Dussehra Safety Tips For Children: दशहरा बच्चों के लिए सिर्फ रावण दहन देखने का मौका नहीं, बल्कि अच्छाई की बुराई पर जीत और त्योहारों की खुशियों को करीब से समझने का भी समय है। इस दिन बच्चे मेला देखने, झूले झूलने, खिलौने खरीदने और आतिशबाजी देखने के लिए काफी उत्साहित रहते हैं। लेकिन त्योहारों की भीड़ और रावण दहन के दौरान होने वाली आतिशबाजी के बीच बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही बच्चों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। अगर आप भी इस दशहरे पर अपने बच्चों को मेला और रावण दहन दिखाने ले जा रही हैं, तो नीचे लेख में बताई गई बातों का खास ध्यान दें।

बच्चों को रावण दहन दिखाने ले जा रही हैं, तो ये 6 बातें रखें ध्यान

दशहरा पर्व पर जगह-जगह पर रामलीला और मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इन कार्यक्रम का लुफ्त उठाने जाते हैं। अगर आप भी रामलीला में बच्चों को ले जा रही हैं, तो नीचे बताए गए 6 बातों का खास ध्यान रखें, ताकि किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

1. भीड़ में बच्चों का हाथ बिल्कुल न छोड़ें

दशहरे के दिन रावण दहन वाली जगहों और मेलों में काफी भीड़ होती है। कई बार लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं, जिससे छोटे बच्चों के खोने या भीड़ में दबने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों को अपने साथ रखें और भीड़भाड़ वाली जगह पर उनका हाथ पकड़कर चलें। अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो उसे समझाएं कि भीड़ में अकेले कहीं नहीं जाना है।

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बच्चे को पहले से अपना नाम, माता-पिता का नाम और किसी एक अभिभावक का मोबाइल नंबर याद करवाएं। छोटे बच्चे की जेब में एक पर्ची भी रख सकती हैं, जिस पर आपका नाम और फोन नंबर लिखा हो। अगर बच्चा आपसे बिछड़ जाए, तो उसे बताएं कि वह किसी पुलिसकर्मी, सुरक्षा कर्मचारी या मेले में मौजूद अधिकृत सहायता केंद्र के पास जाए। उसे किसी अनजान व्यक्ति के साथ वहां से जाने के लिए न कहें।

2. रावण दहन देखते समय सुरक्षित दूरी बनाकर रखें

रावण दहन बच्चों के लिए बेहद रोमांचक होता है, लेकिन इस दौरान पटाखे, जलते हुए तीर और रावण के पुतले से गिरने वाले जलते हिस्से चोट पहुंचा सकते हैं। इसलिए बच्चों को पुतले के बिल्कुल पास ले जाने से बचें। आयोजकों और पुलिस की ओर से जो सुरक्षित दूरी तय की गई हो, उसका पालन करें।

बच्चों को ऐसी जगह खड़ा करें, जहां से उन्हें रावण दहन साफ दिखाई दे और उन्हें धक्का-मुक्की का सामना भी न करना पड़े। बैरिकेडिंग पार करके आगे जाने की कोशिश न करें। अगर अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बने या लोग तेजी से इधर-उधर भागने लगें, तो बच्चे को कसकर अपने साथ रखें और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों के अनुसार सुरक्षित स्थान की ओर बढ़ें।

3. बच्चों के कपड़े और जूते सोच-समझकर चुनें

त्योहार पर बच्चों को सुंदर और नए कपड़े पहनाना हर माता-पिता को अच्छा लगता है। लेकिन रावण दहन और मेले में जाते समय कपड़ों की सुंदरता के साथ उनकी सुविधा का ध्यान रखना भी जरूरी है। बहुत लंबे, जमीन पर घिसटने वाले या आसानी से आग पकड़ने वाले कपड़ों से बचें। खासकर पुतले के पास जलती हुई आतिशबाजी के दौरान सिंथेटिक और ढीले कपड़ों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें।

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बच्चों को आरामदायक जूते पहनाएं, जिनमें वे आसानी से चल सकें। चप्पल या ऐसे जूते पहनाने से बचें, जो भीड़ में निकल जाएं या जिनमें पैर फिसलने का खतरा हो। अगर मौसम ठंडा हो, तो हल्की जैकेट साथ रखें। कपड़े ऐसे हों कि बच्चा बिना परेशानी के चल सके और जरूरत पड़ने पर जल्दी से सुरक्षित जगह पर पहुंच सके।

