हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है। गणपति बाप्पा की मूर्ति या तस्वीर में हमेशा बड़ा पेट और लंबी सूंड देखने को मिलती है। हालांकि, जयपुर शहर में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा में सूंड नहीं है। इस लेख में हम आपको इसी प्रसिद्ध मंदिर के बारे में बताएंगे, जिसे गढ़ गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है। जयपुर की अरावली पहाड़ियों पर स्थित 18वीं सदी का यह ऐतिहासिक मंदिर अपनी इसी अनोखी खासियत के लिए हमेशा चर्चा में रहता है।

गढ़ गणेश मंदिर की खासियत

गढ़ गणेश मंदिर में भगवान गणेश हाथी के रूप में नहीं, बल्कि अपने बाल रूप में बिना सूंड के पूजे जाते हैं।

बिना सूंड वाली प्रतिमा का पौराणिक रहस्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने अपने उबटन से बालक गणेश का निर्माण किया था। उस समय गणेश जी का सिर हाथी का नहीं था। यही कारण है कि मंदिर में उनके इस बाल रूप की मूर्ति स्थापित है, जिसमें सूंड नहीं है। 

मंदिर की स्थापना और इतिहास

राजस्थान पर्यटन विभाग और मंदिर प्रबंधन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 18वीं सदी में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन करवाया था। उसी दौरान उन्होंने शहर की सुरक्षा, सुख और समृद्धि के लिए अरावली की पहाड़ी पर गढ़ गणेश मंदिर की स्थापना करवाई थी।

एक ही जगह मौजूद है पूरा गणेश परिवार

जयपुर के इस प्रसिद्ध गढ़ गणेश मंदिर में केवल गणपति ही नहीं, बल्कि उनकी दोनों पत्नियों—रिद्धि और सिद्धि की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इसके अलावा उनके दोनों पुत्र शुभ और लाभ भी मंदिर में विराजमान हैं। यही कारण है कि गणेश जी के पूरे परिवार के दर्शन करने के लिए लोग यहां दूर-दूर से आते हैं।

मंदिर की सीढ़ियां और मूषक के कान में मन्नत

पहाड़ी पर स्थित होने की वजह से मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर परिसर में भगवान गणेश के वाहन मूषक यानी चूहे की दो पीतल की मूर्तियां लगी हुई हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर कोई भक्त मूषक के कान में अपनी मनोकामना बोलता है, तो उसकी बात सीधे बाल गणेश तक पहुंच जाती है। 

गढ़ गणेश मंदिर तक कैसे पहुंचे?

अगर आप भी इस अनोखे मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो पिंक सिटी जयपुर स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर तक इन तरीकों से आसानी से पहुंच सकते हैं -

यहां जाने के लिए सबसे पास हवाई अड्डा 'जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' है, जो मंदिर से 15 किमी दूर होगा। इसके अलावा जयपुर जंक्शन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पड़ेगा, जो मंदिर से लगभग 5 किमी दूर है। स्टेशन और एयरपोर्ट से आप आसानी से टैक्सी या कैब के जरिए गढ़ गणेश मंदिर के प्रवेश द्वार तक जा सकती हैं।

निष्कर्ष-

यदि आप इस गणेश उत्सव में किसी अनोखे और ऐतिहासिक गणेश मंदिर जाने का मन बना रहे हैं, तो गढ़ गणेश मंदिर आपके लिए एक बेहतरीन जगह हो सकती है। यहां आपको भगवान गणेश के दुर्लभ बिना सूंड वाले बाल स्वरूप के दर्शन करने का अवसर मिलेगा। 

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(image credit: magnific)