स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इसी बीच, भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) के महिला +86 किलोग्राम भार वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व कर रही 18 साल की युवा खिलाड़ी मार्टिना देवी मैबाम ने अपनी अद्भुत हिम्मत और दृढ़ संकल्प से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अपने जीवन के पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले रही इस युवा खिलाड़ी ने जिस तरह दबाव के क्षणों में खुद को साबित किया, वह हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
पहले दो प्रयासों में असफलता का सामना
गुरुवार, 30 जुलाई को खेले गए मुकाबले में मार्टिना के लिए शुरुआत बिल्कुल भी आसान नहीं रही। उन्होंने स्नैच राउंड में 103 किलोग्राम वजन उठाने का लक्ष्य रखा और अपने पहले दोनों प्रयासों में इसे उठाने की पूरी कोशिश की। लेकिन तकनीकी या शारीरिक दबाव के चलते वह दोनों ही बार वजन उठाने में असफल रहीं और उनके खाते में कोई सफल लिफ्ट दर्ज नहीं हो पाई।
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तीसरे प्रयास में 105 किलो वजन उठाकर चौंकाया
लगातार दो बार असफल होने के बाद मार्टिना के सामने प्रतियोगिता से बाहर होने का बड़ा खतरा मंडराने लगा था। क्लीन एंड जर्क राउंड से पहले उनके लिए यह अंतिम मौका था। सबको यह उम्मीद थी कि वह शायद दोबारा 103 किलोग्राम वजन ही चुनेंगी, लेकिन मार्टिना ने सभी को चौंकाते हुए अपना वजन बढ़ाकर सीधे 105 किलोग्राम कर दिया।
इस बार उन्होंने गजब का आत्मविश्वास दिखाया और बिना किसी परेशानी के उस भारी वजन को सफलतापूर्वक उठा लिया। इस बड़ी कामयाबी के बाद उनकी आंखें खुशी के आंसुओं से भर गईं।
140 किलो वजन उठाने की तैयारी
शानदार वापसी करने के बाद अब मार्टिना की निगाहें क्लीन एंड जर्क राउंड पर टिकी हैं। इस चरण में वह अपने पहले प्रयास में 140 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास करेंगी। यदि वह इस दौर में 140 किलो या उससे ज्यादा वजन उठाने में कामयाब रहती हैं, तो राष्ट्रमंडल खेलों में उनके पदक जीतने की उम्मीदें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।
भारत का शानदार वेटलिफ्टिंग प्रदर्शन
इस साल राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर्स का सफर बेहद शानदार रहा है।
टूर्नामेंट के शुरुआती दिनों यानी 26 जुलाई को देश की स्टार खिलाड़ी साइखोम मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर का तीसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक है। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई ने साबित कर दिया है कि भारतीय भारोत्तोलक वैश्विक स्तर पर कितने मजबूत हैं।
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मार्टिना देवी मैबाम की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि चाहे मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, इंसान को कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे लाइक जरूर करें। ऐसी अन्य जानकारी के लिए पढ़ती रहें हरजिंदगी।
Image Credit- olympics Tournament official website
