करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी शादीशुदा जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को सोलह श्रृंगार करके महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती हैं। इसके बाद महिलाओं को चांद निकलने का इंतजार रहता है क्योंकि चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों से जल ग्रहण करने के बाद ही व्रत खोला जाता है। आइए नोएडा के पंडित अरुणेश कुमार शर्मा से जानते हैं कि साल 2026 में करवा चौथ किस तारीख को मनाया जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और आपके शहर में चांद कब दिखाई देगा?

करवा चौथ की क्या है डेट?

करवा चौथ का त्योहार नजदीक आते ही व्रत की तारीख, पूजा के शुभ समय और चंद्रोदय को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगते हैं। साल 2026 में भी करवा चौथ की तारीख को लेकर चर्चा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं।

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करवा चौथ की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 29 अक्टूबर की आधी रात 1 बजकर 6 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 29 अक्टूबर की रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा। जिसके अनुसार करवा चौथ 29 अक्टूबर, बृहस्पतिवार को ही मनाया जाएगा।

करवा चौथ के दिन व्रत और पूजा का समय

करवा चौथ वाले दिन व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, इसी दौरान सभी महिलाओं को कथा सुननी होगी और मां करवा की पूजा करनी होगी।

पूजा का समय- शाम 5 बजकर 38 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।

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करवा चौथ 2026 पर कब निकलेगा चांद?

दिल्ली-एनसीआर में 29 अक्टूबर को चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 17 मिनट रहेगा। हालांकि, अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए, व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय देखना चाहिए। चांद के दर्शन करने और अर्घ्य देने के बाद ही पारंपरिक रूप से यह व्रत खोला जाता है।

लखनऊ: रात 8:06 बजे
कोलकाता: रात 7:47 बजे
मुंबई: रात 9:00 बजे
जयपुर: रात 8:28 बजे
चंडीगढ़: रात 8:12 बजे
बेंगलुरु: रात 8:55 बजे

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करवा चौथ की पूजन विधि

इस व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय से पहले सरगी से होती है। सास अपनी बहू को सरगी देती है जिसमें मिठाई, फल, सूखे मेवे और फेनी होती है। सूर्योदय के बाद कुछ भी खाना-पीना नहीं होता है। दिन भर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, मेहंदी लगाती हैं, नए कपड़े पहनती हैं और शिव-पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं।

शाम के पूजा मुहूर्त में सभी सुहागिन महिलाएं एक जगह इकट्ठा होकर करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं। पूजा की थाली में करवा, दीया, कुमकुम, फूल और मिठाई रखी जाती है। चांद निकलने के बाद छलनी से पहले चांद को और फिर अपने पति को देखा जाता है। इसके बाद चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। अगर आप भी व्रत रख रही हैं तो पूजा का समय और अपने शहर का चांद निकलने का समय पहले ही नोट कर लें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।