इस स्तंभ में पूर्व में हमने सोने में निवेश को पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाने के तरीकों पर बात की। सोने के आभूषण खरीदने व सोने में निवेश के फर्क को समझा। भौतिक रूप में इसे संभालकर रखने के बजाय किस प्रकार आप गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं। ये तरीका आज भी उतना ही सहज सुलभ है।
बीते कुछ समय से सोने की चर्चा अधिक हो रही है। पिछले साल के मुकाबले सोने की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। सरकार ने पहले आयात शुल्क घटाया, फिर पुन: बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की। इसके बाद सोने में निवेश के नए विकल्प स्टाक एक्सचेंज में सामने आए। बहुत से लोगों ने मुझसे एक ही सवाल किया- इस प्रकार सोना खरीदना किस तरह अलग है। अपने सोने के साथ ऐसा क्या करना चाहिए जो अलग हो।
निवेशकों से मैं कहूंगी कि ऐसा वास्तव में नहीं है। यही मैं आपको समझाने का प्रयास करूंगी कि सोने को लेकर सही सोच क्या और क्यो है? सोने में निवेश के साथ वैसा कुछ भी नहीं है, जिस प्रकार आप म्यूचुअल फंड्स या अन्य शेयरों में निवेश करते हैं।म्यूचुअल फंड की राशि ऐसी कंपनियों में लगाई जाती है, जिनमें कर्मचारी काम करते हैं, उत्पादन होता है और राजस्व कमाया जाता है, जो समय के साथ बढ़ता है। कंपनी में शेयर होने पर आप उसकी तरक्की व लाभ के भागीदार बनते हैं। ये परिसंपत्तियां निर्माण कार्यों से जुड़ी होती हैं। सोने के साथ उत्पादकता का पहलू नहीं जुड़ा होता। उसे तो बस सुरक्षित रखा जाता है। उस पर ब्याज या लाभांश नहीं मिलता। ये किसी कारखाने सदृश नहीं है, जिसमें उत्पाद बनाए जाते हों। एक किग्रा सोना आज से दस साल बाद भी एक किग्रा ही रहेगा। इसकी मात्रा नहीं बढ़ती। इसकी कीमत उत्पादकता की वजह से नहीं बढ़ती। इसे लोग मूल्यवान समझते हैं, इसलिए इसका मूल्य है। जब अनिश्चितता हो तो लोग कुछ ऐसा खरीदना चाहते हैं जिसका मूल्य सुरक्षित बना रहे।
पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करने का यही असल महत्व है। यह एक प्रकार की सुरक्षा है। जब शेयर बाजार गिरता है तो सोने का दाम बढ़ता है। जब महंगाई बढ़ती है और रुपया गिरता है तो भी सोने का मूल्य बरकरार रहता है। जब भूराजनीतिक तनाव बढ़ता है और निवेशकों में निराशा होती है, तो सोने की ओर उनका झुकाव बढ़ता है। अमीर बनने की चाहत में लोग सोने की खरीद नहीं करते। इसे तो आप इसलिए खरीदते हैं कि जब बाजार में गिरावट आए तब भी आपके पोर्टफोलियो में कुछ ऐसा हो, जिसका मूल्य बरकरार रहे। ये आपको तेजी से बढ़त नहीं देगा, लेकिन सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
इसलिए सोने पर खबरों से प्रभावित होकर आपको अपने निवेश का तरीका बदलने की आवश्यकता नहीं है। जब सोने की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जैसा कि बीते एक साल में देखा गया, तब लोग सोचते हैं कि उन्होंने अवसर गंवा दिया, पर आगे ऐसा न हो, इसलिए वे सोने की खरीद को आतुर हो उठते हैं। जब सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाया और सोने की कीमतों में वृद्धि हुई तो लोग असमंजस में आ गए कि खरीदें या बेचें। जब सरकार ने सोना न खरीदने की अपील की तो लोग सोच में पड़ गए कि क्या उनका सोना सुरक्षित है।
किसी भी खबर की वजह से सोने की भूमिका में कोई परिवर्तन नहीं आता। यदि आपके पोर्टफोलियो में पांच-दस प्रतिशत राशि गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूयचुअल फंड्स या आभूषणों के रूप में सोने में निवेशित है, तो यह बिल्कुल उचित है। ऐसा ही होना भी चाहिए। आपके पास एक सुरक्षा कवच है। सोने की कीमत में वृद्धि हुई, ये आपके लिए अच्छी बात है, पर इसका ये निहितार्थ नहीं निकलता कि आपको और अधिक सोना खरीदना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे शेयर के मूल्य में गिरावट ये संकेत नहीं देती कि उसे बेच देना चाहिए।
