बच्चे अक्सर टीवी एड्स या दोस्तों के पास महंगी चीजें देखकर उन्हें खरीदने की जिद करने लगते हैं। ऐसे में पेरेंट्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे बच्चों को इच्छा और जरूरत के बीच का अंतर कैसे समझाएं। बचपन में दी गई सीख बच्चों के फ्यूचर में काम आती है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों को पैसों की अहमियत सिखाने वाले 5 तरीके क्या हैं? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
बच्चों को सही पॉकेट मनी मैनेजमेंट सिखाने वाले तरीके
बच्चों को बिल्कुल सिंपल लैंग्वेज में समझाएं कि जरूरत वह चीजें हैं, जिनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, जैसे- साफ पानी, रहने के लिए घर, दवाइयां और स्कूल की पढ़ाई। जबकि इच्छा वे चीजें हैं जिन्हें हम सिर्फ शौक के लिए चाहते हैं, जैसे- महंगे वीडियो गेम्स, ब्रांडेड जूते या रोज-रोज बाहर का पिज्जा खाना।
बच्चों को सिर्फ एक गुल्लक देने के बजाय घर पर ही बेकार पड़ी पुरानी प्लास्टिक की बोतलों से जार बनाएं। इन पर बचत , खर्च और दान का लेबल लगाएं। जब भी उन्हें पॉकेट मनी मिले, तो उन्हें समझाएं कि अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उन्हें बचत वाले जार में पैसे इकट्ठे करने होंगे, जबकि जरूरत की चीजें पेरेंट्स दिलाएंगे।
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जब भी आप बच्चों के साथ ग्रोसरी या घर का सामान खरीदने सुपरमार्केट जाएं, तो उन्हें अपने साथ शामिल करें। उन्हें एक लिस्ट थमाएं। अगर वे किसी महंगे चॉकलेट या खिलौने की जिद करें, तो शांत रहकर उनसे पूछें, "क्या यह बहुत जरूरी है?
हफ्ते में एक दिन डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं और बच्चों के साथ मिलकर घर का बजट बनाने का गेम खेलें। अगर आपका बच्चा अपनी सेविंग्स से कोई ऐसी चीज खरीदना चाहता है जो आपको बेकार लगती है, तो उसे एक बार खरीदने दें और जब यह काम का न हो तो उन्हें समझाएं।
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Images: magnific
