कई भारतीय घरों को अपने प्रियजनों को खोने के बाद एक खास किस्म के असमंजस से जूझना पड़ता है। ये दुख असहनीय होता है। ऊपर से कई और सवालों का घेरा खड़ा हो जाता है। घर-परिवार से जुड़े अहम दस्तावेज कहां रखे हैं? किस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट्स हैं? इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी कौन है। क्या कोई वसीयत है? इस विषय में कोई नहीं जानता, क्योंकि किसी को बताया ही नहीं जाता। बहुत से भारतीय परिवारों में इस विषय में संवाद नहीं होता। हम बात ही नहीं करते कि हमारे जाने के बाद क्या होगा। लोगों को लगता है कि किसी अनहोनी का खयाल भी मन में क्यों लाएं।

यद्यपि हम बहुत कुछ जानते-समझते हुए भी इस विषय में मौन रहते हैं, पर इससे कष्ट को ही न्यौता देते हैं।

50वें पड़ाव को पार कर चुकी

मैंने ऐसी परिस्थितियों को बहुत करीब से देखा है। एक महिला आयु के 50वें पड़ाव को पार कर चुकी थीं। वह शिक्षित थीं और उनकी जिंदगी में सबकुछ अच्छा चल रहा था, तभी एक दिन उनके पति गुजर गए। उनके निवेश, फ्लैट और कुछ बचत थी। परिवार की वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी बातों का खयाल वही रखते थे, पर एक जरूरी काम वसीयत उन्होंने नहीं बनाई, न ही बेटी के जन्म के उपरांत दस्तावेजों में नॉमिनी अपडेट किया। परिवार को ये भी नहीं बताया कि सभी जरूरी दस्तावेज कहां रखे हैं। इस वजह जिन चीजों का समाधान तत्काल हो जाता, उनकी कागजी कार्यवाई, कानूनी नोटिस, संस्थाओं में जाकर अधिकारियों से मुलाकात करके सब कुछ क्रम में लाने में दो साल का समय लग गया। इन सबके बीच पति को खोने का दुख भी था।

जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, उसे वसीयत से वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन पत्नी की आर्थिक मजबूती अवश्य सुनिश्चित की जा सकती थी। वास्तव में वसीयत इसी के लिए होती है। वसीयत का अर्थ मृत्यु या दुर्भाग्य को आमंत्रण देना नहीं होता, जैसा कि सामान्य लोग सोचते हैं। वह कुछ निर्देशों से जुड़ा पत्र होता है। इसके माध्यम से जिनसे आप प्रेम करते हैं, उन्हें ये बताते हैं कि जिस संपत्ति को आपने इतनी मेहनत से बनाया है, उसे किस प्रकार इस्तेमाल किया जाना है। वसीयत में लिखी बातें कानूनी रूप से बाध्यकारी होती हैं। उससे किसी भी प्रकार के असमंजस व विवादों का समाधान होता है। जिन लोगों का आपको इतना खयाल रहता है, उन्हें आप कठिन समय में सुरक्षित रख पाते हैं, उनके लिए निर्णयों को सहज बनाते हैं। 

इसके बावजूद जब मैं महिलाओं से वसीयत के बारे में बात करती हूं तो सामान्य सा जवाब होता है कि मेरे पास क्या है देने के लिए? वसीयत की क्या ही आवश्यकता है? मेरे पास कोई संपत्ति नहीं है, बचत भी छोटी है। सबकुछ तो पति के नाम पर है, इसलिए मैं वसीयत में किन चीजों का उल्लेख करूंगी?

मन के भावों को व्यक्त करना अच्छी बात है, पर वसीयत को लेकर उपरोक्त सोच रखना गलत है।

आभूषण की जानकारी भी जरूरी

जिस महिला के पास आभूषण हैं, उसके पास भी देने के लिए है। जिसका बैंक अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट, पीपीएफ या एसआइपी होती है, उसके पास भी देने के लिए कुछ होता है। कौन सी बेटी को अपने सोने के गहने देने हैं, बच्चों की जिम्मेदारी किसे सौंपनी है, ये सब बातें जिसके मन में चलती हैं, उस महिला के पास भी वसीयत के लिए बहुत कुछ होता है। वसीयत सिर्फ अमीरों के लिए नहीं होती। ये किसी के लिए भी काम का दस्तावेज हो सकती है, जिसके मन में ये बातें चलती हों कि उसकी मृत्यु उपरांत उसकी चीजों के साथ क्या होना चाहिए, किन लोगों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। कोई भी महिला अपनी वसीयत में इन बातों को मजबूती से रख सकती है।

