गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर को पूरे भारत में मनाया जा रहा है। यह 10 दिनों तक मनाया जाने वाला उत्सव है। इस दौरान लोग अपने घरों में धूमधाम से बप्पा के मूर्ती की स्थापना करते हैं। साथ ही उन्हें तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं। कुछ शहरों में भव्य पंडाल भी सजाए जाते हैं। आमतौर पर गणेश चतुर्थी की बात होती है तो हमें लगता है कि मुंबई में ही इसे भव्य तरीके से मनाया जाता है, लेकिन आपको बता दें कि मुंबई के अलावा और भी शहरें हैं जहां इस त्योहार की रौनक देखने को मिलती है।
हालांकि, हर जगह इसे मनाने का तरीका थोड़ा अलग होता हे। कहीं घर में गणपति की स्थापना के साथ खास तरह की सजावट होती है, तो कहीं कोई खास पकवान बनाए जाते हैं। कहीं ढोल ताशे सुनने को मिलते हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि देश के अलग-अलग हिस्सों में गणेश चतुर्थी किस तरह मनाई जाती है? आइए जानते हैं-
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गोवा में 'चवथ' के नाम से मनता है गणेश उत्सव
गोवा में गणेश चतुर्थी को चवथ कहा जाता है। यहां घर में गणपति की स्थापना करने के साथ एक खास सजावट भी की जाती है, जिसे माटोली कहा जाता है। माटोली को सजाने के लिए फल, सब्जियां, अलग-अलग तरह की पत्तियां और जंगल से मिलने वाली नेचुरल चीजों का इस्तेमाल होता है। इस तरह घर में गणपति के स्वागत के लिए की जाने वाली सजावट काफी अलग होती है। खाने की बात करें तो यहां मोदक के साथ बाकी व्यंजन भी बनाए जाते हैं। ये हैं गोवा की खास बातें-
- गणेश चतुर्थी को चवथ कहा जाता है।
- त्योहार परिवार के बीच मनाया जाता है।
- गणपति की स्थापना के साथ माटोली सजाई जाती है।
- माटोली में फल, सब्जियां, पत्तियां और नेचुरल चीजों का इस्तेमाल होता है।
- मोदक के अलावा स्थानीय पकवान भी बनाए जाते हैं।
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तमिलनाडु में गणेश जी को कहते हैं पिल्लैयार
तमिलनाडु की बात करें तो यहां भगवान गणेश को पिल्लैयार नाम से भी पूजा जाता है। यहां गणेश चतुर्थी पर घरों और मंदिरों में पूजा की जाती है। इस त्योहार में कोझुकट्टई का खास महत्व है। इसे मोदक के तौर पर जाना जाता है। इसकी खास बातें यह हैं-
- भगवान गणेश को पिल्लैयार नाम से भी पूजा जाता है।
- घरों और मंदिरों में गणेश जी की पूजा होती है।
- कोझुकट्टई यानी मोदक का खास महत्व है।
बिहार के मिथिला में चौरचन का अलग रंग
बिहार के मिथिला इलाके में गणेश चतुर्थी के मौके पर चौरचन पर्व मनाया जाता है। यहां इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं। शाम के समय घर के आंगन में अरिपन बनाया जाता है। इसके बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान चंद्रमा को फल, पकवान और दूसरे नैवेद्य चढ़ाए जाते हैं। इस पूजा में चंद्रमा को देखने के साथ भगवान गणेश की आराधना भी की जाती है। इस तरह मिथिला में गणेश चतुर्थी का रंग बाकी जगहों से थोड़ा अलग दिखाई देता है। इसकी खास बातें यह हैं-
- गणेश चतुर्थी पर चौरचन पर्व मनाया जाता है।
- महिलाएं परिवार और संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।
- शाम को आंगन में अरिपन बनाया जाता है।
- चंद्रमा की पूजा की जाती है।
- फल, पकवान और दूसरी नैवेद्य चीजें चढ़ाई जाती हैं।
- चंद्र दर्शन के साथ गणेश जी की पूजा का भी महत्व माना जाता है।
मध्य प्रदेश में पंडाल और चलित झांकी
मध्य प्रदेश में गणेश उत्सव बहुत बड़े लेवल पर मनाया जाता है। यहां जगह-जगह गणेश जी की स्थापना की जाती है। बड़े-बड़े पंडालों के साथ कई चौराहों पर भी गणपति की स्थापना देखने को मिलती है। इस उत्सव में सिर्फ पूजा ही नहीं, लोगों के मनोरंजन का भी इंतजाम किया जाता है। इसके लिए चलित झांकी बनाई जाती है। इस दौरान ढोल-ताशे की गूंज सुनाई देती है। यहां की खास बातें ये हैं-
- बड़े पंडालों में गणेश जी की स्थापना होती है।
- कई चौराहों पर भी गणपति बैठाए जाते हैं।
- लोगों के मनोरंजन के लिए चलित झांकियां बनाई जाती हैं।
- पूजा के साथ उत्सव का माहौल देखने को मिलता है।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न राज्यों की स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। इसे केवल सूचना के उद्देश्य से साझा किया जा रहा है।
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