एक बार घोड़े पर सवार कोई युवक जंगल के बीच चला जा रहा था। राह में उसे एक संत मिले। उन्होंने उससे पूछा, "बेटा! कहां जा रहे हो?" तो वह युवक बोला, "घोड़े से पूछकर बताता हूं।" जरा सोचिए कि वह घोड़ा कौन है? दरअसल, वही हमारा मन है। वह हमें किस दिशा में ले जा रहा है, यह बात अक्सर हमें मालूम ही नहीं होती और हम उसकी गुलामी करते हुए निरंतर निरुद्देश्य और दिशाहीन भटकते रहते हैं। इसके लिए ट्रूथ स्पीकर एवं दिहृडल के फाउंडर डॉ.अमित कासलीवाल से बात की है। जानते हैं आगे...

खुद से बढ़ती दूरियां

बचपन की दुनिया बहुत सुंदर और मासूमियत भरी होती है, लेकिन युवावस्था में कदम रखते ही हमारे लिए सब कुछ बदल जाता है। इस तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के बीच सबसे आगे निकल जाने की होड़ लगी है। कड़ी प्रतिस्पर्धा भरी जिंदगी की इस दौड़ में हम कहां खो जाते हैं, हमें खुद ही पता नहीं चलता।

हम यह भूल गए हैं कि हमारे जन्म के बाद ही हमारे सारे पारिवारिक रिश्ते तय होते हैं और हम स्वयं को छोड़ बाकी सभी संबंधों को सुधारने की कोशिश में जुटे रहते हैं। हमें हमेशा दूसरों का जीवन आकर्षित करता है। अपने चौबीस घंटों में से लगभग पांच-छह घंटे का वक्त हम दूसरों की अच्छाई-बुराई के बारे में सोचकर गंवा देते हैं। अपने जीवन को सार्थक और सफल बनाने के लिए हमें क्या करना चाहिए? इस ओर हमारा ध्यान भी नहीं जाता।

अपनी खुशियों की अहमियत को समझें

अपना ख्याल रखना और खुद से प्यार करना हर व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि पहले हमें परिवार और आसपास के लोगों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए, लेकिन ऐसी धारणा रखने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि दूसरों की मदद करने के लिए पहले स्वयं को स्वस्थ और प्रसन्न रखना बहुत जरूरी है; अन्यथा परोपकार असंभव है।

इसलिए जीवन में प्रसन्नता और सम्मान हासिल करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि पहले आप खुद खुश रहें और स्वयं का सम्मान करें। जिन कार्यों से आपको सच्ची प्रसन्नता मिलती है, आप वही करें। दूसरों की नजर में खुद को सही या अच्छा साबित करने की कोशिश न करें। बेहतर यही होगा कि आप स्वयं ही अपने मार्गदर्शक बनें।


कमियां निकालने में न करें समय बर्बाद

अगर आप स्वयं के साथ मधुर संबंध कायम रखना चाहते हैं, तो दूसरों में कमियां तलाशना बंद कर दें। ऐसा करने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और वह नकारात्मक चिंतन की ओर बढ़ने लगता है। इसलिए हमेशा अच्छा सोचें और अच्छा बोलें। दूसरों की आदतें सुधारने की कोशिश व्यर्थ है, इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपने भीतर सकारात्मक बदलाव लाएं और हर हाल में खुश रहने की कोशिश करें।

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करें खुद से कुछ सवाल

अगर आप सचमुच तनावमुक्त और प्रसन्न रहना चाहते हैं, तो दूसरों के बारे में निरर्थक बातें सोचकर अपना कीमती समय बर्बाद करने के बजाय शांतचित्त होकर ईमानदारी से आत्म-निरीक्षण करें। इसके लिए अपनी अच्छी और बुरी आदतों की एक सूची बनाएं।

क्रोध और लोभ जैसी नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश करें, क्योंकि ये केवल मन के लिए ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत नुकसानदेह साबित होती हैं। इसलिए दूसरों को उनकी खूबियों और खामियों के साथ स्वीकारने की आदत विकसित करें। अपने गुणों को पहचानकर उन्हें निखारें और उन पर गर्व करें। आत्म-संतुष्टि की भावना से आपको स्वयं के अस्तित्व का परिचय मिलता है, जो कि एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इस बात पर भी गौर करें कि आपकी जीवनशैली और दिनचर्या कैसी है? अपने खानपान की आदतों पर ध्यान दें, क्योंकि वह पुरानी कहावत तो आपने भी सुनी होगी— "जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन।"

इसलिए अपनी रसोई में घी, तेल और मिर्च-मसाले का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। पौष्टिक, सादा और संतुलित खानपान अपनाएं। हरी सब्जियों और फलों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। उम्र और शारीरिक दशा के अनुकूल नियमित रूप से व्यायाम और मॉर्निंग वॉक करें। ऐसी गतिविधियां तन के साथ मन को भी चुस्त और प्रसन्न रखती हैं।

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लक्ष्य निर्धारित करें

हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई ऐसा लक्ष्य जरूर होना चाहिए, जो उसे खुश और सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करे। अगर जीवन का कोई लक्ष्य न हो, तो उदासी और निराशा जैसी नकारात्मक भावनाएं व्यक्ति के दिमाग पर हावी होने लगती हैं। आप अपने लिए ऐसा लक्ष्य चुनें, जो न केवल आपकी रुचि के क्षेत्र से जुड़ा हो, बल्कि समाज और देश के लिए भी हितकारी साबित हो।

जी लें हर पल को

अतीत की दुखद घटनाओं को याद करके उदास होने या भविष्य के बारे में सोचकर चिंतित होने के बजाय बेहतर यही होगा कि वर्तमान के हर पल को जी भरकर जी लें। छोटी-छोटी बातों में खुशियां ढूंढें और प्रकृति के साथ थोड़ा वक्त बिताएं। इससे आप स्वयं को ऊर्जावान महसूस करेंगे।

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जीवन में खुश रहने के 5 नियम

अगर आप अपने जीवन में खुश रहना चाहते हैं तो यहां दिए नियम आपके काम आ सकते हैं-

  • अपने निर्णय स्वयं लें
  • धैर्य कायम रखें
  • अच्छे दोस्त बनाएं
  • दूसरों से अपनी तुलना न करें
  • परिवार के साथ वक्त बिताएं

लेखक: गीतांजलि

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