हर नए पेरेंट्स के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या वे अपने बच्चे के सही दिमागी विकास के लिए सही प्रयास कर रहे हैं? आज बाजार में कई तरह के सेंसरी खिलौने, चमकती लाइट वाली गैजेट्स और स्मार्ट बेबी बनाने वाले प्रोडक्ट्स मौजूद हैं। ज्यादातर पेरेंट्स मानते हैं कि जितनी ज्यादा एक्टिविटी होगी, बच्चे का दिमाग उतना ही तेज होगा, लेकिन बाल एक्सपर्ट का मानना है कि शुरुआती महीनों में ज्यादा चमक और शोर फायदे की जगह नुकसान पहुंचाते हैं।

मार्क जुकरबर्ग की अपने शिशु के साथ एक तस्वीर का कुछ समय पहले वायरल हुई, जिससे पता चलता है कि बच्चे के शुरुआती विकास के लिए कोई महंगे खिलौने नहीं, बल्कि सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट फ्लैशकार्ड्स और आपका प्यार भरा साथ ही काफी है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि शुरुआती महीनों में ब्लैक एंड व्हाइट कार्ड्स ही क्यों हैं असरदार?  इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

शुरुआती में ब्लैक एंड व्हाइट कार्ड्स ही क्यों हैं असरदार?

नवजात शिशु का विजुअल सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। शुरुआती समय में बच्चे रंगों को साफ नहीं देख पाते।

  • हाई-कॉन्ट्रास्ट का जादू: शुरुआती महीनों में बच्चे दूर का या धुंधला नहीं, बल्कि अपने पास की चीजों को देखते हैं। ब्लैक एंड व्हाइट जैसे हाई-कॉन्ट्रास्ट पैटर्न्स उन्हें आसानी से आकर्षित करते हैं।
  • फोकस और एकाग्रता: ये कार्ड्स शिशुओं को किसी एक चीज पर ध्यान केंद्रित करने, नजरें टिकाने और चीजों को ट्रैक करने में मदद करते हैं।

टमी टाइम + फ्लैशकार्ड्स

यहां दोनों बातें एक साथ काम करती हैं। बच्चे की गर्दन, कंधे और शरीर के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाने के लिए टमी टाइम यानी पेट के बल लिटाना बेहद जरूरी है, लेकिन कई बार टमी टाइम बच्चों के लिए थोड़ा उबाऊ हो सकता है और माता-पिता के लिए भी मुश्किल होता है। ऐसे में ब्लैक एंड व्हाइट हाई-कॉन्ट्रास्ट फ्लैशकार्ड्स टमी टाइम को एक मजेदार एक्टिविटी में बदल देते हैं।

जब आप टमी टाइम के दौरान बच्चे की आंखों के सामने एक ब्लैक एंड व्हाइट फ्लैशकार्ड रखते हैं, तो इससे बच्चे को अपना सिर उठाने और उस पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिलती है। इससे न केवल उनके शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि उनकी देखने की क्षमता भी बेहतर होती है।

खिलौनों से ज्यादा जरूरी है पेरेंट्स का साथ और आई-कॉन्टैक्ट

फ्लैशकार्ड्स से भी ज्यादा जरूरी वह समय है जो माता-पिता अपने बच्चे के साथ बिताते हैं।

  • चेहरे के भावों से सीखना: बच्चे स्क्रीन या खिलौनों से नहीं, बल्कि आपके चेहरे के भावों, आवाज और आई-कॉन्टैक्ट से सीखते हैं।
  • भावनात्मक सुरक्षा: जब आप टमी टाइम के दौरान बच्चे से बात करते हैं, तो उसमें संवाद की समझ और भावनात्मक सुरक्षा की भावना विकसित होती है।

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बच्चे की आंखों का विकास: पहले 6 महीनों तक

जन्म के समय बच्चे की देखने की क्षमता वयस्कों की तुलना में केवल 8% होती है। वे केवल 8 से 12 इंच की दूरी तक ही साफ देख पाते हैं।

  • शुरुआती 6 हफ्ते: इस दौरान बच्चे केवल परछाई, आउटलाइन और गहरे रंगों के अंतर को समझ पाते हैं।
  • 8 से 12 हफ्ते: धीरे-धीरे उनकी आंखों में रंगों की पहचान शुरू होती है, जिसमें लाल और नीला रंग सबसे पहले दिखता है।
  • 6 महीने तक: 6 महीने का होते-होते बच्चे की विजन कैपेसिटी वयस्कों जैसी हो जाती है।

बच्चे के बेहतर दिमागी विकास के लिए महंगे गैजेट्स या चमकते खिलौनों की नहीं, बल्कि सही उम्र में सही तरीके से ध्यान देने की जरूरत होती है। शुरुआती 2-3 महीनों में ब्लैक एंड व्हाइट कार्ड्स, टमी टाइम और माता-पिता की प्यार भरी मौजूदगी ही नवजात के दिमाग को मजबूत बनाने का सबसे बेस्ट है।

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Images: magnific