'6 बजे के बाद बाहर मत रहना...', 'अंधेरा होने से पहले घर आ जाना...', 'अकेले कहीं मत जाना...', 'कपड़े ढंग के पहनो...' और 'ऐसे किसी से हंसकर बात मत करो..' और भी न जाने क्या-क्या। लड़कियों को बचपन से ही सुरक्षा के नाम पर ऐसी कई बातें बताई और सिखाई जाती हैं, लेकिन आखिर उन्हें सुरक्षित रहना किससे है...लड़कों से...बेटों से? तो क्या लड़कों को यह सिखाना जरूरी नहीं है कि वह कैसे लड़कियों की सीमाओं को सम्मान करें और उन्हें एक सुरक्षित समाज देने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

बेटों को अच्छे व्यवहार की सीख देना है जरूरी

हाल ही में जिस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने एक बार फिर इस तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। बेशक बेटियों को दी जाने वाली इस तरह की सलाहों के पीछे माता-पिता की चिंता और बेटी को सुरक्षित रखने की इच्छा होती है, जो बिल्कुल लाजमी है, लेकिन क्या सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ लड़की के व्यवहार और उसके फैसलों पर डाल देना पर्याप्त है? सुरक्षा के नाम पर लड़कियों को क्या करना चाहिए, क्या नहीं, कैसा होना चाहिए, कैसे नहीं...इस तरह की लंबी लिस्ट दे दी जाती है, लेकिन लड़कों के लिए अच्छे व्यवहार की सीख कहां है?

लड़कियों को Safety के नाम पर कौन-कौन सी हिदायतें दी जाती हैं?

बचपन से ही लड़कियों के लिए कई तरह के Safety Rules बना दिए जाते हैं। अकेले बाहर मत जाओ, देर रात तक बाहर मत रहो, अनजान लोगों से बात मत करो, किसी जगह पर अकेले मत जाना और अपने ऐसे कपड़े मत पहनों....जैसी सलाहें आम हैं। सलाह देना गलत नहीं है, बेटी की चिंता करना भी गलत नहीं है, लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब ये सेफ्टी रूल्स धीरे-धीरे उनकी आजादी को सीमित करने लगते हैं और यह संदेश देने लगते हैं कि अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ, तो कहीं न कहीं उनकी अपनी गलती थी।

Safety Advice और Victim Blaming में क्या अंतर है?

हम लड़कियों को अपनी सेफ्टी के लिए सावधान रहने के लिए सलाह देते हैं। सबसे पहले तो सवाल यही उठता है कि आखिर इस सलाह की जरूरत ही क्यों पड़ रही है, क्यों हम उन्हें ऐसा समाज नहीं दे पा रहे हैं जहां उन्हें सुरक्षित रहने के लिए हर वक्त अलर्ट मोड पर रहने की जरूरत न पड़े। खैर इससे भी बड़ी दिक्कत है विक्टिम ब्लेमिंग। सुरक्षा के लिए सावधान करना और किसी घटना के लिए पीड़ित को जिम्मेदार ठहराना दो अलग बातें हैं।
उदाहरण के तौर पर, बेटी को ये बताना कि किसी असहज स्थिति में वह तुरंत वहां से निकल सकती है, भरोसेमंद व्यक्ति को फोन कर सकती है या मदद मांग सकती है, इसे आप सेफ्टी एजुकेशन का हिस्सा कह सकते हैं, लेकिन "तुम वहां गई ही क्यों?", "इतनी रात को बाहर क्यों थीं?", "ऐसे कपड़े क्यों पहने थे?" ये सवाल विक्टिम ब्लेमिंग हैं और महिलाओं को ही गलत साबित करने की कोशिश करते हैं।

"राजा बेटा को सुधार लीजिए...रानी बेटी अपने आप राज कर लेगी"

इस तरह के स्लोगन्स बहुत कम शब्दों में लड़कियों के दिल की बात और इस पूरे मुद्दे के असली सच को सामने ला रहे हैं। हमें पितृसत्तात्मक सोच से बाहर आना होगा। गलत अगर लड़कियों के साथ हुआ है या हो रहा है, तो उनके व्यवहार, कपड़ों यो चाल-चलन में कमी ढूंढने के बजाय, सीधे शब्दों में सवाल लड़कों की सोच और गलती पर उठाना होगा।

लड़कों को Respect और Consent की सीख देना क्यों जरूरी है?

जिस तरह से हम बेटियों को बहुत कुछ सिखाते हैं, उसी तरह अब हर मां और पेरेंट्स के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपने बेटों को Respect और Consent की परिभाषा सिखाए। उन्हें यह सिखाए कि महिलाओं की इज्जत किस तरह की जाती है, कैसे उनकी ना का सम्मान किया जाता है और कैसे खुद को उनसे बेहतर या बड़ा नहीं, बल्कि उनके बराबर समझना जरूरी है। जब बचपन से ही पेरेंट्स और स्कूल उन्हें इस तरह की बातें सिखाएंगे, तो बड़े होने पर उनकी सोच उस रूढ़िवादी सोच से अलग होगी, जो आज भी महिला और पुरुषों में अंतर करती है।

हर पेरेंट्स को अपने बेटों को देनी चाहिए ये सीख

अब वक्त बदल रहा है और बदलना जरूरी भी है। ऐसे में हर पेरेंट्स को अपने बेटों को कुछ खास सीख देनी चाहिए, उनकी परवरिश करने के तरीके में कुछ बदलाव करने चाहिए ताकि बेटियां सुरक्षित हो सकें और खुलकर जी सकें।
बेटों को Respect और Consent सिखाते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • 'ना' का मतलब ना समझाएं
  • Personal Boundaries की समझ दें
  • लड़कियों को बराबर समझना सिखाएं
  • 'मजाक' के नाम पर गलत व्यवहार न सिखाएं
  • घर में Gender Equality की शुरुआत करें
  • महिलाओं के प्रति भाषा पर ध्यान दें
  • Consent को सिर्फ रिश्तों तक सीमित न रखें
Girls' Safety Checklist Boys' Behaviour Checklist
अनजान लोगों से सावधान रहें किसी अनजान या परिचित महिला को अनसेफ फील न करवाएं
अपनी safety को लेकर alert रहें अपने व्यवहार से लड़कियों की safety और comfort का ध्यान रखें
ना कहने में संकोच न करें सामने वाले की ना को बिना बहस और दबाव के स्वीकार करें
अनचाहे touch पर आवाज उठाएं बिना consent किसी लड़की को touch न करें
रात को बाहर न निकलें रात में अगर कोई लड़की बाहर है, तो उसकी सुरक्षा का ध्यान रखें
   

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