वर्तमान समय में जन्मदिन के खास मौके पर लोग केक जरूर काटते हैं। इतना ही नहीं बल्कि कुछ लोग इस इवेंट को बड़े लेवल पर सेलिब्रेट करते हैं। हालांकि, इस दौरान एक बात जो हर किसी के बर्थ डे पर कॉमन होती है, वह है केक काटने से पहले कैंडल बुझाना और विश मांगना। इसके बाद लोग तालियां बजाते हैं फिर केक काटा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर जन्मदिन पर मोमबत्तियां बुझाने की शुरुआत कैसे हुई? अगर नहीं , तो आज के इस आर्टिकल पर हम आपको इसके पीछे के कारण के बारे में बताने जा रहे हैं।

जन्मदिन पर मोमबत्तियां बुझाने की परंपरा कहां से आई?

जन्मदिन पर मोमबत्ती जलाने और बुझाने की परंपरा कहां से आई है इसके बारे में सबसे पहले बात करते हैं। बता दें कि बर्थडे पर कैंडल जलाने की परंपरा प्राचीन सभ्यताओं तक जाती हैं। प्राचीन यूनान में लोग चंद्रमा की देवी आर्टेमिस को अर्पित किए जाने वाले गोल केक पर मोमबत्तियां लगाते थे। माना जाता है कि जलती हुई मोमबत्तियां चंद्रमा की चमक का प्रतीक थीं। हालांकि, प्राचीन यूनान में जन्मदिन के केक पर मोमबत्तियां लगाने की प्रथा और आज की तरह उन्हें बुझाने की रस्म के बीच सीधा संबंध ऐतिहासिक मान्यता है।

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समय के साथ यूरोप के अलग-अलग हिस्सों में जन्मदिन मनाने के तरीके बदलें। अठारहवीं सदी के जर्मनी में बच्चों के जन्मदिन पर केक और मोमबत्तियों से जुड़ी परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसे किंडरफेस्ट (Kinderfest) कहा जाता था। इस कार्यक्रम में बच्चे की उम्र के साथ एक अतिरिक्त मोमबत्ती लगाई जाती थी। धीरे-धीरे जन्मदिन के केक पर मोमबत्तियां लगाने का चलन लोकप्रिय हुआ और आगे चलकर उन्हें एक साथ बुझाना भी कार्यक्रम का खास हिस्सा बन गया।

मोमबत्तियां बुझाते समय विश क्यों मांगते हैं?

अब सवाल आता है कि बर्थडे के मौके पर मोमबत्ती बुझाने से पहले आंख बंद करके विश क्यों मांगी जाती है? बता दें कि जन्मदिन पर कैंडल बुझाने से पहले आंख बंद करके मन में इच्छा मांगना भी इस रस्म का खास हिस्सा है। कई लोग मानते हैं कि मोमबत्तियां बुझाते समय मांगी गई इच्छा पूरी हो सकती है। इसी वजह से जन्मदिन मनाने वाले व्यक्ति को केक काटने से पहले विश मांगने के लिए कहा जाता है।

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हालांकि, इस विश्वास का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि मोमबत्तियां बुझाने से मनोकामना पूरी हो जाती है। इसे एक खूबसूरत सांस्कृतिक परंपरा के रूप में देखा जा सकता है, जो लोगों को अपने सपनों और आने वाले साल की उम्मीदों के बारे में सोचने का मौका देती है।

सारी मोमबत्ती एक साथ क्यों बुझाई जाती हैं ?

जन्मदिन पर मोमबत्ती बुझने और इसके बाद गाना गाने और ताली बजाने का इंतजार सभी को रहता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह परंपरा इस मौके को और भी खास बनाता है। आज के समय में यह तरीका खुशी, जन्मदिन मनाने वाले व्यक्ति के प्रति प्यार जाहिर करने के तरीके के रूप में देखा जाता है।

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परिवार और दोस्त जब किसी व्यक्ति के लिए इकट्ठा होते हैं, तो उनका ध्यान कुछ पलों के लिए उसी पर रहता है। ऐसे में मोमबत्तियां बुझाना जन्मदिन के जश्न का यादगार पल बन जाता है। सोशल मीडिया के दौर में इस पल का वीडियो बनाना और तस्वीरें साझा करना भी आम हो गया है।

क्या मोमबत्तियां बुझाना कोई रस्म है?

अब सवाल आता है कि क्या मोमबत्ती बुझाना कोई रस्म है, तो ऐसा कहना सही तो नहीं है। किसी परंपरा का महत्व सिर्फ उसकी ऐतिहासिक शुरुआत से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भावनाओं से भी होता है। कुछ लोगों के लिए यह बचपन की याद है, तो कुछ के लिए परिवार के साथ बिताया गया खास समय। वहीं, कई लोग इसे अपने जीवन के नए साल की शुरुआत मानते हैं।

अगली बार जब आप जन्मदिन का केक काटें, तो मोमबत्तियां बुझाते समय इस रस्म के पीछे छिपी कहानी को भी याद कर सकती हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

National Geographic की रिपोर्ट https://www.nationalgeographic.com/history/article/history-of-birthday-candles?utm_source

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