आज की जनरेशन (Gen-Z) अपने मम्मी-पापा से पढ़ाई, जॉब, दोस्तों या लाइफ के हर फैसले पर खुलकर बात करती है। पहले के मुकाबले अब बच्चे घर में अपनी बात रखने में काफी कंफर्टेबल रहते हैं, लेकिन इसके साथ ही वे अपनी लपइफ में थोड़ा 'पर्सनल स्पेस' (प्राइवेसी) भी चाहते हैं। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे परिवार से दूर होना चाहते हैं या उन्हें घरवालों से प्यार नहीं है।
असली बात तो यह है कि उनके लिए परिवार का साथ और अपनी खुद की आजादी, दोनों ही चीजें साथ-साथ जरूरी हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से-
Gen-Z Parents से प्यार करते हुए पर्सनल स्पेस क्यों चाहती है?
एक ही घर में रहने का मतलब यह तो बिल्कुल नहीं है कि हर वक्त साथ बैठना या हर काम मिलकर ही करना पड़े। Gen-Z के लिए 'पर्सनल स्पेस' चाहने का मतलब अक्सर बस इतना होता है कि वो कुछ देर अपने कमरे में अकेले बैठना चाहते हैं, कोई गाना सुनना चाहते हैं या बिना किसी से बात किए थोड़ा सुकून भरा समय बिताना चाहते हैं। पूरे दिन पढ़ाई, काम, फोन और लगातार होने वाली बातचीत के बाद थोड़ा अकेले रहना उनके लिए रिलैक्स करने का तरीका होता है।
Image credit- ai
Gen-Z को जिंदगी की हर बात बताना जरूरी नहीं लगता
मम्मी-पापा से रिश्ता अच्छा होने के बावजूद आज की जनरेशन (Gen-Z) अपनी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात शेयर करना जरूरी नहीं समझती है। जैसे
- उनके दोस्त कौन हैं
- वे सोशल मीडिया पर किससे चैट करते हैं
- उन्हें क्या पसंद है
- वे अपने लिए क्या डिसीजन ले रहे हैं
इन सब चीजों को वे अपनी पर्सनल लाइफ का हिस्सा मानते हैं। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे घरवालों से कुछ छिपाना चाहते हैं। वो बस इतना चाहते हैं कि उनकी कुछ बाउंड्रीज का सम्मान किया जाए। जैसे माता-पिता अपनी जिंदगी की हर बात बच्चों को नहीं बताते, वैसे ही बच्चे भी अपनी हर पर्सनल बात शेयर करना जरूरी नहीं समझते हैं।
अकेले रहने की जरूरत Gen-Z को क्यों महसूस होती है?
आज की लाइफ में बातचीत सिर्फ घरवालों से ही नहीं है। फोन, सोशल मीडिया, मैसेज और इंटरनेट की वजह से इंसान पूरे दिन लोगों से घिरा रहता है। ऐसे में कुछ देर बिल्कुल अकेले रहना बड़ा सुकून देने वाला होता है।
- कोई गाना सुनकर टाइम बिताना पसंद करता है
- कोई वॉक पर चला जाता है
- कोई बस चुपचाप बैठना चाहता है
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वो लोगों से नफरत करते हैं या उन्हें पसंद नहीं करते हैं। बात बस इतनी है कि कई बार इंसान को खुद के साथ भी थोड़ा समय चाहिए होता है। गैलप-वाल्टन (Gallup-Walton Family Foundation) की एक रिसर्च में भी जब Gen-Z बच्चों से पूछा गया कि परेशान होने पर वे पेरेंट्स से क्या चाहते हैं, तो 56% बच्चों ने कहा कि उन्हें 'स्पेस' चाहिए। वहीं, 16 से 18 साल के बच्चों में तो यह आंकड़ा 63% तक था।
image credit- shutterstock
क्या अलग कमरे या अकेले समय की जरूरत दूरी का संकेत है?
जेन जी के पर्सनल स्पेस का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इंसान अपनी मर्जी से कुछ भी करने काे आजाद है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि इंसान की जिंदगी की कुछ बातों और उसके समय पर उसका थोड़ा कंट्रोल होना चाहिए। जैसे पढ़ाई या काम के बाद अगर कोई कुछ देर अकेले रहना चाहता है या अपने दोस्तों के साथ समय बिताना चाहता है, तो इस बात को समझना जरूरी है।
Gen-Z अपने पेरेंट से बाउंट्रीज कैसे सेट कर सकती है?
Gen-Z का अपनी प्राइवेसी या पर्सनल स्पेस चाहने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उनका अपने मम्मी-पापा से प्यार कम हो गया है। वो आज भी चाहते हैं कि पेरेंट्स उनके साथ रहें, बस वो यह भी चाहते हैं कि उनकी पसंद, उनके डिसीजन और उनकी बाउंड्रीज की भी इज्जत की जाए। इसके लिए वे खुलकर अपने पेरेंट्स से बातें कर सकते हैं।
अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit-magnific