जो निवेशक सोने को खरीद-फरोख्त की वस्तु समझते हैं, वो इसे बढ़े हुए मूल्य पर महज इसलिए खरीद लेंगे क्योंकि ये चर्चा में है और जब माहौल सामान्य हो जाएगा तो बेचने को प्रवृत्त होंगे। इसमें उन्हें कुछ लाभ नहीं होगा। सोने में निवेश से लाभ चाहते हैं तो धैर्य और समय देना होगा।
सोने के विषय मे दो बातों की जानकारी आपकी समझ को विस्तार देंगी।
प्रथम है सावरेन गोल्ड बांड्स, ये सरकार द्वारा समर्थित उत्पाद हैं, जिसमें सोने की कीमत के अनुरूप ढाई प्रतिशत का सालाना ब्याज मिलता है, ये नए निवेश के तौर पर खरीद के लिए अभी उपलब्ध नहीं हैं। पिछली बार 2024 में सावरेन गोल्ड बांड्स जारी किए गए थे। यदि आपके पास वे उपलब्ध हैं तो उन्हें बनाए रख सकते हैं। परिपक्वता अवधि पर सोने की तात्कालिक कीमत पर उन्हें कैश करवा सकते हैं।
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दूसरा, नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने इस वर्ष मई में इलेक्ट्रानिक गोल्ड रिसीप्ट या ईजीआर जारी किए हैं। इसे डीमैट गोल्ड की तरह समझें। प्रत्येक ईजीआर सेबी द्वारा नियंत्रित वालेट में सुरक्षित रखा जाता है और इसे भौतिक सोने के समान ही माना जाता है। इसे आप शेयर की भांति ही शेयर बाजार में खरीद व बेच सकती हैं। यदि आप चाहें तो इसे वास्तविक सोने में भी बदल सकती हैं। ईजीआर छोटे मूल्य में उपलब्ध होते हैं, इस वजह से सभी निवेशकों के लिए इन्हें खरीदना सहज है। वास्तविक सोने की शुद्धता व उसे संभालकर रखने की चिंता होती हैं, पर ईजीआर से साथ आप उस तनाव से मुक्त रहते हैं। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स को सरलता से बेचकर धन जुटाया जा सकता है, उनके साथ ही अब ईजीआर सोने में निवेश का नया विकल्प है।
सवाल उठता है कि बतौर निवेशक क्या निर्णय उचित होगा?
अगर आपके पास सोने में किसी प्रकार का निवेश नहीं है तो निवेश राशि का पांच-दस प्रतिशत हिस्सा गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में लगा सकती हैं, इससे आपके पोर्टफोलियो में विविधता आएगी। इसकी ये वजह नहीं कि सोने को लेकर इन दिनों खबरों का बाजार गर्म है, बल्कि ये निवेश इसलिए करें, क्योंकि ये तरीका सही है और भविष्य के लिए भी अच्छा है।
यदि आपके पास पहले से किसी रूप में सोना है, तो ये देखना चाहए कि वह आपके पोर्टफोलियो में इस सीमा के अनुरूप हो। यदि सोने के आभूषण कुल निवेश राशि का दस प्रतिशत से अधिक हैं तो आपके पास पर्याप्त है। यदि आपके पास सावरेन गोल्ड बांड्स हैं तो उन्हें परिपक्वता अवधि तक पास ही रखें।
यदि कोई आपसे कहता है कि सोने की खरीद का ये सही समय है या बुरा समय है तो दोनों ही बातें मात्र उनके व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं। उसका आपकी दीर्घकालिक वित्तीय सोजनाओं से कोई सामंजस्य नहीं बैठता।
वास्तव में सोना तो भारतीय महिलाओं के पोर्टफोलियो में पीढ़ियों से रहा है। हमारी दादी-नानी ने तो आयात शुल्क के बारे में सोचकर उसमें निवेश नहीं किया होगा, बल्कि वे ये समझती थीं कि कुछ चीजों में बढ़त नहीं देखी जाती, वे तो संकट के समय के लिए सहेजकर रखी जाती हैं।
यदि आपके मन में निवेश से जुड़ी जिज्ञासा व सवाल हों को हमें लिखें- iamolaxmi@gmail.com
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