किसी भी चीज को लिखने के लिए पढ़ना आना बहुत जरूरी होता है। अगर शब्दों की पहचान न हो, तो उसे किताब या किसी भी चीज पर उतारना मुश्किल होता है। यदि मैं आपसे कहूं कि असम की रहने वाली हेमोप्रोवा चुटिया, जिन्हें संस्कृत भाषा पढ़ना नहीं आता था, फिर भी उन्होंने 280 फुट कपड़े पर पूरी श्रीमद्भगवद्गीता को बुन डाला, तो शायद यह आपको सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है। आज के इस लेख में हम आपको पद्मा श्री सम्मानित हेमोप्रोवा की प्रेरणादायक कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।

हेमोप्रोवा चुटिया कहां की रहने वाली हैं?

जैसा कि ऊपर लेख में लिखा है कि हेमोप्रोवा असम की रहने वाली हैं। अब सवाल यह आता है कि असम में कहां से? तो बता दें कि हेमोप्रोवा असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान की रहने वाली हैं, जो अपनी बुनाई की कला के लिए जाना जाता है। इस काम के जरिए उन्होंने असम की पुरानी बुनाई कला को बचाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए नाम कमाया है।

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280 फुट कपड़े पर बुना श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक

हेमोप्रोवा जी ने किसी कलम या स्याही से नहीं, बल्कि धागों और हथकरघे की मदद से पूरी श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों को कपड़े पर उकेर दिया है। उन्होंने असमिया और संस्कृत भाषा में भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों और 700 श्लोकों को रेशमी कपड़ों पर बहुत ही ध्यान से बुना है। इस काम के लिए बहुत सब्र और मेहनत की जरूरत थी। उन्होंने कई सालों तक दिन-रात मेहनत करके इस काम को पूरा किया। भगवद्गीता के अलावा उन्होंने 'गुणमाला' और नामघोषा जैसे पवित्र ग्रंथों को भी कपड़े पर बुना है।
हेमोप्रोवा को इस काम के लिए साल 2023 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार पद्म श्री सम्मानित किया गया था। वहीं वर्ष 2022 में असम गौरव पुरस्कार से नवाजा गया था।

हेमोप्रोवा ने संस्कृत भाषा में कैसे की बुनाई?

हेमोप्रोवा के काम की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने संस्कृत पढ़े बिना ही उसे कपड़े पर कैसे बुना? शब्दों को पढ़ने के बजाय, उन्होंने हर अक्षर के आकार और बनावट पर ध्यान दिया। हर अक्षर को एक चित्र की तरह देखा गया और फिर उसे धागे से कपड़े पर बनाया गया।

हथकरघे पर बुनाई करना होता है मुश्किल

हथकरघे पर बुने जाने वाले अक्षरों को उल्टे रूप में बनाना पड़ता है, ताकि कपड़े के सामने से देखने पर वे सीधे और सही दिखाई दें। इसका मतलब यह था कि हेमोप्रोवा को अक्षरों को उल्टे क्रम में बुनना पड़ा और साथ ही पूरे कपड़े पर सही दूरी और एक समान रूप बनाए रखना पड़ा।

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हेमोप्रोवा चुटिया के बारे में जानकर यह बात प्रूफ हो गई है कि अगर लग्न, हिम्मत और दृढ़ता से किसी काम को किया जाए, तो वह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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