4. मेले में खाने-पीने की चीजें खरीदते समय सावधानी बरतें

मेले में रंग-बिरंगी मिठाइयां, चाट, गोलगप्पे, आइसक्रीम और कई तरह के स्नैक्स देखकर बच्चे उन्हें खाने की जिद करने लगते हैं। लेकिन भीड़भाड़ वाले स्थान पर खुले में रखे खाने की चीजों की साफ-सफाई का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए बच्चों को खाना खिलाने से पहले दुकान की स्वच्छता पर ध्यान दें।

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ऐसी दुकान से खाने की चीजें लें, जहां खाना ढककर रखा गया हो और साफ पानी का इस्तेमाल किया जा रहा हो। लंबे समय से खुले में रखे खाद्य पदार्थों और गंदे बर्तनों में परोसे जाने वाले खाने से बचें। बच्चों के लिए घर से पानी की बोतल और हल्का नाश्ता ले जाना भी अच्छा विकल्प है। इससे उन्हें बार-बार बाहर का खाना खिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही, बच्चे को समय-समय पर पानी पिलाते रहें, ताकि भीड़ और चलने-फिरने के कारण थकान न हो।

5. झूले और दूसरे मनोरंजन के साधनों की सुरक्षा जांचें

मेले में पहुंचते ही बच्चों की नजर सबसे पहले झूलों, खिलौनों और दूसरे मनोरंजन के साधनों पर जाती है। लेकिन किसी भी झूले पर बैठाने से पहले उसकी सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। देखें कि झूला ठीक तरह से लगा है या नहीं, उसमें सुरक्षा बेल्ट या लॉक मौजूद है या नहीं और उसे चलाने वाला व्यक्ति बच्चों को सही तरीके से बैठा रहा है या नहीं।

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बच्चे की उम्र और लंबाई के हिसाब से ही झूला चुनें। अगर झूले पर उम्र या लंबाई से जुड़ी कोई सीमा लिखी है, तो उसका पालन करें। चलते हुए झूले में बच्चे को खड़े होने, हाथ बाहर निकालने या सीट बेल्ट खोलने न दें। अगर झूला अस्थिर लग रहा हो, उसमें जरूरत से ज्यादा लोग बैठे हों या सुरक्षा व्यवस्था ठीक न दिखे, तो बच्चे को उस पर बैठाने से बचें।

6. मेले में जाने से पहले जरूरी चीजों की छोटी-सी किट तैयार करें

बच्चों के साथ मेले में जाने पर छोटी-छोटी जरूरतें कभी भी सामने आ सकती हैं। इसलिए घर से निकलने से पहले एक छोटा बैग तैयार कर लें। इसमें पानी की बोतल, टिश्यू, सैनिटाइजर, बच्चे की जरूरत की दवाएं यदि कोई नियमित रूप से लेता हो, और एक अतिरिक्त कपड़ा रखा जा सकता है। छोटे बच्चों के साथ जा रही हैं, तो उनकी उम्र के हिसाब से जरूरी सामान भी साथ रखें।

इसके अलावा, मेले में पहुंचते ही प्रवेश और निकास द्वार, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और पुलिस सहायता केंद्र की जगह देख लें। मोबाइल फोन चार्ज रखें और परिवार के किसी दूसरे सदस्य को भी साथ रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर मदद मिल सके। अगर बच्चा बहुत छोटा है, तो उसे ऐसी जगह ले जाने से बचें जहां तेज आवाज, धुआं या बहुत ज्यादा भीड़ हो। 

बच्चों को दशहरा घूमने के साथ ही समझाएं मतलब

रावण दहन दिखाने ले जा रही हैं, तो बच्चों को सिर्फ पुतला जलने का दृश्य दिखाकर वापस न आएं। उन्हें आसान भाषा में बताएं कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। रामायण की कहानी के माध्यम से उन्हें सत्य, साहस, धैर्य और दूसरों का सम्मान करने जैसी अच्छी बातें समझा सकती हैं।

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बच्चों को यह भी बताएं कि त्योहार मनाने का मतलब दूसरों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना है। भीड़ में धक्का न देना, कूड़ा इधर-उधर न फेंकना और तय निर्देशों का पालन करना भी अच्छे व्यवहार का हिस्सा है।

अगर आप ऊपर लेख में बताई गई बातों का ध्यान रखती हैं, तो न केवल आप दशहरा मेला और रामलीला रावण दहन कार्यक्रम को अच्छे से देख पाएंगी बल्कि बच्चों को भी सुरक्षित रख पाएंगी।

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