व्यापार का विस्तार करने के उद्देश्य से एक कंपनी ने अपने दो सेल्समैन को वहां भेजा। कुछ दिनों तक सर्वे करने के बाद दोनों ने कंपनी को अपनी-अपनी रिपोर्ट भेजी। एक ने रिपोर्ट में लिखा, "यहां लोग जूते नहीं पहनते, इसलिए व्यापार की कोई संभावना नहीं है।" वहीं, दूसरे ने कंपनी को बताया, "यहां कोई जूते नहीं पहनता, इसलिए बिजनेस की अच्छी संभावनाएं हैं।"
यह किस्सा बताता है कि जो व्यक्ति जैसा होता है, उसे स्थितियां वैसी ही नजर आती हैं। आशावादी जहां हर परिस्थिति में अपने लिए संभावनाएं देखते हैं, वहीं निराशावादी हाथ में आया मौका गंवा देते हैं। इसलिए सोच हमेशा सकारात्मक होनी चाहिए। यही जिंदगी में आगे ले जाता है और इसके दम पर ही बड़ी से बड़ी लड़ाई जीती जाती है। अगर आप अक्सर निराशा के भंवर में फंस जाते हैं और आशावाद से दोस्ती चाहते हैं तो यहां बताई जा रही बातें आपके लिए उपयोगी हो सकती हैं। इसके लिए हमने लाइफ कोच सुशील कुमार पारे से बात की है।
नकारात्मकता से बनाएं दूरी
किसी भी हाल में नकारात्मक विचार मन में न आने दें। यदि कभी ऐसा महसूस हो, तो कुछ छोटे-छोटे उपाय आजमाएं। जैसे उन चीजों के बारे में सोचें, जो आपको खुशी देती हैं। अपनी उपलब्धियों पर गौर करें। अच्छे कार्यों के लिए अपनी पीठ थपथपाएं। खुशी मिलने के साथ-साथ नकारात्मकता दूर होगी।
ज्यादा सोच-विचार न करें
ज्यादा सोच-विचार से तनाव और चिंता बढ़ती है। कई बार व्यक्ति डर जाता है और तनाव की वजह से बिना प्रयास किए ही परिस्थितियों के आगे समर्पण कर देता है। इससे बचने के लिए निराशावादी पूर्वानुमान लगाना बंद करें और समस्या सामने आने पर ही उसका विश्लेषण करें।
बनाएं रोल मॉडल
किसी ऐसे व्यक्ति से मित्रता करें, जिसकी सकारात्मकता आपको प्रभावित करती हो। विपरीत परिस्थितियों में जीत हासिल करने के उसके तरीकों को समझें और उन्हें अपने जीवन में जगह दें। जब भी मन उदास हो तो उनसे मिलें और बातें करें। मिलना संभव न हो तो फोन, सोशल मीडिया आदि के जरिए उनके संपर्क में रहें।
अपने लिए वक्त निकालें
जिंदगी में नकारात्मकता पसरने की एक बड़ी वजह खुद के लिए वक्त न निकालना भी है। इसके समाधान के लिए तमाम व्यस्तताओं के बावजूद अपने लिए समय निकालें। खुद से बातें करें। शौक को नए आयाम दें। कोई पॉजिटिव थॉट वाली किताब पढ़ें। अपने पसंदीदा गायक के गीत सुनें। नकारात्मकता खुद दूर हो जाएगी।
कुछ जरूरी बातें
हम सभी के पास सुखद यादों और अनुभवों का ऐसा संग्रह होता है, जो बड़ी से बड़ी समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है। जब भी मन उदास या निराश हो, तो इन पर नजर दौड़ाएं। कोई न कोई हल जरूर निकलेगा।
कोई चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा करने में कठिनाई महसूस हो, तो मन ही मन उसके खत्म होने के बाद मिलने वाली उपलब्धियों के बारे में सोचें। काम में मन लगेगा और मन आशावाद से भर जाएगा।
प्रस्तुति: वंदना
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Images: magnific/sakhi
