओं और लोककलाओं के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इतना ही नहीं बल्कि यहां मिलने वाला हर एक जायका लोगों के दिलों को खूब भाता है। मगर वक्त के साथ हमारी थाली से कई पारंपरिक व्यंजन गायब हो चुके हैं, जो स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम हुआ करते थे। इन्हीं में से एक है 'गुल्लू की सब्जी', जो कभी उत्तर प्रदेश की हर रसोई की शान हुआ करती थी। हालांकि, नई पीढ़ी शायद ही इसके नाम से वाकिफ होगी। आज के इस लेख में हम आपको इस व्यंजन की खासियत और इस फल के बारे में बताने जा रहे हैं।
गुल्लू क्या है?
जिन लोगों को गुल्लू के बारे में नहीं पता है, तो उनके मन में पहला सवाल आता है कि गुल्लू क्या है? बता दें कि गुल्लू मुख्य रूप से महुआ के कच्चे फल को कहा जाता है। यह एक प्रकार का मौसमी फल है, जो गर्मी मिलता है।
ग्रामीण इलाकों में इसके छिलके और बीज को निकालकर इसकी चटपटी सूखी सब्जी बनाई जाती है, जिसे लोग चाव से खाते हैं। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में इसे गुल्लू, कोलैया, कोइया या महुआ फल के नाम से जाना जाता है।
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कैसे तैयार की जाती है पारंपरिक गुल्लू की सब्जी?
गुल्लू की सब्जी को बनाने की प्रक्रिया बेहद पारंपरिक और दिलचस्प होती है। सबसे पहले महुआ के कच्चे फलों को उबालकर उनके अंदर मौजूद बीज को निकाला जाता है। इसके बाद इसे 10 मिनट उबालें। फिर लहसुन, प्याज, टमाटर और खड़े मसालों के साथ लोहे की कड़ाही में सरसों के तेल में पकाया जाता है।
धीमी आंच पर पकने के कारण इसका मसाला अच्छी तरह रच-बस जाता है। महुआ के फल का खट्टा-मीठा और मसालेदार स्वाद इस व्यंजन को स्वादिष्ट बनाता है।
गुल्लू की खास बातें
गुल्लू की सब्जी मध्य भारत और ग्रामीण क्षेत्रों की एक अत्यंत प्रसिद्ध और पारंपरिक डिश है। गुल्लू महुआ के पेड़ का फल है, जो पूरी तरह प्राकृतिक रूप से उगता है। साथ ही यह फल गर्मी के अंत और मानसून की शुरुआत में ही उपलब्ध होता है। पकने पर इसकी बनावट काफी हद तक कटहल या गूलर जैसी होती है।
क्यों गुम हो गई गुल्लू की यह रेसिपी?
समय के साथ हमारी जीवनशैली और खान-पान में बहुत बदलाव आया है। चाउमीन, बर्गर और पिज्जा जैसी विदेशी चीज़ों ने हमारी पारंपरिक थाली पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, गुल्लू जैसी पारंपरिक रेसिपीज को बनाने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है, जिसे भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनाना नहीं चाहते। पुरानी पीढ़ियों के साथ यह रेसिपी भी धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई।
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अगर आप इस पारंपरिक डिश से अनजान थे, तो अगली सीजन का स्वाद जरूर चखें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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