हम सभी काे घूमने फिरने का बहुत शौक है। हम कहीं भी जाते हैं तो ट्रेन से जाना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आप दुनिया के सबसे लंबे रेल रूट के बारे में जानती हैं? जी हां, एक ऐसी रेल यात्रा है जो लगभग एक हफ्ते तक चलती है। इस ट्रेन से सफर करने वाले लोग कई दिन इसी में बिताते हैं। इस दौरान उन्हें खिड़की के बाहर बदलते हुए नजारे देखने को मिलते हैं। ये आपको सुनने में भले ही किसी फिल्मी कहानी जैसा लग रहा होगा, लेकिन ऐसा सच में होता है।
दुनिया का सबसे लंबा सिंगल रेलवे सिस्टम माना जाने वाला ट्रांस-साइबेरियन रेलवे पैसेंजर्स को ऐसा ही अनोखा फील देता है। ये रेल रूट रूस (Russia) की राजधानी मॉस्को को व्लादिवोस्तोक से कनेक्ट करता है। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-
दुनिया के सबसे लंबे रेल रूट में से है एक
आपको बता दें कि ट्रांस-साइबेरियन रेलवे करीब 9,289 किलोमीटर लंबा है। मॉस्को से व्लादिवोस्तोक तक का ये पूरा सफर तय करने में इसे आमतौर पर 6 से 7 दिन लग जाते हैं। इसी वजह से इसे दुनिया की सबसे लंबी यात्राओं में गिना जाता है। कई लोग तो इस खूबसूरत एहसास काे एक्सपीरियंस करने के लिए ट्रैवल करते हैं।
सफर में पार होते हैं 8 टाइम जोन
ये तो आपको मालूम ही होगा कि रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश माना है और यहां कई अलग-अलग टाइम जोन हैं। ऐसे में इस यात्रा में ट्रेन 8 अलग-अलग टाइम जोन को पार करती है। इसका मतलब है कि सफर के दौरान समय बार-बार बदलता रहता है। ऐसे में पैसेंजर्स को दिन और रात का समय अलग-अलग दिखता है।
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रास्ते में आते हैं 80 से ज्यादा शहर और कस्बे
खास बात तो ये है कि ये ट्रेन सिर्फ दो शहरों को नहीं जोड़ती, बल्कि रास्ते में कई इलाकों से गुजरती है। ऐसा बताया जाता है कि ये रेल रूट 80 से ज्यादा शहरों और कस्बों से कनेक्टेड है। इस दौरान यात्रियों को रूस के अलग-अलग जगहों को देखने का मौका मिलता है।
130 साल से भी ज्यादा पुराना है इतिहास
इतिहास की बात करें तो ट्रांस-साइबेरियन रेलवे सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक बड़ा उदाहरण भी माना जाता है। इसे बनाने का काम 1891 में शुरू हुआ था। उस समय रूस के कई दूरदराज इलाके बाकी हिस्सों से ठीक तरह नहीं जुड़े थे। ऐसे में देश के एक छोर से दूसरे छोर तक लोगों और सामान को पहुंचाने में काफी समय लगता था। इसे बनाने में हजाराें मजदूरों ने काफी मेहनत की। आखिरकार ये 1961 में पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया।
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एक ही सफर में यूरोप से एशिया तक का मजा
इस ट्रिप की सबसे खास बात ये है कि लोग बिना ट्रेन बदले यूरोप से एशिया तक पहुंच सकते हैं। ट्रेन मॉस्को से चलती है। इसके बाद ट्रेन यूराल पर्वतों से होकर गुजरती है। इसे ही यूरोप और एशिया के बीच का नेचुरल बॉर्डर माना जाता है।
बदलते रहते हैं खिड़की के बाहर के नजारे
अगर आप इस ट्रेन से ट्रैवल करेंगी तो आपको हर दिन कुछ नया देखने को मिलेगा। कहीं घने जंगल नजर आएंगे तो कहीं मैदान। रास्ते में नदियां, छोटे गांव और दूर-दूर तक की नेचुरल ब्यूटी आपको दीवाना बना देगी।
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बैकाल लेक का दिखता है खूबसूरत नजारा
इस रूट पर जो सबसे खूबसूरत चीज देखने को मिलती है, वो लेक बैकाल है। ये झील दुनिया की सबसे गहरी मीठे पानी की झील मानी जाती है और यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में भी शामिल हे। जब ट्रेन इसके आसपास के इलाकों से गुजरती है, तो सबसे खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है।
ट्रेन में मिलती हैं कई सुविधाएं
इतने लंबे सफर को कंफर्टेबल बनाने के लिए ट्रेन में पूरी सुविधाएं रहती हैं। यहां शेयरिंग स्लीपिंग कंपार्टमेंट से लेकर प्राइवेट केबिन तक की सुविधा मिल जाती है। साथ ही खाने-पीने के लिए डाइनिंग कार भी होती है।
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अब तो आप जान गई होंगी कि एक हफ्ते तक चलने वाला सफर, हजारों किलोमीटर की दूरी, 8 टाइम जोन, ढेरों शहर और बदलते नजारे ट्रांस-साइबेरियन रेलवे को दुनिया की सबसे अनोखी रेल रूट में शामिल करते हैं। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- Gemini/wikip
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