दर्द के कारण आज सविता जी से न तो बैठा जा रहा था और न ही लेटा जा रहा था। मां की यह हालत देखकर प्राची ने कहा, “मां, आज तो आपको डॉक्टर के पास चलना ही पड़ेगा। देखिए, दर्द से आपकी क्या हालत हो गई है!” सविता जी ने हमेशा की तरह टालने की कोशिश की, लेकिन प्राची ने उनकी एक न सुनी और डॉक्टर से फोन पर अपॉइंटमेंट ले लिया। फोन रखते ही उसे अचानक कुछ याद आया। “अरे! मैं तो भूल ही गई थी। दो बजे केटरर को बुलाया है, पूरा मेन्यू तय करना है। अब मैं आपके साथ कैसे चलूंगी?”

तभी नातिन बबली बोली, “नानी मेरे साथ चलेंगी। उस समय मेरा पार्लर में अपॉइंटमेंट है और ड्राइवर को भी मैंने बोल रखा है। क्यों नानी, आप मेरे साथ चलेंगी न?”दर्द से परेशान सविता जी सिर्फ सहमति में गर्दन हिला सकीं। सविता जी और उनके पति परेश जी अपनी दोहिती की शादी की तैयारियों में बेटी का हाथ बंटाने खुशी-खुशी आए थे और अब अचानक उनका पीठ और कमर का दर्द बढ़ गया था। उन्हें लग रहा था कि उन्होंने बच्चों का काम और बढ़ा दिया है।

परेश जी उनकी परेशानी समझ गए। उन्होंने कहा, “मैं हूं न घर पर। बच्चों के साथ केटरर से बात कर लूंगा। तुम बबली के साथ डॉक्टर को दिखा आओ। पहले थोड़े ही पता था कि यहां आकर दर्द इतना बढ़ जाएगा।” कहते हुए सविता जी ने उठने की कोशिश की, लेकिन दर्द के कारण उनके मुंह से चीख निकल गई। किसी तरह झुकी कमर के साथ धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए वे जाने के लिए तैयार हुईं।डॉक्टर को दिखाकर जब तक सविता जी बाहर आईं, तब तक बबली भी जल्दी से पार्लर में हेयरकट करवाकर आ गई थी, ताकि नानी को ज्यादा इंतजार न करना पड़े। नया हेयरकट उसे बहुत पसंद आया था। वह बार-बार कार का शीशा अपनी तरफ करके उसमें अपना चेहरा देख रही थी। कुछ देर बाद उसने पूछा, “हां नानी, डॉक्टर ने क्या बताया?”

सविता जी ने धीमे स्वर में कहा, “डॉक्टर ने बताया है कि रीढ़ की हड्डी अपनी जगह से खिसक गई है। उन्होंने कहा है कि अब और ज्यादा मत झुकना। लंबे समय तक झुकते रहने के कारण रीढ़ की हड्डी में गैप आ गया है।”

“ओह! फिर तो अब आपको बिल्कुल आराम करना चाहिए। शादी के कामों की चिंता मत करना। आजकल तो वैसे भी आधे से ज्यादा काम ऑनलाइन हो जाते हैं। हम लोग कपड़े भी ऑनलाइन पसंद कर लेंगे।”

इतना कहकर बबली का फोन बज उठा। “एक मिनट नानी, सहेली का फोन है।” फोन उठाते ही वह बोली, “हां रितु, हेयरकट करवा लिया। अभी तुझे फोटो भेजती हूं। मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है। तू भी देखकर बता।” इसके बाद बबली अलग-अलग एंगल से सेल्फी लेने और अपनी सहेली को भेजने में बिजी हो गई। सविता जी चुपचाप सीट पर सिर टिकाकर बैठी रहीं। डॉक्टर की बातें उनके मन में बार-बार घूम रही थीं। घर पहुंचने तक बबली अपने फोन में बिजी रही और सविता जी अपनी सोच में डूबी रहीं। घर पहुंचने पर केटरर आ चुका था। प्राची, उसका पति राहुल और परेश जी उसके साथ शादी के खाने का मेन्यू तय करने में व्यस्त थे। प्राची ने मां की तबीयत के बारे में पूछा तो बबली ने जवाब दिया, “कोई चिंता की बात नहीं है। नानी आराम करेंगी तो जल्दी ठीक हो जाएंगी। मेरी शादी तक तो फिर से डांस करने लगेंगी।”

फिर वह बोली, “चलो अब खाना खाते हैं। मुझे बहुत भूख लगी है।” प्राची ने कहा, “हमारा तो हो गया। मैं मंजू से कहती हूं कि तुम्हारा और नानी का खाना लगा दे। मां, आप खाना खाकर दवा ले लेना और फिर आराम से सो जाना।”

सविता जी ने खाना खाया, दवा ली और बिस्तर पर लेट गईं, लेकिन उनकी आंखों से नींद कोसों दूर थी। बार-बार डॉक्टर की बातें उनके कानों में गूंज रही थीं- “अब और ज्यादा झुकने की गुंजाइश नहीं है। लगातार झुकते रहने के कारण आपकी रीढ़ की हड्डी में गैप आ गया है।” यह सुनकर सविता जी को एक साथ हंसी भी आई थी और रोना भी। जिंदगी में पहली बार किसी ने उनसे कहा था- “मत झुकना।” वरना बचपन से ही उन्होंने घर के बड़े-बूढ़ों और माता-पिता से यही सुना था “लड़की जात है, हमेशा झुककर रहना।”
“स्त्री के झुके रहने से ही गृहस्थी बनी रहती है।” सविता जी ने सबकी बातें मानी थीं। वे धीरे-धीरे झुकती चली गईं। इतना झुकीं कि अपनी पसंद-नापसंद, अपनी इच्छाएं और अपनी जरूरतें तक भूल गईं। उन्हें हमेशा से ग्रीन टी पसंद थी, लेकिन ससुराल में सभी अदरक वाली कड़क मसाला चाय पीते थे। जब सास ने पहली बार उनके हाथ में ग्रीन टी देखी तो मजाक उड़ाते हुए कहा था, “यह भी कोई चाय है? लगता है जैसे चाय का पतीला धोकर उसका पानी पी रही हो। तभी तो इतनी नाजुक सी बनी रहती हो।”

उस दिन सविता जी ने कुछ नहीं कहा था। बस चुपचाप अपनी ग्रीन टी छोड़कर वही चाय पीने लगी थीं, जो घर के बाकी लोग पीते थे। शायद तभी से उन्होंने अपने जीवन की हर पसंद, हर इच्छा और हर बात पर झुकना सीख लिया था, लेकिन आज डॉक्टर ने पहली बार कहा था- “अब मत झुकना।” सविता जी सोच रही थीं कि काश, यह बात किसी डॉक्टर ने नहीं, जिंदगी ने उन्हें बहुत पहले समझा दी होती।

अब परेशानी यह थी कि वह शादी में कैसे शामिल होंगी, डॉक्टर ने तो उन्हें झुकने से बिल्कुल भी मना कर दिया था... आग क्या होगा, आखिर सविता ने अपनी बेटी को इसके बारे में सही-सही क्यों नहीं बताया? जानने के लिए इंतजार करें अगले पार्ट का।

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लेखक- संगीता माथुर

 Image credit- इरा टाक, gemini