आज के समय में बच्चों को सही दिशा और अच्छे संस्कार देना हर पेरेंट्स के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे समय में पौराणिक कहानियां केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास का एक मजबूत जरिया साबित हो सकती हैं। खासकर सावन के खास मौके पर भगवान शिव की कहानियां बच्चों के स्वभाव पर गहरा असर डालती हैं। भगवान शिव का व्यक्तित्व बेहद अनोखा है। वे एक तरफ शांत और वैरागी हैं, तो दूसरी तरफ अपने परिवार के प्रति बेहद स्नेही और रक्षक भी हैं। जब बच्चे भगवान शिव और माता पार्वती की कथाएं सुनते हैं, तो उनके मन में निडरता, धैर्य और संतुलन की भावना जन्म लेती है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि शिव कथाएं बच्चों के व्यवहार को कैसे निखार सकती हैं? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे....
1. बच्चों को शिव की कहानियां ही क्यों सुनाएं?
भगवान शिव की हर कथा में एक गहरा जीवन संदेश छुपा होता है। इनकी कहानियों में प्रेम, त्याग, स्वतंत्रता और सुरक्षा का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है। एक तरफ शिव जी का रूप हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी खुद को शांत कैसे रखा जाए, जिससे बच्चों का गुस्सा और चिड़चिड़ापन कम होता है।
वहीं दूसरी तरफ, समुद्र मंथन में विष पीने की कथा से बच्चे समाज के कल्याण के लिए त्याग करना और कड़वी बातों को पचाना सीखते हैं। इससे अलग, शिव जी के पास विषैले सांप भी हैं और नंदी भी, जो यह सिखाता है कि हर जीव के साथ प्रेम और समानता का व्यवहार करना चाहिए।
2. शिव जी के व्यक्तित्व से मिलने वाले बेस्ट पेरेंटिंग टिप्स क्या हैं?
भगवान शिव और माता पार्वती का परिवार हर माता-पिता के लिए एक आदर्श मॉडल पेश करता है।
- शिव जी भले ही एक वैरागी हैं, लेकिन एक पिता के रूप में वे बच्चों को सुरक्षा देने के साथ-साथ उनके अपने रास्ते पर चलने की स्वतंत्रता भी देते हैं।
- शिव जी का स्वरूप जितना शांत है, गलत बात पर उतना ही कठोर भी है। पेरेंटिंग में भी बच्चों को लाड़-प्यार देने के साथ-साथ अनुशासन सिखाना जरूरी है।
- शिवजी के दो पुत्र, कार्तिकेय और गणेश जी की कहानियों से बच्चे यह सीखते हैं कि विपरीत स्वभाव के बावजूद परिवार में एक-दूसरे का सम्मान कैसे किया जाता है।
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3 . पेरेंट्स के लिए इससे जुड़े एक्सपर्ट टिप्स
विशेषज्ञों का मानना है कि शिव कथाएं बच्चों के मन को कई तरीकों से सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। जब बच्चे सुनते हैं कि शिव जी का हर निर्णय और गुस्सा किसी बड़े मकसद के लिए होता था, तो वे बिना वजह रिएक्शन देने के बजाय सोच-समझकर व्यवहार करना सीखते हैं।
शिव जी का सादगी भरा जीवन बच्चों को महंगी और शौ-ऑफ चीजों की होड़ से दूर रखकर सादा जीवन और उच्च विचार अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
बच्चों के चरित्र और स्वभाव को निखारने के लिए भगवान शिव की कहानियां एक बेहतरीन माध्यम हैं। ये कथाएं उन्हें न सिर्फ हमारी जड़ों से जोड़ती हैं, बल्कि जीवन जीने के अनमोल सबक भी देती हैं। इस सावन या हर रोज सोने से पहले बच्चों को शिव जी के प्रेरक प्रसंग सुनाने की आदत डालें।
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