जब भी लोग रिश्तों के बारे में चर्चा करते हैं तो अक्सर उनकी यही शिकायत होती है कि मैं उससे बहुत प्यार करता या करती हूं, फिर भी वह मुझसे नाराज़ हो जाता या जाती है। अब सोचने वाली बात यह है कि रिश्ते में प्यार के बावजूद सहजता और मधुरता क्यों नहीं होती? इस संदर्भ में रिलेशनशिप एक्सपर्ट विचित्रा दर्गन आनंद कहती हैं, 'हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हर व्यक्ति का स्वतंत्र व्यक्तित्व होता है। आप चाहे अपनों से कितना ही प्यार क्यों न करें, लेकिन अगर आपके व्यवहार से उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है तो आपके प्रति उसके मन में अच्छी धारणा नहीं बनेगी और वह आपसे दूर होता चला जाएगा। इसलिए चाहे घर हो या बाहर अपने हर रिश्ते में आप दूसरों की भावनाओं का भी सम्मान करें। आइए जानें रिश्तों में आपसी समझ कैसे बढ़ाई जा सकती है?

दांपत्य जीवन में हो सामंजस्य

अगर व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की बात है तो इसकी शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी चाहिए। पति-पत्नी का रिश्ता सबसे करीबी होता है, जिसमें लोगों के दिलों में अपने पार्टनर के लिए ढेर सारा प्यार तो होता है, लेकिन वो एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं करते। यही बात उनके बीच तकरार की बड़ी वजह बन जाती है।

दिल्ली की शिखा मित्तल पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। इस संदर्भ में वह कहती हैं, 'मेरे पति शुद्ध शाकाहारी हैं और शादी से पहले मैं नॉनवेज खाती थी। लगभग छह महीने तक मैंने अपनी फूड क्रेविंग को रोककर रखा था। मैंने उनसे कभी कोई शिकायत नहीं की। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मैं उनके सामने नॉनवेज नहीं खाती थी, लेकिन पता नहीं कैसे वह बिना कहे ही मेरे मन की बात समझ गए। एक रोज जब मुझे ऑफिस से लौटने में थोड़ी देर हो गई, तो उन्होंने कहा कि तुम डिनर मत बनाओ, आज मैंने खाना ऑर्डर कर दिया है, दस मिनट में आ जाएगा। जब मैंने पैकेट खोला तो उसमें पनीर के साथ तंदूरी चिकन भी था, मुझे ऐसा लगा किसी दूसरे का पैकेट डिलीवरी बॉय की गलती से हमारे घर पर आ गया है। जब मैंने पति से शिकायत की, तो उन्होंने कहा कि यह तुम्हारे लिए है।

ऐसी बात सुनकर मैं इमोशनल हो गई, लेकिन उस दिन के बाद से मैं भी इस बात का पूरा ध्यान रखती हूं कि छुट्टी वाले दिन उनकी मनपसंद वेज डिशेज़ बनाऊं। यहां बात केवल खाने की नहीं है, रोज़मर्रा के व्यवहार से जुड़ी कई ऐसी छोटी-छोटी बातें होती हैं, जिनके जरिए अपने पार्टनर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आप उसे स्पेशल फील करवा सकते हैं। मसलन, घरेलू कार्यों में सहर्ष एक-दूसरे की मदद करना। यह पारंपरिक धारणा गलत है कि करीबी रिश्तों में सॉरी और थैंक्यू जैसे शब्दों के लिए कोई जगह नहीं होती। कभी किसी अच्छे कार्य के लिए आप अपने पार्टनर को धन्यवाद दें तो निश्चित रूप से उसे बहुत अच्छा महसूस होगा।

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समझें बच्चों की भावनाएं

लोग अपने बच्चों को भरपूर लाड़-प्यार देते हैं। गलती होने पर उसके साथ डांट-फटकार भी स्वाभाविक है। इस दौरान अधिकतर अभिभावक यह भूल जाते हैं कि बच्चों का भी स्वतंत्र व्यक्तित्व होता है। कई बार हम उनके साथ ज्यादा सख्ती से पेश आते हैं तो इससे उनकी भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है।

चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट आयुषी शर्मा के अनुसार, यह अच्छी बात है कि अब पेरेंट्स में जागरूकता बढ़ रही है और वे बच्चों की भावनाओं को समझने की कोशिश करते हैं। फिर भी कई बार वे अनजाने में मेहमानों के सामने बच्चे को बुरी तरह डांट देते हैं, जिससे उनकी कोमल भावनाएं आहत होती हैं। अगर किसी बच्चे के साथ बार-बार ऐसा व्यवहार किया जाता है, तो इससे उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। इसलिए बच्चों को अनुशासित करते समय उनकी भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए। खासतौर पर हॉर्मोन संबंधी उतार-चढ़ाव के कारण टीनएजर्स को मूड स्विंग जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इसलिए उनके माता-पिता को विशेष सजगता बरतनी चाहिए।

