Ladakh First Woman Officer Stanzin Tsangyang: कठिन रास्तों और हालातों से लड़कर जो डटा रहे, वही एक दिन जीत का परचम लहराता है। इस बात का जीता-जागता उदाहरण लद्दाख की रहने वाली 24 साल की स्टैनजिन त्सांगयांग हैं। इन्होंने वह कर दिखाया जिसके बारे में सोच पाना भी मुश्किल था। बता दें कि स्टैनजिन अपने जिले से भारतीय सेना में अधिकारी बनने वाली पहली महिला बनकर इतिहास रच दिया है। आज के इस लेख में हम आपको स्टैनजिन त्सांगयांग की सफलता की कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।
14 साल तक घर से दूर रहीं स्टैनजिन त्सांगयांग
जैसा कि ऊपर लेख में बताया गया है कि स्टैनजिन त्सांगयांग लद्दाख के जांस्कर से ताल्लुक रखती हैं। स्टैनजिन के पिता टीचर और मां हाउसवाइफ हैं। उन्होंने लेह के लैमडन मॉडल स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद 14 साल तक हॉस्टल में रहकर आगे की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।"
पढ़ाई के दौरान ज्वॉइन किया NCC
इंजीनियरिंग के दौरान उन्होंने नेशनल कैडेट कोर (NCC) ज्वॉइन किया। मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि एनसीसी के जरिए उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी बनने के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने दिन-रात मेहनत करनी शुरू कर दी।
भारतीय सेना में अधिकारी बनने की तैयारी में आईं मुश्किलें
स्टैनजिन त्सांगयांग के लिए यह रास्ता पूरी तरह नया था। ऐसे में उन्हें कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई के लिए कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज का एग्जाम और एसएसबी इलाहाबाद का इंटरव्यू क्लियर करना आसान नहीं था। हालांकि, इसके बावजूद सारी परेशानियों को किनारे कर पूरी मेहनत के साथ तैयारी की। इसके बाद आज वह अपने क्षेत्र से पहली महिला ऑफिसर बनी हैं।
स्टैनजिन त्सांगयांग कब बनीं महिला ऑफिसर?
24 वर्षीय स्टैनजिन को 5 सितंबर को चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में हुई पासिंग-आउट परेड के दौरान सेना में अधिकारी की रैंक मिली। इस बैच में कुल 342 कैडेट्स, जिनमें 313 पुरुष और 29 महिलाएं शामिल थीं। इनमें सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा, जिम्बाब्वे, भूटान, लेसोथो और इस्वातिवनी के 7 पुरुष और 10 महिला कैडेट्स थे।
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Image Credit- tezpur.university