भारत में वसीयत के बगैर मृत्यु होने पर संबंधित व्यक्ति की संपत्ति को उसके धर्म के अनुरूप पर्सनल कानून के अनुसार बांट दिया जाता है। ये जरूरी नहीं कि इस बंटवारे में व्यक्ति की इच्छाओं का मान हो, हो सकता है कि जिन्हें आप सुरक्षित रखना चाहते हों उन्हें इसके लिए कई वर्ष कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े, इस प्रक्रिया में रिश्ते भी प्रभावित होते हैं। वसीयत लिखने से ये सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

अच्छी खबर ये है कि इस प्रकार अपनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जटिल प्रक्रिया में उलझने, वकील या बड़ी संपत्ति की अनिवार्यता नहीं होती। वसीयत तैयार करना आसान है।

यद्यपि इसके लिए वकील की आवश्यकता नहीं होती, पर यदि वह हो तो चीजें थोड़ी आसान हो जाती हैं। इसके लिए स्टांप पेपर की भी आवश्यकता नहीं होती। सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में वसीयत पंजीकृत कराने पर उसे चुनौती देना कठिन हो जाता है, हालांकि ये अनिवार्य नहीं है। एक वैध वसीयत के लिए बस ये जरूरी होता है कि उसे लिखने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ हो, उसे ये स्पष्ट रूप से उल्लेख करना पड़ेगा कि ये आपकी अंतिम वसीयत है, उसमें दिन और जगह का उल्लेख होना चाहिए, संपत्ति का विवरण हो और ये बताया जाए कि उसका उत्तराधिकारी कौन होगा। वसीयत पर दो गवाहों की उपस्थिति में आपके हस्ताक्षर होने चाहिए। ये गवाह उत्तराधिकार प्राप्त करने वालों से इतर व्यक्ति होने चाहिए। गवाहों के भी हस्ताक्षर वसीयत पर होने चाहिए। इस तरह निर्मित वसीयत वैध होती है।

वसीयत में अन्य किन बातों का उल्लेख होना चाहिए? आपका नाम और पता, संपत्ति का पूर्ण विवरण, प्रत्येक के सामने उस व्यक्ति का नाम लिखा जाना चाहिए जिसे वह संपत्ति देने की आपकी इच्छा हो, साथ ही उस व्यक्ति से आपका संबंध क्या है, इसका भी उल्लेख होना चाहिए। अगर संतान अवयस्क है तो संरक्षक का नाम लिखें। उस व्यक्ति का नाम लिखें जिसपर वसीयत को बताने की जिम्मेदारी हो, उस व्यक्ति को ये जानकारी होनी चाहिए कि वसीयत कहां रखी है।

यहां कुछ और बातों को भी जानना लाभकारी होगा। बहुत से लोग जो वसीयत लिखने बैठते हैं, उन्हें कानूनी पक्ष इतना कठिन नहीं लगता। उन्हें इसके लिए स्वयं को मानसिक रूप से तैयार करना कठिन प्रतीत होता है। उसे टालने का हमेशा कोई न कोई बहाना निकल आएगा। ये जानना चाहिए कि वसीयत को कभी भी बदला या निरस्त किया जा सकता है। नई वसीयत के सामने पुरानी वसीयत अमान्य हो जाती है। इसका दबाव नहीं होता कि पहली बार कोई वसीयत कर रहे हैं तो वही अंतिम होगी। इसलिए क्यों न एक वसीयत लिखें, भले ही आज आपको ऐसा लगता हो कि भविष्य में उसमें बदलाव करना पड़ेगा। जिंदगी में बदलावों के साथ वसीयत को अपडेट कर सकती हैं। जिंदगी के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों जैसे शादी, बच्चे के जन्म, नई संपत्ति की खरीद या फिर किसी लाभार्थी की मृत्यु होने पर उसे बदल सकती हैं।

वसीयत तैयार करने का सबसे अच्छा समय बीता हुआ कल था, उसके बाद जो सबसे अच्छा समय है वो है वर्तमान।
इस हफ्ते एक कदम उठाएं। जिन चीजों पर आपका स्वामित्व है, उसकी सूची बनाएं जैसे आपका बैंक अकाउंट, निवेश, इंश्योरेंस पालिसियां, संपत्ति, आभूषण इत्यादि। अब प्रत्येक के सामने उस व्यक्ति या लाभार्थी का नाम लिखें जिसे आप वह देना चाहती हैं। ये सूची आपकी वसीयत का आधार बनेगी। इसके बाद सही प्रारूप में उसका दस्तावेजीकरण करें। दो गवाहों की उपस्थिति में हस्ताक्षर करने के साथ ही आपकी वसीयत तैयार हो जाएगी। जरूरी नहीं कि वसीयत हर लिहाज से संपूर्ण हो, पर उसे तैयार करना ही चाहिए।

जिन्हें आप प्रेम करते हैं, उनके लिए इतना तो कर ही सकते हैं कि उन्हें सिर्फ आपके जाने का दुख हो, अन्य प्रकार की कठिनाइयों से उन्हें जूझना न पड़े।

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Images: magnific