नाग पंचमी का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों को लगता है कि नाग देवता की पूजा ही की जाती है, लेकिन यूपी में कुछ जगहों पर इस दिन एक ऐसी लोकपरंपरा भी देखने को मिलती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यहां नाग पंचमी पर कपड़े की गुड़िया बनाई जाती है और फिर उसे डंडे से पीटने की रस्म निभाई जाती है।
ऐसे में लोगों के मन में सबसे पहला यही सवाल आता है कि आखिर गुड़िया पीटने का नाग पंचमी से क्या संबंध है? दरअसल, इसके पीछे एक लोककथा बताई जाती है, जो एक भाई, उसकी बहन और एक सांप से जुड़ी है। यह परंपरा धार्मिक नियम से ज्यादा एक पुरानी लोकमान्यता है। आइए जानते हैं-
नाग पंचमी पर कहां निभाई जाती है गुड़िया पीटने की परंपरा?
कपड़े की गुड़िया पीटने की रस्म का जिक्र उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों, खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी लोकपरंपराओं में मिलता है। हालांकि, गाेंडा, बलरामपुर, अयोध्या और बहराइच जैसी जगहों पर भी यह परंपरा निभाई जाती है। यहां पर नाग पंचमी के दिन कपड़े से एक छोटी गुड़िया बनाई जाती है। इसके बाद बच्चे या भाई उसे उसे डंडे से पीटते हैं।
भाई-बहन से जुड़ी है इसकी कहानी
इस परंपरा के पीछे जो लोककथा सुनाई जाती है, उसमें एक भाई और उसकी बहन की कहानी है। बताया जाता है कि बहुत समय पहले एक लड़का भगवान शिव का भक्त था। वह नियमित रूप से मंदिर जाता था और पूजा करता था। जिस मंदिर में वह जाता था, वहां एक सांप रहता था। सांप उस लड़के को कभी नुकसान नहीं पहुंचाता था। वह उसके पास आता और उसके पैर से लिपट जाता था। लड़का भी उससे डरता नहीं था।
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एक दिन लड़का अपनी बहन को भी मंदिर लेकर गया। पूजा के बाद जब दोनों वहां से जाने लगे तो सांप हमेशा की तरह लड़के के पास आया और उसके पैर से लिपट गया।
सांप को देखकर डर गई बहन
बहन ने जब भाई के पैर से सांप को लिपटा हुआ देखा तो वह बहुत डर गई। उसे लगा कि सांप उसके भाई को डंस लेगा। इसी डर से बहन ने डंडा उठाकर सांप को पीट दिया। डंडे की चोट लगने से सांप की मौत हो गई। जब गांव के लोगों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने यही समझा कि लड़की से अनजाने में ही कोई गलती हुई है।
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बच्ची की जगह गुड़िया को मिली सजा
लोककथा के मुताबिक, लड़की ने यह सब जानबूझकर नहीं किया था। उसने तो डर की वजह से अपने भाई को बचाने के लिए ऐसा किया था। ऐसे में गांव वालों ने उसे सजा देने के बजाय कपड़े की एक गुड़िया बनवाई। फिर गांव वालों ने उस गुड़िया को डंडे से पीटा। तभी से नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने वाली परंपरा चली आ रही है।
गुड़िया ही क्यों बनाई जाती है?
इस कहानी में गुड़िया का इस्तेमाल एक प्रतीक के तौर पर किया जाता है। समय के साथ यह रस्म वहां स्थानीय परंपरा का हिस्सा बन गई।
नाग पंचमी से इसका क्या लेना-देना है?
इस रस्म का संबंध उस लोककथा में हुई सांप की मौत से है। नाग पंचमी तो नागों के प्रति सम्मान और उनकी पूजा के लिए मनाया जाता है। इसी वजह से यह कहानी और गुड़िया पीटने की परंपरा नाग पंचमी से जुड़ी है।
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गुड़िया बनाने के बाद क्या करते हैं?
पहले कपड़े से गुड़िया तैयार की जाती है। इसके बाद नाग पंचमी के दिन उसे डंडे से पीटने की रस्म निभाई जाती है। कुछ जगहों पर रस्म पूरी होने के बाद इन गुड़ियों को पानी में बहाने या विसर्जित करने की परंपरा है।
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Image Credit- Freepik/AI
