आजकल बच्चे अपना ज्यादा समय एआई (AI) के साथ निकालते हैं। ऐसे में एआई पर बढ़ती निर्भरता पेरेंट्स के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरी है। बता दें कि हर छोटे-बड़े सवाल का रेडीमेड जवाब तुरंत मिल जाने के कारण बच्चे न केवल सुस्त होते जा रहे हैं बल्कि अब किताबों से दूर भी हो रहे हैं। बिना सोचे-विचारे मिलने वाली यह जानकारी उनकी खुद की क्रिएटिविटी और डीप थिंकिंग की क्षमता को प्रभावित कर रही है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि एआई के इस दौर में बच्चों को स्क्रीन से दूर करके उनमें बुक रीडिंग की एक सेहतमंद आदत कैसे जगाएं? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
AI क्यों बन रहा है बच्चों का सबसे पक्का दोस्त?
आजकल के बच्चे एआई टूल्स और चैटबॉट्स को आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं क्योंकि यह उन्हें बिना किसी मेहनत के तुरंत और सीधा जवाब दे देता है।
किताबों से चीजें ढूढने में जो समय लगता है, एआई उसे एक सेकंड में खत्म कर देता है। इसके अलावा, एआई का इंटरैक्टिव और दोस्ताना अंदाज भी बच्चों को बहुत पसंद आता है। ऐसे में यह बच्चों को एक वर्चुअल दोस्त जैसा महसूस कराता है।
बच्चे को स्क्रीन से दूर कर ऐसे बनाएं बुक रीडर
- अगर आपका बच्चा साइंस, स्पेस या सस्पेंस कहानियों को पसंद करता है, तो उसे उसी सब्जेक्ट्स की कॉमिक्स या किताबें लाकर दें।
- इससे अलग घर के एक कोने को शांत और आरामदायक रीडिंग जोन में बदलें।
- रात को सोने से कम से कम एक घंटे पहले घर के सभी डिवाइसेज को बच्चों को दूर कर दें।
नोट - एआई को पूरी तरह रोकना भी सही नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी और बुक्स के बीच एक सही बैलेंस बनाना जरूरी है। जब बच्चा एआई से कोई सवाल पूछे, तो उसे कहें कि पहले किताब से पूछो।
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Images: magnific
