पहाड़ों की ठंडी वादियों में रोड ट्रिप पर जाना हर किसी का सपना होता है। नीमा सिंह भी अपने परिवार के साथ इस समर वेकेशन को यादगार बनाने के लिए एक खूबसूरत हिल स्टेशन की ओर निकली थीं, लेकिन सफर तब एक खराब अनुभव में बदल गया, जब रास्ते में गूगल मैप का नेटवर्क कमजोर हो गया और वह उन्हें एक बेहद सुनसान और गलत रास्ते पर ले गया। आइए जानते हैं नीमा सिंह की आपबीती, जिससे आप ऐसी भूल न करें। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
कमजोर नेटवर्क और गूगल मैप का वो मोड़
नीमा सिंह जैसे ही मेन हाईवे से पहाड़ों की ओर मुड़े, मोबाइल का नेटवर्क धीरे-धीरे गायब होने लगा। मैप की स्क्रीन फ्रीज हो चुकी थी, लेकिन अनजाने में वे उसी रास्ते पर आगे बढ़ती गईं जो मैप ने आखिरी बार दिखाया था।
जब तक उन्हें एहसास हुआ कि वे गलत डायरेक्शन में हैं, तब तक वे एक ऐसे अनजान और खतरनाक पहाड़ी रास्ते पर फंस चुकी थीं, जहां दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था।
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जब लोकल लोगों ने बचाई जान और दी बड़ी सीख
नीमा के परिवार को रास्ते में कुछ लोकल लोग मिले। उन लोगों से जब रास्ता पूछा गया, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। वे मेन रास्ते से करीब 50 किलोमीटर आगे निकल आए हैं और उस पहाड़ी पर अगले कई किलोमीटर तक गाड़ी यू-टर्न की कोई जगह भी नहीं है।
पहाड़ों में सफर के 2 सबसे जरूरी नियम
- पहाड़ों में फोन से ज्यादा वहां रहने वाले लोगों का अनुभव काम आता है। जब भी रास्ता थोड़ा सा भी सुनसान लगे, तो तुरंत गाड़ी रोककर दुकानदारों या लोगों से रास्ता कंफर्म कर लें।
- डिजिटल दुनिया के इस दौर में विंटेज पेपर मैप या हैंड मैप रखना अपनी आदत बना लें। सफर शुरू करने से पहले ही पूरे रास्ते का नक्शा अपने पास रखें। इसके अलावा, मोबाइल में गूगल मैप का 'ऑफलाइन मैप' फीचर इस्तेमाल करें।
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Images: magnific
