फिल्में देखने के शौकीन लोगों के मन में यह अक्सर सवाल आता है कि फिल्म अगर फ्लॉप हो गई है, तो मेकर्स कैसे कमाई करेंगे? आपके भी मन में यह सवाल चलता है, तो बता दें कि फिल्म से कमाई निकालने के लिए कई मेकर्स मिनिमम गारंटी डील करते हैं। इसे आप एक तरह से कॉन्ट्रैक्ट की तरह देख सकती हैं, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर पहले ही मेकर या क्रिएटर को एक निश्चित राशि देता है। मिनिमम गारंटी डील का यूज ज्यादातर फिल्म, म्यूजिक, और गेम पब्लिशिंग जैसे मुद्दों पर होता है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको मिनिमम गारंटी डील क्या है और यह कैसे काम करती है? इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।

मिनिमम गारंटी डील क्यों की जाती है?

डिस्ट्रीब्यूटर पहले से ही फिल्म के मेकर को एक तय अमाउंट देने की गारंटी देता है। यह अमाउंट उसे किसी भी हाल में मेकर को देना होगा, फिर चाहे फिल्म फ्लॉप रहे या हिट। यही कारण है कि इसमें गारंटी डील शब्द जोड़ा गया है। हालांकि, इससे मेकर को भी कई बार नुकसान झेलना पड़ जाता है, ऐसा क्यों? आप उदाहरण से समझें..

  • मान लें कि किसी फिल्म की लागत 100 करोड़ रुपये है।
  • डिस्ट्रीब्यूटर फिल्म के थिएटर रिलीज राइट्स के अधिकार खरीदने के लिए कहता है।
  • डिस्ट्रीब्यूटर मेकर को 120 करोड़ रुपये पहले ही दे देता है, इसके बाद अब मेकर्स को फिल्म की कमाई से मतलब नहीं होगा, क्योंकि फिल्म से जो भी थिएटर कमाई होगी, वह डिस्ट्रीब्यूटर को मिलेगी।
  • इसे ही Minimum Guarantee Deal कहते हैं।

इसे कई लोग Producer के लिए लगभग No-Risk Formula कहते हैं, लेकिन इसे पूरी इंडस्ट्री के लिए नो-रिस्क नहीं कहा जा सकता। ऐसा इसलिए, क्योंकि फिल्म नहीं चली तो, नुकसान डिस्ट्रीब्यूटर को झेलना पड़ता है। हालांकि, अगर फिल्म बहुत ज्यादा चल गई, तो सारी कमाई डिस्ट्रीब्यूटर की हो जाती है। मेकर्स फिर इसमें कोई हिस्सा नहीं मांग पाता। उसे इससे नुकसान तो नहीं होता, लेकिन फायदा भी नहीं होता।

Minimum Guarantee Deal कैसे काम करता है?

इसमें डिस्ट्रीब्यूटर खुद भी मेकर्स के सामने डील का ऑफर रख सकता है। कई बार मेकर्स खुद भी राइट्स बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाते हैं। यह स्टेप उन मेकर्स के लिए अच्छा होता है, जो किसी भी तरह से लॉस झेलने के हालात में नहीं होते, क्योंकि उन्होंने फिल्म में अपना सारा पैसा लगा दिया होता है।

उदाहरण के लिए कोई डिस्ट्रीब्यूटर आया और उसने कहा -”मैं आपकी फिल्म के North India Rights 150 करोड़ रुपये में खरीदता हूं।” इसके बाद अगर मेकर को डील पसंद आई, तो Contract साइन हो जाता है। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर पहले ही पैसे दे देता है।

Distributor इतनी बड़ी रकम देने का Risk क्यों लेता है?

ऐसा तब होता है, जब वह कुछ बातों पर ध्यान देता है, जैसे बड़े स्टार की फिल्म है, तो उसे भरोसा होता है कि कमाई अच्छी होगी। इसके अलावा ट्रेलर पसंद किया जा रहा है या छुट्टियों में रिलीज हो रही है, डिस्ट्रीब्यूटर कई चीजों को ध्यान में रखने के बाद यह फैसला लेता है।

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इससे आप समझ सकते हैं कि सबसे ज्यादा फायदा मेकर्स को ही होता है, क्योंकि उसने अपनी सेफ्टी के लिए पहले ही कमाई का एक हिस्सा डिस्ट्रीब्यूटर से वसूल लिया। Film रिलीज होने से पहले ही Producer की बड़ी रकम वापस आ जाती है।

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Image Credit : magnific