जिंदगी में कई बार ऐसे दिन आते हैं जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है, फिर भी अंदर से सब कुछ अधूरा सा लगता है। आप सुबह उठते हैं, रोज की तरह अपने सारे काम निपटाते हैं, लोगों से मिलते-जुलते हैं और रात को सो जाते हैं, लेकिन इस पूरी भागदौड़ के बीच अचानक मन में ख्याल आता है कि आखिर आप यह सब किसलिए कर रहे हैं? इस उलझन को शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता।
कई बार यह भावना किसी बड़े झटके के बाद पैदा होती है, तो कभी रोज की एक जैसी लाइफ से आई बोरियत की वजह से। कभी-कभी तो सब कुछ सही होने के बावजूद मन में खालीपन महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी बड़े फैसले पर पहुंचने के बजाय थोड़ा रुककर खुद से कुछ सीधे और सच्चे सवाल पूछना मददगार साबित हो सकता है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि अपने आप से कौन से सवाल पूछें? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
खुद से कौन से सवाल पूछें?
यहां दिए गए कुछ सवाल, जो आप अपने पास से पूछ सकती हैं, आपके बेहद काम आ सकते है, जानते हैं इनके बारे में-
1. क्या मैं जो काम कर रही हूं उसमें मेरी मर्जी है?
दूसरों की उम्मीदों के हिसाब से बनाई गई दिनचर्या को फॉलो करते-करते कई साल बीत जाते हैं। एक खास तरह का करियर, रहने का तरीका या फिर सफलता का दायरा, हम अक्सर दूसरों को देखकर तय करने लगते हैं।
- खुद से पूछें कि आपकी मौजूदा जिंदगी का कौन सा हिस्सा सच में आपका अपना है।
- ध्यान दें कि ऐसी कौन सी चीजें हैं, जिन्हें आप सिर्फ दूसरों की देखा-देखी या मजबूरी में कर रही हैं।
- सब कुछ एक दिन में नहीं बदल सकता, लेकिन बनावटी चीजों को पहचानना ही सही रास्ते की पहली शुरुआत होती है।
2. आखिरी बार मैंने कब पूरी तरह से सुकून महसूस किया था?
सुकून सिर्फ बड़ी उपलब्धियों में ही नहीं छिपा होता। यह किसी देर रात तक चली बातचीत में हो सकता है, अकेले बैठकर चाय की चुस्की लेने में, लंबी पैदल सैर में या फिर किसी बात पर खुलकर हंसने में भी मिल सकता है।
- याद करें कि आखिरी बार ऐसा कब हुआ था जब आप समय देखना ही भूल गई थी।
- वे कौन से छोटे-छोटे पल थे, जिन्होंने आपको अंदर से खुशी दी थी।
- किसी भी टाइम-टेबल या रूटीन से ज्यादा यह छोटा सा इशारा आपको आपकी असल खुशी के करीब ले जाएगा।
3. ऐसा कौन सा दुख है, जिसे मैं नजरअंदाज कर रही हूं?
कई बार जिसे हम खालीपन समझते हैं, वह दरअसल अंदर छिपा हुआ कोई पुराना दर्द या दुख होता है। यह किसी अपने से दूरी, टूटे रिश्ते, किसी छूटे हुए सपने या फिर अपनी किसी अधूरी उम्मीद से जुड़ा हो सकता है।
- हम अक्सर खुद से उम्मीद करते हैं कि बिना रुके आगे बढ़ते रहें।
- हम यह स्वीकार ही नहीं करते कि किसी बात का हमारे दिल पर कितना गहरा असर पड़ा था।
- अपने नुकसान और दर्द को स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि आप अतीत में अटके हैं, बल्कि यह खुद को संभालने का एक तरीका है।
4. अगर कोई देखने वाला न हो, तो मैं कैसी जिंदगी जीना चाहूंगी?
एक ऐसी जिंदगी की कल्पना करें, जिसे दूसरों के सामने साबित न करना पड़े। न तो किसी रिश्तेदार को प्रभावित करने की जरूरत हो और न ही सोशल मीडिया पर दिखाने का दबाव।
- सोचें कि आप अपने हर दिन को कैसा महसूस करना चाहते हैं।
- क्या आप शांति, रचनात्मकता, सादगी या फिर रोमांच की तलाश में हैं?
- यह सवाल आपका ध्यान दूसरों के सामने अच्छा दिखने के बजाय खुद के लिए सही जिंदगी जीने पर केंद्रित करता है।
5. यह मुश्किल दौर मुझे खुद के बारे में क्या सिखा रहा है?
हर कठिन दौर को जबरदस्ती किसी सीख से जोड़ना जरूरी नहीं होता। कुछ बातें सिर्फ तकलीफ देती हैं और इस सच को स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है।
- फिर भी, मुश्किल समय हमें हमारी सीमाओं और प्राथमिकताओं का एहसास जरूर करा देता है।
- यह हमें बताता है कि हम अब तक क्या बर्दाश्त करते आ रहे थे और अब हमें किन चीजों को बदलने की जरूरत है।
- यह पूछने के बजाय कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है, यह सोचें कि यह स्थिति मुझे खुद को समझने का क्या मौका दे रही है।
निष्कर्ष
जिंदगी की उलझनों के जवाब रातों-रात नहीं मिलते और न ही इसकी कोई जल्दी होनी चाहिए। जब भी रास्ता धुंधला दिखाई दे, तो बड़े कदम उठाने के बजाय इन 5 सवालों के जरिए खुद को समझने की कोशिश करें।
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