गणेश उत्सव में बप्पा के आने की खुशी जितनी होती है, उतना ही भावुक पल उनकी व‍िदाई का भी होता है। कई घरों में विसर्जन से पहले एक खास पूजा की जाती है, जिसे उत्तर पूजा कहा जाता है। बहुत से लोग इसे बप्पा को विदा करने से पहले की आखिरी पूजा भी मानते हैं। यानी जिस तरह गणपति जी को घर लाकर उनका स्वागत किया जाता है, उसी तरह विसर्जन से पहले सम्मान के साथ उन्हें विदा भी किया जाता है।

यही वजह है कि उत्तर पूजा को गणपति विसर्जन से ठीक पहले की बहुत जरूरी रस्म माना जाता है। पूजा खत्म होने के बाद बप्पा की मूर्ति को उनकी जगह से थोड़ा आगे खिसकाने का भी नियम है। आखिर ये उत्तर पूजा होती क्या है और विसर्जन से पहले इसे क्यों करते हैं? ज्‍योत‍िषाचार्य न‍िर्मल पंड‍ित इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-

गणेश विसर्जन से पहले उत्तर पूजा क्यों की जाती है?

उत्तर पूजा को बप्पा की विदाई वाली पूजा कह सकते हैं। पूरे 10 दिनों तक रोज बप्पा की पूजा, आरती और भोग लगाने के बाद जब विसर्जन का समय आता है, तो उन्हें अचानक उठाकर नहीं ले जाया जाता है बल्कि उससे पहले एक आखिरी पूजा की जाती है, जिसे उत्तर पूजा कहते हैं। धार्मिक मान्यता है क‍ि इसी पूजा के जरिए हम गणेश भगवान को बहुत आदर और सम्मान के साथ विदाई देते हैं।

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पूजा खत्म होने के बाद मूर्ति को अपनी जगह से थोड़ा सा आगे खिसका दिया जाता है। इसका मतलब यह होता है कि अब बप्पा अपने आसन से आगे बढ़ चुके हैं और विसर्जन के लिए जाने को तैयार हैं। इससे साफ है कि उत्तर पूजा सिर्फ कोई आम पूजा नहीं है बल्कि यह बप्पा को प्यार से विदा करने की शुरुआत होती है।

गणपति विसर्जन से पहले उत्तर पूजा में क्या करें?

उत्तर पूजा की परंपरा में गणपति भगवान को पूजा की कई चीजें चढ़ाई जाती हैं। इसमें आमतौर पर पूजा करके बप्‍पा की आरती की जाती है और भोग भी लगाया जाता है। अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में पूजा का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। विसर्जन से पहले होने वाली इस आखिरी पूजा में बप्पा को ये सब चीजें चढ़ाई जाती हैं-

  • बप्पा को चंदन लगाया जाता है।
  • अक्षत (चावल) और फूल चढ़ाए जाते हैं।
  • दूर्वा (घास) अर्पित की जाती है।
  • धूप और दीप जलाकर दिखाए जाते हैं।
  • बप्पा को उनकी मनपसंद चीजों का भोग लगाया जाता है।
  • आखिर में आरती की जाती है।

इन चीजों के साथ पूजा पूरी करने के बाद ही बप्पा को पूरे सम्मान के साथ विसर्जन के लिए ले जाया जाता है।

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उत्तर पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया

स्‍टेप्‍स क्‍या क‍िया जाता है?
चंदन और श्रृंगार बप्पा को प्यार से चंदन, अक्षत और दूर्वा चढ़ाई जाती है।
भोग गणपति बप्‍पा को उनकी पसंदीदा चीजों (मोदक या लड्डू) का भोग लगाते हैं।
धूप-दीप और आरती भाेग के बाद धूप-दीप जलाकर बप्‍पा की आख‍िरी आरती की जाती है।   
मूर्ती ख‍िसकाना उत्तर पूजा के बाद बप्‍पा की मूर्ती को आसन से थोड़ा आगे खिसकाया जाता है। 
प्रार्थना और क्षमा याचना सुख-समृद्धि की कामना की जाती है और पूजा की भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हैं।
व‍िसर्जन जयकारों के साथ बप्पा को सम्मानपूर्वक विसर्जन के लिए ले जाते हैं। 

पूजा के बाद मूर्ति को थोड़ा आगे क्यों खिसकाते हैं?

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि गणपत‍ि विसर्जन से ठीक पहले बप्पा की मूर्ति को अपनी जगह से थोड़ा आगे क्यों खिसकाया जाता है? इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि यह इस बात का इशारा होता है कि अब बप्पा अपनी जगह से विदा होने के लिए तैयार हैं। यानी उत्तर पूजा खत्म होने के बाद मूर्ति को आगे खिसकाने का मतलब है कि गणेश जी अपने आसन से उठकर अब विसर्जन के सफर पर निकल रहे हैं।

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क्या उत्तर पूजा के बाद ही गणपति विसर्जन किया जाता है?

उत्तर पूजा पूरी होने के बाद ही बप्पा को विसर्जन के लिए ले जाने का नियम है। इस समय भक्त मिलकर बप्पा की आरती करते हैं और उनसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि वो पूरे साल हम पर और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। इसके बाद ही गणेश जी को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ विसर्जन के लिए घर से बाहर ले जाया जाता है। इसमें सिर्फ पूजा खत्म करने की बात नहीं होती बल्कि बप्पा को प्यार और इज्जत के साथ विदा करने की भावना भी जुड़ी होती है।

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अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषियों, पंचांग और लोक परंपराओं पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य केवल आप तक सही जानकारी पहुंचाना है। इसके किसी भी प्रयोग से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या ज्योतिषी से सलाह जरूर लें।

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