ब्रेस्ट कैंसर से जंग जीतने वाली फेमस अभिनेत्री छवि मित्तल को एक बार फिर अस्पताल का रुख करना पड़ा है। हाल ही में उन्हें गर्भाशय की रसौली यानी यूटेरिन फाइब्रॉयड निकालने के लिए एक कठिन सर्जरी करवानी पड़ी। दरअसल, कैंसर के इलाज के दौरान ली जा रही 'टेमोक्सीफेन' दवा के दुष्प्रभाव के कारण उनके फाइब्रॉयड का आकार काफी तेजी से बढ़ रहा था। इस ऑपरेशन के बाद छवि ने अस्पताल के बिस्तर से एक वीडियो शेयर कर अपने फैंस को सेहत का हाल बताया। फिलहाल वह काफी शारीरिक कमजोरी और दर्द से जूझ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बेहद निडरता और हिम्मत के साथ इस कठिन दौर का सामना कर रही हैं। जानते हैं इनके बारे में...
फाइब्रॉयड सर्जरी के बाद का हेल्थ अपडेट
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में छवि मित्तल अस्पताल का खाना खाते हुए अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में बात करती नजर आ रही हैं। छवि ने बताया कि स्कैन की तुलना में सर्जरी के दौरान निकला फाइब्रॉयड काफी बड़ा था। ऑपरेशन के समय डॉक्टरों को उनकी ओवरी में एक डर्मोइड सिस्ट भी मिला, जिसे सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। राहत की बात यह है कि गर्भाशय और फाइब्रॉयड की बायोप्सी रिपोर्ट पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित आई है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरी जाती है, जिसकी वजह से फिलहाल उनके पेट में सूजन है।
रिकवरी की प्रक्रिया से चिढ़ महसूस कर रही हैं छवि
लगातार हो रही स्वास्थ्य समस्याओं और ऑपरेशन की प्रक्रिया से छवि थोड़ी निराश जरूर हैं, लेकिन उनका हौसला टूटा नहीं है। छवि ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि जब भी उन्हें लगता है कि सब ठीक हो गया है, तभी उन्हें फिर से शून्य से शुरुआत करनी पड़ती है। बार-बार आराम करना और फिर से खुद को मजबूत बनाना उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि वह इस स्थिति से डर नहीं रही हैं, बल्कि बार-बार की रिकवरी प्रक्रिया से बस थोड़ा चिढ़ और झुंझलाहट महसूस कर रही हैं। छवि ने कहा कि उन्हें अपने फैंस और शुभचिंतकों, खासकर महिलाओं के संदेशों से बहुत हिम्मत मिलती है। उन्होंने सभी से अपनी जल्द रिकवरी के लिए प्रार्थना करने की अपील की।
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आखिर क्यों करानी पड़ी फाइब्रॉयड सर्जरी?
छवि मित्तल ने कैंसर के इलाज के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह एक दवा ने उनके शरीर पर बड़ा असर डाला। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 'टेमोक्सीफेन' नाम की दवा दी थी। इसके कारण उन्हें मूड स्विंग्स और हड्डियों की डेंसिटी कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
करीब 20 साल पहले उनके गर्भाशय में महज 1.25 सेंटीमीटर का छोटा सा फाइब्रॉयड था, लेकिन इस दवा के असर से यह बढ़कर 7.2 सेंटीमीटर का हो गया। इस रसौली के कारण उनके पीरियड्स काफी दर्दनाक हो गए थे। अत्यधिक ब्लीडिंग के कारण उन्हें दिन में 5 से 6 बार पैड्स और टैम्पोन बदलने पड़ते थे। बड़े आकार का फाइब्रॉयड ब्लैडर और आंतों पर दबाव बना रहा था, जिससे उन्हें पेशाब और पाचन संबंधी दिक्कतें होने लगी थीं।
निष्कर्ष
छवि मित्तल के पास इस सर्जरी को कराने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। हालांकि, उनका मानना है कि अगर उन्हें इस दवा के साइड इफेक्ट्स का पहले से पता होता, तब भी वह इसे ही चुनतीं, क्योंकि कैंसर से बचाव के सामने इसके फायदे ज्यादा थे।
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