'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' की सफलता के बाद अब भारत, पाकिस्तान और जासूसी की दुनिया के इर्द-गिर्द बुनी एक और फिल्म सिनेमाघरों में उतरी है। फिल्म का नाम है 'उड़ता तीर' और इसमें आयुष्मान खुराना व सारा अली खान लीड रोल में हैं। 'धुरंधर' में जहां मामला काफी गंभीर था, वहीं यह आतंकवाद पर कॉमेडी का वार है। फिल्म में आयुष्मान खुराना एक पाकिस्तानी जासूस का किरदार निभा रहे हैं, जिसके मन में देशभक्ति कूट-कूटकर भरी है, लेकिन वह यह भूल चुका है कि उसे देशभक्ति दिखानी किस देश के लिए है? जासूसी और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर कई फिल्में बनी हैं, लेकिन यह फिल्म इस गंभीर विषय को हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश करती है और यही इसकी खासियत है। चलिए आपको बताते हैं कि आयुष्मान-सारा की कॉमेडी का तीर सही निशाने पर लगा है या फिल्म निशाने से चूक गई है? टिकट बुक करने से पहले यह पूरा रिव्यू जरूर पढ़ लीजिए।

'उड़ता तीर' मूवी रिव्यू

स्टारकास्ट आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, राम कपूर, मुकुल देव, राहुल बोस, गुलशन ग्रोवर
जॉनर स्पाई कॉमेडी
अवधि 2 मिनट 43 सेकेंड
डायरेक्टर आकाश ए कौशिक
देखें या नहीं देखें? फिल्म को हमारी तरफ से 3.5 स्टार। इसे बेशक थियेटर में देखा जा सकता है।

'उड़ता तीर' फिल्म की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी की शुरुआत विक्रांत उर्फ बिलाल अहमद से होती है, जिसका किरदार आयुष्मान खुराना निभा रहे हैं। वह पाकिस्तान का खूफिया एजेंट है, जिसे भारत में जासूसी के लिए भेजा गया है। इनका मिशन तो भारत के खिलाफ साजिश रचना है, लेकिन फिर कुछ ऐसे हालात बनते हैं कि पूरा मिशन गड़बड़ा जाता है और जबरदस्त कॉमेडी आपको पेट पकड़कर हंसने के लिए मजबूर कर देती है। बिलाल अहमद (आयुष्मान खुराना) और उसका दोस्त अशफाक (सुहैल नैय्यर) पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव हैं और वह भारत में एक खतरनाक मिशन को अंजाम देने आए हैं। दोनों भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड यानी CTS में दाखिल हो जाते हैं, जहां बिलाल अफसर बन जाता है। वह डिफेंस मिनिस्ट्री में काम करने वाली यामिनी (सारा अली खान) के साथ प्यार का नाटक करता है, ताकि अपने मिशन को आगे बढ़ा सके। इसके बाद कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ आता है और एक हादसे की वजह से बिलाल की याददाश्त चली जाती है। उसे याद ही नहीं रहता कि वह पाकिस्तानी जासूस है, अब वह असल में खुद को भारतीय अफसर विक्रांत समझने लगता है।

यहां से पूरी कहानी पलट जाती है, क्योंकि अब विक्रांत भारत को अपना वतन मानने लगता है और उस पर देशभक्ति का ऐसा जुनून सवार होता है कि वह भारत में छुपे एक-एक पाकिस्तानी आतंकवादी को पकड़वाने लगता है। उसका दोस्त और पाकिस्तानी हुकूमत सभी हैरान हो जाते हैं कि आखिर वह ऐसा क्यों कर रहा है। इसी बीच जब उसके दोस्त को पता चलता है कि वह सब कुछ भूल चुका है, तो वह उसे उसकी असली पहचान याद दिलाने की कोशिश करता है। अब सवाल यह है कि क्या विक्रांत यानी बिलाल को सब कुछ याद आएगा या नहीं? यह जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रूख करना होगा।

एक्टिंग दमदार या नहीं?

इस फिल्म में लगभग सभी किरदारों ने सधी हुई और कमाल एक्टिंग की है। आयुषमान खुराना यूं भी अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के लिए जाने जाते हैं और यहां भी इस रोल को उन्होंने बखूबी जिया है। सारा अली खान भी यामिनी के किरदार में परफेक्ट बैठती हैं। उनके अलावा, दिवंगत अभिनेता मुकुल देव, राहुल बोस, गुलशन ग्रोवर और राम कपूर सभी ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

निशाने पर लगा उड़ता तीर या नहीं?

उड़ता तीर को धुरंधर का कॉमिक वर्जन कहा जा रहा है और यह पूरी तरह गलत भी नहीं है। असल में इस फिल्म में मुद्दा तो गंभीर है, लेकिन उसे कॉमिक ट्रीटमेंट दिया गया है, जो काफी अच्छा लगता है। इस फिल्म में कई ऐसे सीन्स हैं, जिन्हें देखने और जिन पर यकीन करने के लिए आपको लॉजिक घर पर छोड़कर जाना होगा। हालांकि, कुल मिलाकर फिल्म मजेदार है। फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है, लेकिन इंटरवेल आते-आते कहानी दिलचस्प होने लगती है। इसके बाद जब कहानी क्लाइमैक्स की तरफ बढ़ती है, तो भी कई हंगामे होते हैं। अगर आप दिमाग घर पर रखकर सिर्फ एक हंसाने-गुदगुदाने वाली कॉमेडी फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म अच्छी है।

फिल्म देखें या नहीं?
धर्मा प्रोडरक्शन और सिख्या एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म को एक बार बेशकर देखा जा सकता है। एक गंभीर मुद्दे पर बनी इस फिल्म में जबरदस्त कॉमेडी है और यह आपको हंसने पर मजबूर कर देगी। आप इसे अपने परिवार के साथ एज्वॉय कर सकते हैं।


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