अक्सर आपने देखा होगा कि हम बाजार में घूमते हुए या मोबाइल पर स्क्रॉल करते-करते अचानक ऐसी चीजें खरीद लेते हैं, जिसकी हमें वास्तव में कोई जरूरत नहीं होती। इसे ही अंग्रेजी में 'इम्पल्स बाइंग' यानी बिना सोचे-समझे खरीदारी करना कहा जाता है। बाद में जब बिल सामने आता है, तो केवल पछतावा ही हाथ लगता है। अगर आप भी इस आदत से परेशान हैं और अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इन 5 आसान और असरदार नियमों को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें। जानते हैं इनके बारे में...
1. अपने ट्रिगर्स को पहचानें
अनचाही खरीदारी का सबसे बड़ा कारण हमारी भावनाएं होती हैं। कई बार हम अपने मानसिक तनाव या अत्यधिक उत्साह में आकर पैसे बहा देते हैं।
- स्ट्रेस: जब मन उदास होता है, तो लोग अक्सर यह सोचकर शॉपिंग करते हैं कि नया सामान खरीदने से उनका मूड ठीक हो जाएगा।
- अत्यधिक खुशी: किसी सफलता का जश्न मनाने या खुद को शाबाशी देने के नाम पर भी लोग फिजूलखर्ची कर बैठते हैं।
- थकान का असर: दिनभर की थकान के बाद सही फैसले लेने की क्षमता घट जाती है, जिससे हम गैर-जरूरी सामान भी आसानी से खरीद लेते हैं।
जब भी अचानक कुछ खरीदने की तेज इच्छा जगे, तो एक पल रुककर स्थिति को समझें। खुद को संभालने के लिए खरीदारी के बजाय वॉक पर जाएं, संगीत सुनें या दोस्तों से बात करें।
2. 48-घंटे वाले नियम को आजमाएं
कोई नया सामान या लुभावना ऑफर देखते ही मन में जो लालच आता है, वह कुछ समय के लिए होता है।
- रुकें और विचार करें: जब भी कोई सामान पसंद आए, तो उसे तुरंत खरीदने के बजाय एक डायरी में लिख लें और खुद को दो दिन (48 घंटे) का वक्त दें।
- व्यावहारिक सोच: 48 घंटे बीत जाने के बाद आपका दिमाग शांत हो जाएगा और आप बेहतर तरीके से तय कर पाएंगे कि वह सामान सचमुच जरूरी है या नहीं।
- ऑफर की पड़ताल: इस समय का उपयोग आप उस सामान के दाम दूसरी जगह चेक करने या डिस्काउंट कूपन तलाशने में भी कर सकते हैं।
3. ऑनलाइन पेमेंट की प्रक्रिया को थोड़ा कठिन बनाएं
ई-कॉमर्स ऐप्स पर एक क्लिक में सामान बुक होने की सुविधा ही हमारी जेब पर सबसे ज्यादा भारी पड़ती है।
- सेव किए गए कार्ड्स हटाएं: जिन शॉपिंग ऐप्स पर आप ज्यादा समय बिताते हैं, वहां से अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी हटा दें।
- सोचने का समय मिलेगा: जब आपको हर बार खरीदारी के लिए कार्ड नंबर और ओटीपी डालना पड़ेगा, तो उस बीच आपको यह सोचने का मौका मिल जाएगा कि यह फैसला सही है या नहीं।
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4. विज्ञापनों को खुद से दूर रखें
विज्ञापनों को इस तरह बनाया जाता है कि वे सीधे आपकी भावनाओं पर असर करें और आपको सामान खरीदने के लिए उकसाएं।
- टीवी और ओटीटी देखते समय सावधान रहें: जब भी ब्रेक में विज्ञापन आए, तो टीवी को म्यूट कर दें या उसे फॉरवर्ड कर दें।
- एड ब्लॉकर का उपयोग: अपने फोन और लैपटॉप पर एड ब्लॉकर का प्रयोग करें ताकि बार-बार रंग-बिरंगे ऑफर्स आपकी आंखों के सामने न आएं।
5. कभी भी खाली पेट राशन या खाने की खरीदारी न करें
जब शरीर को भूख लगी होती है, तो दिमाग हर खाने की चीज को हासिल करना चाहता है।
- बिना सोचे-समझे खरीदारी: भूखे पेट सुपरमार्केट या किराना दुकान जाने पर हम अक्सर जरूरत से ज्यादा जंक फूड और महंगे स्नैक्स खरीद लाते हैं।
राशन या ग्रॉसरी का सामान लेने जाने से पहले हमेशा घर से अच्छा भोजन करके निकलें। पेट भरा होगा तो दिमाग भी सही फैसले लेगा।
निष्कर्ष
अनावश्यक खरीदारी से बचना रातों-रात संभव नहीं है, लेकिन थोड़े से अनुशासन और सही आदतों से इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है। जब आप अपनी जरूरतों और केवल इच्छाओं के बीच का फर्क समझ जाएंगे, तो आपकी बचत खुद-ब-खुद बढ़ने लगेगी।
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