मैरिड लाइफ में पार्टनर्स को अपनी पर्सनल पहचान बनाने के लिए थोड़ा पर्सनल स्पेस मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि एक-दूसरे को 'मी-टाइम' देने के चक्कर में अनजाने में कपल्स बिल्कुल बातें करना बंद कर देते हैं, जिससे बड़ी दूरी आ जाता है। जब आपका पार्टनर अपनी उलझनों या बिजनेस गोल्स के कारण अकेला रह जाता है, तो उसे अकेला छोड़ना सही है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप दोनों अजनबियों की तरह रहने लगें। ऐसे में दोनों के बीच के अंतर के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पर्सनल स्पेस और दूरियों के बीच में क्या अंतर है और इससे कैसे डील करें? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

पर्सनल स्पेस और दूरियों के बीच का क्या फर्क है?

रिश्ते में स्पेस देने का मतलब होता है पार्टनर को उनकी हॉबीज, दोस्तों या करियर से जुड़े फैसलों के लिए पूरी फ्रीडम देना, ताकि वे खुद को रीफ्रेश कर सकें। स्पेस देने के बाद कपल्स के बीच का प्यार और सम्मान और ज्यादा बढ़ जाता है। 

इससे अलग, दूरियां तब आ जाती हैं जब स्पेस के नाम पर पार्टनर्स के बीच बातचीत बंद हो जाती है, मन में गलतफहमियां बढ़ने लगती हैं और वे साथ रहकर भी एक-दूसरे को नहीं जानते हैं।

रिश्ते में खोई हुई बातचीत को दोबारा कैसे बढ़ाएं?

  • वीकेंड या रात को सोने से पहले कुछ समय के लिए सोशल मीडिया की रील्स और गैजेट्स को खुद से दूर कर दें।
  • दिनभर के ऑफिस या घर के कामों के स्ट्रेस के बाद, रोज शाम को सिर्फ 15 मिनट एक साथ बिना किसी काम के दखल के चाय पिएं।

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  • वीकेंड पर घर को थोड़ा बिजी लुक देने के लिए साथ मिलकर छोटे-मोटे काम करें। ऐसे घरेलू कामों में साथ वक्त बिताने से आपसी बॉन्डिंग बहुत जल्दी सुधरती है। 

नोट - पार्टनर को उनका पर्सनल टाइम देते समय कुछ सीमाओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। 

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Images: magnific