छोटे बच्चे स्वभाव से ही बेहद ही उत्साह से भरे होते हैं और उनके पास हर बात के लिए 'क्यों' और 'कैसे' जैसे सवालों की एक लंबी लिस्ट होती है। ऐसे में रोज-रोज के सवालों से पेरेंट्स परेशान हो जाते हैं, लेकिन आपको यह चाहिए कि यह आदत बच्चों की अच्छी है। ऐसे में बच्चों के इन अनगिनत सवालों को नजरअंदाज करने या उन्हें डांटकर चुप कराने के बजाय, आप पेरेंटिंग की एक खास ट्रिक से उन्हें एक बेहतरीन 'रिसर्चर' बना सकते हैं। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों को रिसर्चर कैसे बनाएं? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

ऑब्जर्वेशन है जरूरी

एक अच्छा रिसर्चर बनने के लिए सबसे जरूरी हुनर होता है ऑब्जर्वेशन। बच्चे आसपास की छोटी-छोटी चीजों पर नजर रखकर अपनी सोचने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

 इसके लिए आपको किसी महंगे खिलौने या क्लास की जरूरत नहीं है, बल्कि आप घर के पास ही कुछ गतिविधियों को करके स्कील्स को मजबूत बना सकती हैं।

नेचर वॉक आएगा काम

अपने बिजी शेड्यूल से थोड़ा समय निकालकर शाम को बच्चों को किसी पास के पार्क या खुली जगह पर टहलाने ले जाएं। इस दौरान चलने की स्पीड को थोड़ा धीमा रखें और उन्हें नेचर को करीब से महसूस करने दें। 

पार्क में घूमते समय उन्हें छोटे टास्क दें, जैसे—जमीन पर बने पक्षियों के पैरों के निशान, चींटियों के घर आदि।

ये सवाल भी है जरूरी

जब आप बच्चों के साथ कार, बस या मेट्रो में सफर कर रही हों, किसी दुकान में सामान खरीद रही हों या फिर प्लेग्राउंड में हों, तो उनके साथ 'फाइव सेंसेस गेम' खेलें। उनसे सवाल पूछें कि-

  • तुम अभी क्या देख रहे हो? 
  • तुम्हें कौन सी आवाजें सुनाई दे रही हैं?
  • यहां कैसी खुशबू आ रही है?
  • इस फल का स्वाद कैसा है?
  • इस पेड़ की छाल या पत्ते को छूने पर कैसा महसूस हो रहा है?

यह आसान सा खेल बच्चों को बिना किसी स्क्रीन-टाइम या गैजेट्स के बहलाए रखने का एक बेहतरीन तरीका है, जो उनके दिमाग को तेज बनाता है।

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Images: magnific