Ramayana Movie Review: जब-जब धरती पर अधर्म ने सिर उठाया, तब-तब मर्यादा ने जन्म लिया। वही मर्यादा आज 21वीं सदी के बड़े पर्दे पर लौट आई है। नाम है- रामायण (Ramayana Movie Review)। रामानंद सागर की रामायण देखने वाली पीढ़ी के लिए यह फिल्म नॉस्टेल्जिया है और नई पीढ़ी के लिए एक ऐसा विजुअल तूफान, जिसे बड़े पर्दे पर ही महसूस किया जा सकता है।

निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा ने इस बार रामकथा को सिर्फ सुनाया नहीं, बल्कि उसे अच्छे से दिखाय भी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कोशिश लोगों के दिल को छू पाई? आइए जानते हैं।

रामायण की कहानी में क्या है नया?

फिल्म की शुरुआत देवताओं और असुरों के महायुद्ध से होती है। लंका पर देवताओं की जीत के बाद रावण की मां कैकसी उसे उसका असली लक्ष्य याद दिलाती है। वह लक्ष्य है लंका को जीतना और तीनों लोकों का स्वामी बनना। मां की बात को आदेश मानकर रावण घोर तप करता है, ब्रह्मा जी से वरदान पाता है और फिर कुबेर से लंका छीन लेता है।

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दूसरी तरफ अयोध्या में राजा दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। गुरु विश्वामित्र यज्ञ में बाधा डालने वाली ताड़का-सुबाहु जैसे राक्षसों का अंत करने के लिए राम को साथ ले जाते हैं। इसके बाद सीता स्वयंवर, वनवास, शूर्पणखा का मोह, लक्ष्मण द्वारा नाक काटना और फिर रावण-जटायु का महायुद्ध दिखता है। फिल्म पहले हाफ में ही आपको त्रेता युग में खींच ले जाती है। इस बार मेकर्स ने माता सीता को सिर्फ त्याग की मूर्ति नहीं, बल्कि एक योद्धा के रूप में दिखाया है। यह नया एंगल लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आएगा।

निर्देशन ने कैसे साधा संतुलन?

नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कहानी को नए अंदाज में कहना, क्योंकि रामायण के बारे में अक्सर हर किसी को पता है और उन्होंने इसमें बाजी मार ली है। अयोध्या का शाही वैभव हो, दंडकारण्य के घने जंगल हों या सोने की लंका, हर फ्रेम में भव्यता दिखी है। पौराणिक मर्यादा को उन्होंने मॉडर्न VFX और CGI से इस तरह जोड़ा है कि कुछ भी बनावटी नहीं लगता।

किसने लूटी महफिल?

रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) ने श्रीराम के रूप में शांत, सौम्य और मर्यादित अवतार दिखाया है। उनकी आंखों में करुणा है और युद्ध में क्षत्रिय का तेज भी। जिन लोगों को उन पर शक था, फिल्म देखने के बाद उनकी राय बदल जाएगी।

फिल्म का असली तूफान हैं यश(Yash)। रावण के अहंकार, विद्वता और ताकत को उन्होंने जिस रौब से निभाया है, वो रोंगटे खड़े कर देता है और उस पर शरद केलकर की भारी आवाज ने रावण के हर सीन को ऐसा बनाया है कि लोग ताली बजाने के लिए मजबूर हो गए हैं। दशानन अवतार वाला सीन तो थिएटर में अलग ही माहौल बना रहा है।

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साई पल्लवी (Sai Pallavi) ने सीता के रूप में बिना किसी ओवर-एक्टिंग के, सिर्फ भावों से किरदार को जीवंत कर दिया। रवि दुबे का लक्ष्मण चंचल, वफादार और गुस्सैल तीनों रंगों में परफेक्ट है। रकुल प्रीत सिंह की शूर्पणखा खूबसूरत और दमदार लगी। अरुण गोविल दशरथ, लारा दत्ता कैकयी, काजल अग्रवाल मंदोदरी और विश्वामित्र के रूप में अंजिक्य देओ ने अपनी छाप छोड़ी। सबसे बड़ा इमोशनल सरप्राइज हैं अनुपम खेर, जिनका जटायु वाला सीन आंखें नम कर देगा।

VFX, एक्शन और म्यूजिक

फिल्म का एक्शन हॉलीवुड लेवल का है। रथ, हथियार, रणनीति सब कुछ रियल लगता है। जटायु और रावण का हवाई युद्ध फिल्म की जान है। हंस जिमर और ए.आर. रहमान का बैकग्राउंड स्कोर शांत सीन में भक्ति जगाता है और युद्ध में रोमांच बढ़ाता है। हालांकि कुछ जगहों पर म्यूजिक उम्मीद से थोड़ा हल्का लगता है।

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कहां रह गई कमी?

3 घंटे में पूरी रामकथा समेटना आसान नहीं था। इसलिए जनकपुर की डिटेल, केवट संवाद और कौशल्या-राम के मां-बेटे वाले सीन बहुत जल्दी निपट गए। कुछ सहायक किरदारों को भी पूरी चमक दिखाने का मौका नहीं मिला।

अगर आप रामकथा को बड़े पर्दे पर भव्य अंदाज में जीना चाहते हैं, तो रामायण थिएटर में ही देखें। यह सिर्फ फिल्म नहीं, आस्था और टेक्नोलॉजी का संगम है। कुछ कमियों के बावजूद यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा कदम है।

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