लखनऊ की होममेकर मुग्धा शर्मा कहती हैं, 'दसवीं कक्षा में पढऩे वाली मेरी बेटी को कुकिंग बहुत पसंद है। मेरे जन्मदिन पर उसने केक बनाया, जो बहुत सख्त हो गया था। मेरे पति उसे टोकने वाले थे तो मैंने उन्हें इशारे से मना कर दिया। बेटी से कहा कि अच्छा बना है, अगली बार कोशिश करोगी तो और भी अच्छा बनेगा। उस दिन अगर हम उसके काम में गलतियां निकालते तो, इससे उसका मनोबल टूट जाता और वह दोबारा केक बनाने की कोशिश नहीं करती।

दोनों पीढ़ियों की भावनाएं समझें

जिस परिवार में दो या तीन पीढ़ियां एक साथ रहती हैं, वहां उनके रिश्तों में अनबन की सबसे बड़ी वजह है- भावनाओं का टकराव। बुजुर्ग दादा-दादी, मिडिल एज मम्मी-पापा और कॉलेज जाने वाली उनकी युवा संतानें। ऐसी स्थिति में सब लोग अपनी जगह पर सही होते हैं, लेकिन वे दूसरों की भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं करते। इसी वजह से छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों पीढ़ियों के बीच टकराव शुरू हो जाता है।

अगर दादी को टीवी पर 'आस्था चैनल' देखना पसंद है तो उन्हें भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बगल वाले कमरे में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए हमें टीवी का वॉल्यूम थोड़ा कम कर देना चाहिए। कई बार बुजुर्गों की श्रवण-शक्ति और याददाश्त कमजोर पड़ जाती है, इसलिए वे एक ही बात को कई बार पूछते हैं।

ऐसे में बेटे-बहू और बच्चों का यह फर्ज बनता है कि नाराज होने के बजाय वे धैर्यपूर्वक उनकी बातों का जवाब दें। हर आयु वर्ग के लोगों की व्यावहारिक और भावनात्मक जरूरतें दूसरे से अलग होती हैं। इसलिए रोज़मर्रा के व्यवहार में परिवार के सभी सदस्यों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, इससे परिवार का माहौल खुशनुमा बना रहेगा।

पास-पड़ोस और रिश्तेदार

पड़ोसी और रिश्तेदार हमारे सामाजिक जीवन में इस तरह शामिल होते हैं कि भले ही हम उन्हें नापसंद करते हों, पर इन करीबी लोगों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। बेशक आप उनके साथ बहुत प्रेमपूर्ण व्यवहार करते हों, पर बातचीत के दौरान अपनी भाषा शैली और शब्दों के चयन के प्रति अतिरिक्त सजगता बरतें।

मसलन, अगर हाल ही में किसी रिश्तेदार की बेटी का तलाक हुआ है और बातचीत के दौरान अनायास आपके मुंह से यह वाक्य निकल गया कि आजकल तलाक के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं क्योंकि अब लड़कियां ससुराल के नये माहौल साथ तालमेल बैठाने की कोशिश नहीं करतीं।

हो सकता है यहां आपकी मंशा गलत न हो और यह वाक्य यूं ही आपके मुंह से निकल गया हो, लेकिन यह छोटी सी बात उन्हें चुभ सकती है और बेवजह उनके साथ आपके संबंध खराब हो सकते हैं। इसी तरह पास-पड़ोस में रहने वाले लोगों के साथ बातचीत करते हुए किसी की शारीरिक अक्षमता, रंग-रूप और आर्थिक स्थिति को लेकर मज़ाक में भी कोई नकारात्मक टीका-टिप्पणी न करें। इससे उनकी भावनाएं आहत हो सकती हैं।

ऑफिस में इमोशन मैनेजमेंट

ऑफिस में दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने के साथ अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखना भी बहुत जरूरी है। कामकाज की नीतियों के बारे में कई बार कलीग्स के बीच असहमति और बहस हो सकती है। इसी तरह किसी वरिष्ठ अधिकारी का सख्ती भरा व्यवहार आपको उदास कर सकता है। ऐसी स्थितियों में ही आपके संयम की परीक्षा होती है। अगर दूसरों की कोई बात आपको नापसंद भी हो, तो भी तत्काल कोई उग्र प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बजाय थोड़ी देर चुप रहें और बाद में शांतिपूर्ण ढंग से उस व्यक्ति के समक्ष अपनी शिकायत रखें।
इस तरह अगर हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने के साथ अपने भावावेश को नियंत्रित करना सीख जाएंगे तो जीवन में सुकून बना रहेगा।

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