हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, कथा, भागवत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना जाता है। जब भी घर में कोई खास पूजा-पाठ होती है, तो भक्त प्रसाद के रूप में पंचामृत और चरणामृत जरूर शामिल करते हैं। पंचामृत और चरणामृत सुनने में भले ही एक जैसे लगते हों, लेकिन ये दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। पंचामृत और चरणामृत के बीच काफी अंतर होता है। जहा पंचामृत पांच खास चीजों से मिलकर बनता है, वहीं चरणामृत भगवान के चरणों को धोने के बाद प्राप्त हुआ पवित्र जल होता है। अगर आप भी इन दोनों के बीच का अंतर जानना चाहती हैं और इन्हें तैयार करने की सही विधि सीखना चाहती हैं, तो इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे। आइए जानते हैं इनके बीच का अंतर और बनाने की सही विधि।

1. पंचामृत क्या है और इसे कैसे बनाएं?

पंचामृत शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- पंच और अमृत। पंच यानी पांच और अमृत का अर्थ है जीवन देने वाला पवित्र द्रव्य। नाम से ही पता चलता है कि यह पांच बेहद पवित्र और शुद्ध चीजों से मिलकर बनता है, जो शरीर और मन में नई ऊर्जा पैदा करते हैं।

पंचामृत की सामग्री:

पंचामृत बनाने के लिए पांच खास सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है -

  • गाय का कच्चा दूध
  • गाय का ताजा दही
  • गाय का शुद्ध देसी घी
  • शुद्ध शहद
  • शक्कर या मिश्री

पंचामृत बनाने का तरीका

  • सबसे पहले एक साफ बर्तन में गाय का कच्चा दूध लें।
  • अब इसमें स्वादानुसार फटा हुआ दही, थोड़ा सा शुद्ध देसी घी, शहद और पिसी हुई बारीक शक्कर मिलाएं।
  • इन पांचों चीजों को आपस में अच्छी तरह घोल लें।
  • इसके बाद इसमें थोड़े कटे हुए मखाने, चिरौंजी और तुलसी के पत्ते डालकर आप भगवान को भोग लगा सकती हैं।
  • धार्मिक पूजा में पंचामृत से भगवान की मूर्ति का स्नान या अभिषेक भी किया जाता है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है।

2. चरणामृत क्या है और इसे कैसे बनाएं

चरणामृत का अर्थ है भगवान के चरणों से निकला हुआ अमृत जल। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव की मूर्ति के चरणों में तांबे या पीतल के बर्तन से जल डालकर स्नान कराया जाता है, और उसी जल को चरणामृत कहा जाता है।

2. चरणामृत बनाने और तैयार करने का तरीका? 

  • चरणामृत के लिए सबसे पहले तांबे का एक शुद्ध बर्तन या लोटा लें।
  • इसमें साफ जल के साथ थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं।
  • अब इसमें तुलसी के पत्ते, थोड़ा कच्चा दूध या दही और थोड़ा सा केसर डाल दें।
  • इसके बाद शंख या कलश की मदद से इस जल से भगवान के चरणों को धोएं और उस जल को एकत्र कर लें।

चरणामृत लेने के धार्मिक नियम

चरणामृत ग्रहण करते समय कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद शुभ माना जाता है -

  • चरणामृत को हमेशा दाएं हाथ की हथेली में लेकर ही पीना चाहिए।
  • इसे पीते समय हाथ का अंगूठा जीभ से नहीं छूना चाहिए।
  • चरणामृत पीने के बाद अपनी हथेली को सिर पर फेरने की पुरानी परंपरा मानी जाती है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

निष्कर्ष:अगर आप भी अपनी पूजा-पाठ के दौरान चरणामृत और पंचामृत का इस्तेमाल करती हैं या इन दोनों के बीच का मुख्य अंतर जानना चाहती हैं, तो इस लेख में बताए गए अंतर और बनाने की विधि को जानकर बहुत ही कम समय में दोनों चीजें तैयार कर सकती हैं। इससे आपकी पूजा-पाठ पूरी तरह से विधिवत पूरी होगी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

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