आजकल 'साल्ट एंड पेपर' लुक काफी चलन में है, लेकिन कुछ युवाओं के बाल उनकी उम्र से कम यानी समय से पहले ही सफेद होने लगते हैं। यह कोई स्टाइल या ट्रेंड नहीं है, बल्कि शरीर के भीतर पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि किन कारणों से बाल समय से पहले सफेद होते हैं और इन्हें कैसे कम किया जा सकता है।

आजकल युवाओं में साल्ट एंड पेपर लुक काफी लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जिनके बाल सफेद हो रहे हैं, वे सभी स्वेच्छा से इस लुक को अपना रहे हैं। कई युवाओं के बाल 20 से 30 साल की उम्र के बीच ही सफेद होने लगते हैं, जबकि यह बाल सफेद होने की सही उम्र नहीं है। दरअसल, इसके पीछे पोषक तत्वों की कमी, बढ़ता तनाव, पेट से जुड़ी समस्याएं और ऑटोइम्यून बीमारियां मुख्य वजह होती हैं। इसके अलावा, आजकल का बढ़ता प्रदूषण भी बालों के समय से पहले सफेद होने की एक अहम वजह बन रहा है।  

कैसे काम करता है मेलेनिन का उत्पादन?

बाल भूरे या सफेद तब होते हैं, जब बालों के रोम मेलेनिन का उत्पादन बंद कर देते हैं। मेलेनिन वह प्राकृतिक पिगमेंट है, जो आपकी त्वचा और बालों को रंग देता है।

आपके बाल हमेशा एक चक्र से गुजरते हैं, जिसके अलग-अलग चरण होते हैं। आपके बालों में मेलेनिन का निर्माण हर बार तब होता है, जब बाल इस चक्र की शुरुआत करते हैं।प्रत्येक चक्र कई वर्षों तक चलता है। लगभग 7 से 15 चक्र पूरे होने के बाद मेलेनिन का पुनर्निर्माण रुक जाता है, जिससे स्वाभाविक रूप से बालों का रंग फीका पड़ने लगता है। 

कम उम्र में बाल सफेद होने के शारीरिक और मानसिक कारण

युवाओं में समय से पहले बाल सफेद होने के पीछे ये प्रमुख कारण हो सकते हैं -

'विटिलिगो' या 'एलोपेसिया एरीटा' जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बालों की पिगमेंट कोशिकाओं पर असर डालती है, जिससे बाल सफेद होने लगते हैं।
शरीर में विटामिन बी12 और अन्य जरूरी विटामिन्स की कमी से बालों में सफेदी जल्दी दिखने लगती है। हालांकि, हर सफेद बाल केवल कमी का ही संकेत हो, यह जरूरी नहीं है।
स्मोकिंग करने वालों के बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं। तंबाकू और प्रदूषण कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा देता है।

मानसिक तनाव - लंबे समय तक तनाव लेने से भी बालों का रंग उड़ने लगता है। जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर 'लड़ो या भागो' प्रतिक्रिया करता है और नोरपाइनफ्राइन नामक हार्मोन छोड़ता है। इससे मेलानोसाइट्स आपके बालों के रोम से बाहर निकल जाती हैं, जिसके कारण बाल सफेद होने लगते हैं।

सफेद बालों की समस्या को कम करने के आसान उपाय

एक बार बाल सफेद हो जाने पर उन्हें प्राकृतिक रूप से दोबारा काला करना पूरी तरह संभव नहीं है, लेकिन कुछ असरदार उपाय अपनाकर इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है-

  • अपने भोजन में विटामिन बी12, डी3, आयरन, बायोटिन और कॉपर से भरपूर चीजें शामिल करें। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, नट्स, सीड्स और ताजे फल खाएं।
  • तनाव को कम करें, वरना शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है और मेलेनिन का उत्पादन कम हो जाता है।
  • मानसिक शांति के लिए योग, प्राणायाम, ध्यान और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है। 

क्या कहते हैं स्किन एक्सपर्ट्स?

दिल्ली के जाने-माने त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप अरोड़ा बताते हैं कि अगर 25 साल की उम्र से पहले बाल सफेद होने लगते हैं, तो इसे 'प्रीमेच्योर ग्रेइंग' कहा जाता है।

अधिकांश मामलों में यह समस्या आनुवांशिक होती है, लेकिन आजकल की खराब लाइफस्टाइल, खान-पान की गलत आदतें, स्मोकिंग और प्रदूषण इसके पीछे के मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, शरीर में कई तरह के पोषक तत्वों की कमी से इसकी गति और तेज हो जाती है। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो एक बार ब्लड टेस्ट जरूर करवा लें, जिससे यह पता चल सके कि कहीं कोई ऑटोइम्यून डिसऑर्डर या विटामिन की कमी तो नहीं है।

लेखिका - सुमन अग्रवाल 

निष्कर्ष:  कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या को सही खान-पान, हेल्दी लाइफस्टाइल और तनाव मुक्त रहकर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आप शुरुआती दौर में ही अपनी सेहत और बालों का सही ध्यान रखें, तो इस समस्या से प्रभावी ढंग से बचा जा सकता है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।

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