Uttara Guruvayurappan Temple Delhi: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और केरल के प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर के दर्शन करना चाहती हैं, तो आपको हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 में स्थित उत्तरा गुरुवायूरप्पन मंदिर आपको केरल वाली फीलिंग देता है। भगवान कृष्ण (जिन्हें गुरुवायूरप्पन के रूप में पूजा जाता है) को समर्पित यह मंदिर अपनी अनूठी दक्षिण भारतीय वास्तुकला, शांत वातावरण और बेहद खास परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां हर रोज शाम को जलने वाले हजारों दीए हैं। आज के इस लेख में हम आपको उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर के स्थापना से लेकर इसके खुलने बंद होने और अन्य जानकारी के बारे में बताने जा रहे हैं।

उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर कहां है?

उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर दिल्ली में मयूर विहार- I में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर श्री कृष्ण को समर्पित है, जिन्हें केरल राज्य के गुरुवयूर शहर में प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मंदिर के देवता, गुरुवायुरप्पन के रूप में पूजा जाता है।

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कब स्थापित किया गया उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर?

8 अप्रैल, 1983 को प्रोफेसर वेझापराम्बु परमेश्वरन नंबूदरीपाद द्वारा केरल से लाए गए भगवान गुरुवायुरप्पन के दिव्य विग्रह के साथ पवित्र किया गया था। गर्भ गृह की आधारशिला 2 अक्टूबर, 1986 को कांची कामकोटि पीठाधीश्वर परम पावन जगद्गुरु जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य स्वामीगल द्वारा रखी गई थी। भगवान गुरुवायुरप्पन के दिव्य विग्रह को 17 मई, 1989 को कुंभाभिषेकम के साथ नए मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया था।

प्रमुख देवता श्री गुरुवायुरप्पन (भगवान विष्णु) हैं। छोटानिकारा भगवती (देवी), भगवान शिव, भगवान गणपति, भगवान अयप्पा और नागा देवता अन्य देवता हैं। त्रिपुनिथारा, एर्नाकुलम में थान्ट्रिक अधिकार पुलियानूर इलम के पास निहित हैं।

उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर खुलने का समय क्या है?

गर्मी के मौसम मंदिर खुलने का समय सुबह 5:30 बजे से 11:00 बजे और शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है। वहीं अगर आप सर्दियों में यहां आना चाहती हैं, तो सुबह 5:30 बजे से 11:00 बजे तक और शाम में 5:30 बजे से रात 8:30 बजे तक मंदिर खुलने का समय है।

उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर की खास बात क्या है?

इस मंदिर की सबसे खूबसूरत और मुख्य खासियत है यहां हर रोज शाम को होने वाली दीपाराधना है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर विशेष रूप से लकड़ी और पीतल के हजारों छोटे-छोटे दीए लगाए गए हैं। ये सभी दीए जब एक साथ जलते हैं, तो पूरा मंदिर सोने की तरह चमक उठता है। इस नजारे को देखना अपने आप में एक बेहद सुखद और आध्यात्मिक अनुभव होता है।

उत्तरा गुरुवायूरप्पन मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का केंद्र नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारतीय संस्कृति का एक बड़ा केंद्र भी है। यहां ओणम, विषु और जन्माष्टमी के दौरान खास रौनक देखने को मिलती है। इन त्योहारों पर विशेष तौर पर केरल का पारंपरिक संगीत चेंदा मेलम बजाया जाता है और भगवान को बेहद स्वादिष्ट पाल पायसम (विशेष खीर) का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में कैंटीन की व्यवस्था

उत्तरा गुरुवायूरप्पन मंदिर की कैंटीन में सात्विक और ऑथेटिंक साउथ इंडियन भोजन मिलता है, जिसमें प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता। यहां की पाल पायसम, अप्पम, इडली और डोसा जैसी चीजें लोकप्रिय हैं।

उत्तरा गुरुवायूरप्पन मंदिर कैसे पहुंचें?

उत्तरा गुरुवायूरप्पन मंदिर दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 में स्थित है। यहां आप मेट्रो, बस या अपने निजी वाहन से बेहद आसानी से पहुंच सकती हैं। इस मंदिर के सबसे नजदीक न्यू अशोक नगर और मयूर विहार फेज-3 मेट्रो स्टेशन हैं, जो ब्लू लाइन और पिंक लाइन पर पड़ते हैं।

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